वीडियो देखिये, हर बारिश में इतने गांव हो जाते हैं कैद: पुलिया पर पानी आते ही थम जाती है जिंदगी
KHULASA FIRST
संवाददाता
खुलासा फर्स्ट, खंडवा।
मानसून की पहली तेज बारिश ने ही जिले के जावर क्षेत्र में ग्रामीण इलाकों की बदहाल स्थिति को एक बार फिर उजागर कर दिया है। बारिश शुरू होते ही नदी-नाले उफान पर आ जाते हैं और कई जगह बनी कम ऊंचाई वाली पुलियाओं के ऊपर पानी बहने लगता है। इसके बाद आसपास के गांवों का संपर्क मुख्य सड़क से पूरी तरह टूट जाता है। हालात इतने गंभीर हो जाते हैं कि ग्रामीण न तो गांव से बाहर निकल पाते हैं और न ही बाहरी लोग गांवों तक पहुंच पाते हैं। हर साल दोहराई जाने वाली इस समस्या के कारण बारिश के दिनों में ग्रामीणों की जिंदगी कई घंटों तक ठहर जाती है।
9 गांवों की लाइफलाइन बन जाती है बंद
खंडवा जिले के जावर क्षेत्र के कई गांव बारिश के दौरान सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। इनमें सहेजला, पीपलकोटा, मंडला, सरगांव, रोहिणी, धनगांव, गोहलारी, सकली और बोदूल सहित अन्य गांव शामिल हैं। इन गांवों के लोगों की रोजमर्रा की जरूरतें खंडवा, जावर और आसपास के कस्बों से जुड़ी हैं। ग्रामीणों को स्कूल, अस्पताल, बाजार और अन्य जरूरी कामों के लिए इसी मार्ग से होकर गुजरना पड़ता है। लेकिन जैसे ही पुलिया के ऊपर पानी चढ़ता है, यह रास्ता पूरी तरह बंद हो जाता है और ग्रामीण अपने ही गांवों में सीमित होकर रह जाते हैं।
बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा असर
बारिश के दिनों में सबसे ज्यादा परेशानी स्कूली बच्चों को उठानी पड़ती है। पुलिया पर तेज बहाव होने के कारण बच्चे स्कूल नहीं पहुंच पाते। कई बार अभिभावक मजबूरी में बच्चों को जोखिम उठाकर नाला पार कराते हैं। वहीं कई परिवार सुरक्षा को देखते हुए बारिश के दिनों में बच्चों को स्कूल भेजना ही बंद कर देते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि हर साल बारिश के चार महीनों में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है।
मरीजों और गर्भवती महिलाओं के लिए बढ़ जाता है खतरा
बारिश के दौरान सबसे बड़ी चिंता स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर होती है। ग्रामीणों के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति की अचानक तबीयत खराब हो जाए या किसी गर्भवती महिला को अस्पताल ले जाना पड़े तो स्थिति बेहद गंभीर हो जाती है। पानी के तेज बहाव के कारण एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाती। मरीजों और उनके परिजनों को घंटों तक पानी कम होने का इंतजार करना पड़ता है। कई बार इलाज में देरी से मरीजों की जान पर भी खतरा बन जाता है।
कम ऊंचाई वाली पुलियाएं बनीं परेशानी की वजह
ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में बनी कई पुलियाएं काफी नीची हैं। सामान्य बारिश में भी पानी इनके ऊपर से बहने लगता है और तेज बारिश के दौरान ये पूरी तरह डूब जाती हैं। पुलिया डूबने के बाद प्रशासन की ओर से आवागमन रोकना पड़ता है, लेकिन ग्रामीणों के लिए कोई वैकल्पिक रास्ते की व्यवस्था नहीं है। लोगों का कहना है कि वर्षों से यही समस्या बनी हुई है, लेकिन हर साल केवल आश्वासन मिलते हैं और स्थायी समाधान नहीं हो पाता।
मजबूरी में जान जोखिम में डालकर पार करते हैं नाले
जरूरी काम होने पर कई ग्रामीण तेज बहाव के बीच पुलिया पार करने की कोशिश करते हैं। यह सफर किसी खतरे से कम नहीं होता। कई बार बाइक सवार और पैदल चलने वाले लोग पानी के तेज बहाव में फंस चुके हैं। इसके बावजूद इन स्थानों पर सुरक्षित आवागमन के लिए अब तक ठोस व्यवस्था नहीं की गई है। ग्रामीणों का कहना है कि रोजमर्रा की जरूरतों के लिए उन्हें अपनी जान जोखिम में डालनी पड़ती है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से स्थायी समाधान की मांग की
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि इन पुलियाओं की ऊंचाई बढ़ाई जाए और जरूरत वाले स्थानों पर स्थायी पुलों का निर्माण कराया जाए। उनका कहना है कि वर्षों से वे बारिश के मौसम में इसी समस्या का सामना कर रहे हैं। विकास की योजनाएं तभी पूरी मानी जाएंगी, जब गांवों का संपर्क साल के चार महीने बारिश के कारण न टूटे।
ग्रामीणों को उम्मीद है कि इस मानसून के बाद प्रशासन इस समस्या को गंभीरता से लेगा और पुल-पुलियाओं के निर्माण की दिशा में ठोस कदम उठाएगा, ताकि आने वाले वर्षों में लोगों को ऐसी परेशानी का सामना न करना पड़े।
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