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वीडियो देखिये, बस अचानक कैसे आग की लपटों से घिर गई: मासूम के साथ क्या दर्दनाक हादसा हुआ; सीट के नीचे क्या मिला, दुखी पिता ने कायम की मिसाल

KHULASA FIRST

संवाददाता

16 मई 2026, 11:24 am
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खुलासा फर्स्ट, शाजापुर।
जिले से करीब 20 किलोमीटर दूर नेशनल हाईवे पर शुक्रवार देर रात एक दिल दहला देने वाला हादसा सामने आया, जहां इंदौर से ग्वालियर जा रही इंटरसिटी एसी बस (MP-07 ZL 9090) में अचानक शॉर्ट सर्किट के कारण भीषण आग लग गई। इस हादसे में शिवपुरी निवासी अभिषेक जैन का चार वर्षीय पुत्र अनय बस के भीतर ही जिंदा जल गया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार बस में यात्रा के दौरान काफी देर से वायरिंग जलने की तेज बदबू आ रही थी और कई यात्रियों, जिनमें मालती शर्मा भी शामिल थीं, ने इसकी शिकायत चालक से की थी, लेकिन चालक ने इसे गंभीरता से नहीं लिया और बस चलती रही। यही लापरवाही आगे चलकर इस भयावह त्रासदी का कारण बनी।

रात लगभग 12 बजे बस नेशनल हाईवे स्थित होटल जैन पथ पर रुकी, जहां कुछ यात्री नीचे उतरकर नाश्ता करने लगे, जबकि कई यात्री बस में ही मौजूद थे। इसी दौरान महज पांच मिनट के भीतर बस में अचानक आग भड़क उठी और देखते ही देखते उसने विकराल रूप ले लिया, जिससे यात्रियों में चीख-पुकार और भगदड़ मच गई।

हादसे के समय बस में 50 से अधिक यात्री सवार थे। आग लगते ही स्थिति इतनी भयावह हो गई कि लोगों को बाहर निकलने का रास्ता तक नहीं मिल रहा था। बस में न तो कोई इमरजेंसी गेट था और न ही आग बुझाने के लिए अग्निशमन यंत्र मौजूद था। यहां तक कि बस का मुख्य दरवाजा भी ठीक से नहीं खुल पाया, जिससे हालात और बिगड़ गए। ऐसे में स्थानीय लोगों और यात्रियों ने हिम्मत दिखाते हुए बस के कांच और खिड़कियां तोड़कर लोगों को बाहर निकालना शुरू किया।

इस अफरा-तफरी के बीच मासूम अनय भीड़ में फंस गया और बाहर नहीं निकल सका। जब तक परिजन उसे बचाने के लिए पहुंचे, तब तक आग इतनी तेज हो चुकी थी कि अंदर जाना जान जोखिम में डालने जैसा था। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, अगर थोड़ी भी देर और होती तो जनहानि का आंकड़ा कहीं ज्यादा हो सकता था। घटना के दौरान बस चालक और क्लीनर मौके से फरार हो गए, जिससे उनकी भूमिका पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।

आग की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड को बुलाया गया, लेकिन यहां भी गंभीर लापरवाही सामने आई। पीड़ित पिता अभिषेक जैन के अनुसार, उन्होंने खुद फायर ब्रिगेड को फोन किया, लेकिन पहली दमकल करीब आधे घंटे की देरी से पहुंची और उसमें पानी ही नहीं था। इसके बाद मक्सी, तराना और शाजापुर से कुल पांच दमकल वाहन मौके पर पहुंचे और काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका, लेकिन तब तक बस पूरी तरह जलकर खाक हो चुकी थी।

आग बुझने के बाद भी मासूम अनय का कोई पता नहीं चल रहा था, जिससे परिजनों की बेचैनी और बढ़ गई। प्रशासन ने जेसीबी मशीन बुलाकर बस को तोड़ना शुरू किया, गेट और खिड़कियां काटने के लिए वेल्डिंग मिस्त्री को बुलाया गया और सीटों को हटाकर सर्च ऑपरेशन चलाया गया। करीब दो घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद सीट के नीचे से बच्चे का कंकाल बरामद हुआ, जिसे पोस्टमॉर्टम के लिए जिला अस्पताल भेजा गया। यह दृश्य इतना भयावह था कि मौके पर मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं।

इस हृदयविदारक हादसे के बीच भी पिता अभिषेक जैन ने अद्भुत साहस और ईमानदारी का परिचय दिया। उन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर कई यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला। इतना ही नहीं, जब वे अपने बेटे को ढूंढ रहे थे, उसी दौरान उन्हें बस के भीतर किसी यात्री के गिरे हुए लाखों रुपए के सोने के गहने मिले, जिन्हें उन्होंने तुरंत तराना थाना प्रभारी रामचरण भदौरिया को सौंप दिया।

अपने इकलौते बेटे को खोने के बावजूद उन्होंने जो मानवता दिखाई, वह पूरे घटनाक्रम में एक मार्मिक उदाहरण बनकर सामने आई। दूसरी ओर, इस घटना ने बसों में सुरक्षा मानकों की पोल खोल दी है। इमरजेंसी एग्जिट का अभाव, अग्निशमन यंत्र की अनुपस्थिति, चालक की लापरवाही और दमकल विभाग की देरी इन सभी ने मिलकर एक मासूम की जान ले ली। अब पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही जा रही है, लेकिन यह हादसा प्रशासन और परिवहन व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर कर गया है, जिन पर तत्काल सुधार की जरूरत है।

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