वीडियो देखिये, शराब पार्टी और तोड़फोड़ के बाद आखिरकार छात्र घुटने टेकने पर मजबूर: माफीनामे से नहीं पिघला प्रशासन; डिग्री-प्लेसमेंट पर लटकी तलवार
KHULASA FIRST
संवाददाता
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के इंजीनियरिंग संस्थान (IET) के रामानुजन हॉस्टल में शराब पार्टी और तोड़फोड़ के मामले में प्रशासन की सख्ती के सामने आखिरकार छात्र घुटने टेकने पर मजबूर हो गए। मंगलवार को आरोपी छात्रों ने सामूहिक वीडियो जारी कर हाथ जोड़कर माफी मांगी और एक मौका देने की गुहार लगाई, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन ने साफ कर दिया है कि माफी से कार्रवाई नहीं रुकेगी।
"करियर बर्बाद हो जाएगा, एक मौका दीजिए"
वीडियो में छात्रों ने कुलपति प्रो. राकेश सिंघई और IET निदेशक प्रो. प्रतोष बंसल के सामने हाथ जोड़कर अपील की। छात्रों का कहना था कि डिग्री रोकी गई और प्लेसमेंट कंपनियों को सूचना भेजी गई तो उनका पूरा भविष्य अंधकारमय हो जाएगा। चार साल की मेहनत एक रात की गलती की भेंट चढ़ जाएगी।
क्या हुआ था उस रात?
कुछ दिन पूर्व रामानुजन हॉस्टल में करीब दो घंटे तक जमकर उत्पात मचाया गया। नशे में धुत कुछ छात्रों ने टेबल-कुर्सियां पलट दीं, वाटर कूलर और पानी की टंकियां तोड़ दीं तथा खिड़कियों के शीशे चकनाचूर कर दिए। सरकारी संपत्ति को हुए इस नुकसान के बाद संस्थान प्रबंधन हरकत में आया और जांच शुरू की गई।
चौतरफा घिरे छात्र, तीन मोर्चों पर कार्रवाई
प्रशासन ने बीटेक फाइनल ईयर के आरोपी छात्रों के विरुद्ध तीन स्तरों पर कार्रवाई की तैयारी कर ली है। यह है- परिणाम पर रोक: हंगामे में संलिप्त छात्रों का परीक्षा परिणाम अनिश्चितकाल के लिए रोका जा सकता है। आर्थिक दंड: प्रत्येक आरोपी छात्र पर 25-25 हजार रुपए का जुर्माना लगाने की तैयारी है। प्लेसमेंट पर खतरा: जिन कंपनियों में छात्रों का कैंपस प्लेसमेंट हो चुका है, उन्हें इस घटना की औपचारिक सूचना भेजी जाएगी।
CCTV से होगी मुख्य आरोपियों की पहचान
IET निदेशक प्रो. प्रतोष बंसल ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज खंगाली जा रही है और मुख्य उपद्रवियों की पहचान की प्रक्रिया जारी है। छात्रों के अभिभावकों को विशेष रूप से इंदौर बुलाया जाएगा और काउंसिलिंग सत्र आयोजित किया जाएगा। प्रो. बंसल ने स्पष्ट किया - "छात्रों ने गलती स्वीकार की है, यह अच्छी बात है, लेकिन सरकारी संपत्ति के नुकसान की भरपाई उन्हें करनी ही होगी। अनुशासनात्मक कार्रवाई नियमों के तहत होगी। अंतिम निर्णय कुलपति लेंगे।"
कुलपति के फैसले पर टिकी नजरें
फिलहाल सभी की निगाहें कुलपति प्रो. राकेश सिंघई के अंतिम फैसले पर टिकी हैं। प्रशासन का रुख देखते हुए माफीनामे से राहत मिलने की संभावना फिलहाल कम नजर आती है। इंजीनियरिंग की डिग्री की दहलीज पर खड़े इन छात्रों के लिए यह मामला जिंदगी का सबसे महंगा सबक साबित हो सकता है।
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