वीडियो देखिये; दो वरिष्ठ नेताओं की मुलाकात से बनी सियासत की उजली तस्वीर: सनातन पर चली बात; कांग्रेस नेता ने जोर देकर ऐसा कहा तो भाजपा नेत्री ने दिया यह जवाब
KHULASA FIRST
संवाददाता
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
मध्य प्रदेश की राजनीति में उस समय एक अलग ही तस्वीर देखने को मिली, जब पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह और भाजपा की वरिष्ठ नेता, पूर्व मंत्री और विधायक उषा ठाकुर आमने-सामने आए। दोनों नेताओं के बीच गर्मजोशी से मुलाकात का वीडियो वायरल होते ही चर्चाओं में आ गया। इस दौरान दोनों के बीच सनातन पर काफी देर तक तार्किक संवाद भी हुआ। यह बातचीत अब चर्चा का विषय बन गई है। वायरल वीडियो में जहां एक ओर वैचारिक मतभेद साफ नजर आते हैं, वहीं दूसरी ओर संवाद की मर्यादा और आपसी सम्मान भी उतनी ही मजबूती से दिखाई देता है। भोजशाला पर मप्र हाई कोर्ट के निर्णय के बाद दिग्विजय सिंह इंदौर आए हैं।
मुलाकात के दौरान उषा ठाकुर ने दिग्विजय सिंह को अपना बड़ा भाई बताते हुए स्नेहपूर्ण संबोधन किया। इस पर दिग्विजय सिंह ने स्वयं को घोर सनातन धर्म का मानने वाला बताते हुए कहा कि वे पहले भी यह घोषणा कर चुके हैं और अब फिर दोहरा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उनके कहने के बाद ही सनातन शब्द का इस्तेमाल बढ़ा, जिस पर उषा ठाकुर ने तुरंत जवाब देते हुए कहा कि वे अनादि काल से सनातन परंपरा से जुड़ी हैं और हिंदू धर्म की अनुयायी रही हैं।
संवाद के दौरान दिग्विजय सिंह ने प्रतिप्रश्न करते हुए कहा- क्या हम सनातन के दुश्मन हैं? उन्होंने अपनी धार्मिक आस्था का हवाला देते हुए नर्मदा परिक्रमा और व्रत जैसे उदाहरण भी सामने रखे। इस पर उषा ठाकुर ने कहा कि व्यक्तिगत रूप से वे उन्हें पक्का सनातनी मानती हैं, लेकिन सार्वजनिक रूप से वे इसे उतनी स्पष्टता से स्वीकार नहीं करते। इस पर दिग्विजय सिंह ने मुस्कुराते हुए कहा कि वे अब सार्वजनिक रूप से भी इसे स्वीकार कर रहे हैं।
बातचीत के दौरान उषा ठाकुर ने हाईकोर्ट के हालिया फैसले का सम्मान करने की बात कही, जिसे भोजशाला प्रकरण से जोड़कर देखा जा रहा है। इस पर दिग्विजय सिंह ने सवाल किया कि यह कैसे मान लिया गया कि उन्होंने उस फैसले का विरोध किया है। उषा ठाकुर ने जवाब में कहा कि उन्होंने यह बात सुनी है।
दिग्विजय सिंह ने भोजशाला मामले में हाईकोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि निर्णय का विस्तृत अध्ययन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि देश के नियमों और स्थापित परंपराओं के अनुरूप ही आगे कदम उठाए जाने चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जामा मस्जिद, बनारस सहित अन्य कई मामले पहले से ही सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन हैं। ऐसे में भोजशाला जैसे एएसआई संरक्षित स्थल पर पूजा-अनुष्ठान से जुड़े अंतिम निर्णय का अधिकार भी सर्वोच्च न्यायालय के पास ही होगा।
दिग्विजय सिंह ने कहा कि एएसआई की रिपोर्ट में कई दावों का स्पष्ट उल्लेख नहीं है, इसलिए पूरे फैसले की गहराई से जांच आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि देश में सामाजिक चेतना और सौहार्द के संवेदनशील माहौल के बीच किसी एक समुदाय को निशाना बनाना उचित नहीं है। सभी निर्णय कानून और संविधान की मर्यादा में रहकर ही होने चाहिए, और अंततः इस मामले में अंतिम निर्णय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा ही लिया जाएगा।
यह संवाद केवल दो नेताओं के बीच बहस भर नहीं था, बल्कि लोकतांत्रिक परंपरा का एक उदाहरण भी बना, जहां तीखे वैचारिक मतभेदों के बावजूद संवाद की गरिमा और व्यक्तिगत सम्मान कायम रहा। आज के राजनीतिक माहौल में, जहां संवाद अक्सर टकराव में बदल जाता है, वहां यह मुलाकात इस बात का संकेत देती है कि असहमति के बीच भी संवाद संभव है और यही लोकतंत्र की असली ताकत है। कांग्रेसी नेता अशोक धवन और मनोहर धवन के बड़े भाई सूरज प्रकाश धवन के निधन पर पूर्व मुख्यमंत्री एवं सांसद दिग्विजय सिंह जी और पूर्व कैबिनेट मंत्री सज्जन सिंह वर्मा जी ने उनके निवास पर पहुंचकर शोक संवेदना व्यक्त की।
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