देखिए वीडियो: शिक्षक भर्ती में पदवृद्धि के लिए आमरण अनशन; 42 घंटे से पानी तक नहीं पीया, सरकारी स्कूलों को बंद करने के विरोध में छात्र-शिक्षक-अभिभावकों का कन्वेंशन
KHULASA FIRST
संवाददाता
खुलासा फर्स्ट, भोपाल।
राजधानी के नीलम पार्क में रविवार को शिक्षा व्यवस्था से जुड़े दो अलग-अलग आंदोलनों ने सरकार की मुश्किलें बढ़ा दीं। एक ओर माध्यमिक और प्राथमिक शिक्षक भर्ती-2025 में पदवृद्धि की मांग को लेकर प्रदेशभर से आए अभ्यर्थी 21 अगस्त से अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं।
वहीं दूसरी ओर स्कूल बचाओ संघर्ष समिति मध्यप्रदेश ने सरकारी स्कूलों को बंद या मर्ज करने के विरोध में राज्य स्तरीय कन्वेंशन आयोजित किया।
एक ही पार्क में चल रहे दोनों आंदोलनों का मुद्दा अलग है, लेकिन सवाल सरकारी शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा है। शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थी रिक्त पदों के बावजूद कम पद जारी किए जाने का आरोप लगाते हुए पद बढ़ाने और दूसरी काउंसलिंग की मांग कर रहे हैं।
वहीं स्कूल बचाओ संघर्ष समिति सरकारी स्कूल बंद करने के बजाय उनमें पर्याप्त शिक्षक, बेहतर भवन और मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग उठा रही है।
42 घंटे से पानी तक नहीं पीया, आमरण अनशन पर नरेंद्र
शिक्षक भर्ती में पदवृद्धि की मांग को लेकर ब्यावरा निवासी नरेंद्र राजपूत आमरण अनशन पर बैठे हैं। नरेंद्र के मुताबिक, उन्होंने 21 अगस्त रात 12 बजे से खाना तो दूर, पानी तक नहीं पिया है। रविवार को अनशन को करीब 42 घंटे हो चुके थे।
नरेंद्र का कहना है कि वे सिर्फ अपने लिए नहीं, बल्कि उन सभी अभ्यर्थियों के लिए आंदोलन कर रहे हैं, जो वर्षों से शिक्षक बनने की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आंदोलन को उग्र करने के बजाय शांतिपूर्ण तरीके से सरकार तक अपनी बात पहुंचाना चाहते हैं और मांग पूरी होने तक पीछे हटने का उनका इरादा नहीं है।
धरना स्थल पर मौजूद तहसीलदार प्रीति चौरसिया ने बताया कि अभ्यर्थी अनशन पर बैठे हैं और उनकी मांगों को शासन स्तर तक भेजा जाएगा। उनके मुताबिक, फिलहाल अनशन पर बैठे अभ्यर्थी की स्थिति ठीक है।
बच्चों के साथ धरने पर बैठीं महिला अभ्यर्थी
आंदोलन में महिला अभ्यर्थी भी अपने छोटे बच्चों के साथ पहुंची हैं। इंदौर की दीप्ति सिंह ठाकुर अपनी 5 और 8 साल की दो बेटियों के साथ नीलम पार्क में रह रही हैं। उनका कहना है कि पदवृद्धि की मांग को लेकर यह उनका 13वां आंदोलन है।
दीप्ति के मुताबिक, बच्चों के साथ पार्क में रात गुजारने के दौरान मच्छर, पानी और वॉशरूम जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इसके बावजूद वह पदवृद्धि की मांग पूरी होने तक धरना छोड़ने को तैयार नहीं हैं।
इसी तरह सरोज कुशवाहा अपने छोटे बेटे माधव को लेकर धरने में पहुंची हैं। उनका बड़ा बच्चा रिश्तेदार के यहां है। सरोज का कहना है कि छोटे बच्चे के साथ भीड़, तेज आवाज, मच्छरों और आसपास मौजूद जलस्रोत के कारण सुरक्षा को लेकर चिंता रहती है।
इसके बावजूद वर्षों की तैयारी और अच्छे अंक हासिल करने के बाद भी नियुक्ति नहीं मिलने के कारण वे आंदोलन में डटी हुई हैं।
वर्ग-2 में हर विषय में 3 हजार और वर्ग-3 में 25 हजार पद बढ़ाने की मांग
शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों की प्रमुख मांग है कि वर्ग-2 में प्रत्येक विषय में 3 हजार पद बढ़ाए जाएं, जबकि वर्ग-3 में कुल 25 हजार पद किए जाएं। इसके साथ ही बढ़ाए गए पदों पर दूसरी काउंसलिंग कराने की मांग भी की जा रही है।
अभ्यर्थियों का कहना है कि विभिन्न विभागों में पद रिक्त होने के बावजूद भर्ती में पर्याप्त पद नहीं निकाले गए। उनका दावा है कि पात्रता और चयन परीक्षा में अच्छे अंक हासिल करने वाले कई अभ्यर्थी पदों की कमी के कारण नियुक्ति से वंचित रह गए हैं।
स्कूल बचाओ कन्वेंशन में छात्रों-शिक्षकों ने उठाई आवाज
इसी नीलम पार्क में स्कूल बचाओ संघर्ष समिति मध्यप्रदेश की ओर से राज्य स्तरीय कन्वेंशन आयोजित किया गया। इसमें प्रदेश के अलग-अलग जिलों से छात्र-छात्राएं, शिक्षक और अभिभावक शामिल हुए।
समिति ने सरकारी स्कूलों को बंद या मर्ज करने की नीति पर रोक लगाने, स्कूलों की आधारभूत संरचना मजबूत करने और पर्याप्त संख्या में शिक्षकों की भर्ती करने की मांग उठाई।
समिति के संयोजक मुदित भटनागर ने दावा किया कि 2016 में मध्यप्रदेश में करीब 1.21 लाख सरकारी स्कूल थे, जो अब घटकर करीब 90 हजार के आसपास रह गए हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार को स्कूलों का स्तर बेहतर करना है तो सभी सरकारी स्कूलों में समान रूप से सुविधाएं उपलब्ध करानी चाहिए।
‘स्कूल बंद नहीं, सुविधाएं और शिक्षक बढ़ाए जाएं’
मुदित भटनागर ने कहा कि कुछ स्कूलों को चुनकर सीएम राइज या अन्य मॉडल स्कूलों में बदलने और बाकी स्कूलों को बंद या कमजोर छोड़ने का विरोध किया जाएगा।
समिति की मांग है कि सरकारी स्कूलों में भवन, प्रयोगशाला, शौचालय, पेयजल समेत सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं और पर्याप्त शिक्षक नियुक्त किए जाएं।
कन्वेंशन में वक्ताओं ने क्लोजर, मर्जर, एक शाला-एक परिसर, सीएम राइज सहित विभिन्न योजनाओं के नाम पर सरकारी स्कूलों को बंद किए जाने का विरोध किया।
साथ ही परीक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं का मुद्दा भी उठाया गया। समिति ने सभी परीक्षाओं को निष्पक्ष, पारदर्शी और व्यवस्थित तरीके से कराने की मांग की।
एक ही पार्क में शिक्षा व्यवस्था के दो मोर्चे
रविवार को नीलम पार्क शिक्षा से जुड़े दो अलग-अलग संघर्षों का केंद्र बना रहा। एक तरफ शिक्षक बनने की उम्मीद लेकर अभ्यर्थी पदवृद्धि की मांग पर धरने और आमरण अनशन पर बैठे हैं, तो दूसरी तरफ छात्र, शिक्षक और अभिभावक सरकारी स्कूलों को बंद करने के बजाय उन्हें मजबूत करने की मांग उठा रहे हैं।
शिक्षक भर्ती अभ्यर्थियों का अनिश्चितकालीन धरना जारी है। वहीं स्कूल बचाओ संघर्ष समिति ने भी मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी दी है। दोनों आंदोलनों की नजर सरकार के अगले कदम पर है।
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