टैंकरों पर वार्ड नंबर अनिवार्य लापरवाही पर नपेंगे जिम्मेदार: नगर निगम ने जल वितरण व्यवस्था में की सख्ती; बिना स्टीकर और सूचना वाले टैंकरों के संचालन पर लगाई रोक
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
शहर की जल प्रदाय व्यवस्था सुधारने के लिए नगर निगम प्रशासन ने मुस्तैदी बढ़ाई है। जलकार्य प्रभारी अभिषेक शर्मा द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में किए गए औचक निरीक्षण के दौरान टैंकरों के संचालन में कई गंभीर कमियां और अनियमितताएं पाई गई थीं, जिसे देखते हुए अब पूरी वितरण प्रणाली को दुरुस्त करने के निर्देश जारी किए गए हैं।
मैदानी हकीकत यह सामने आई कि शहर के कई वार्डों में दौड़ रहे निगम के टैंकरों पर न तो वार्ड क्रमांक दर्ज था और न ही उन पर निःशुल्क जल सेवा की जानकारी लिखी थी। इस स्पष्ट पहचान के अभाव में कई टैंकर निर्धारित क्षेत्रों के बजाय दूसरे इलाकों में पानी बांट रहे थे, जिससे आम जनता को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा था।
इस मामले में संज्ञान लेते हुए निगम प्रशासन ने अब स्पष्ट कर दिया है कि बिना वार्ड नंबर और बिना आवश्यक स्टीकर वाले टैंकरों को किसी भी सूरत में सेवा में नहीं लिया जाएगा। नई व्यवस्था के तहत सभी जोन के अधिकारियों और स्वास्थ्य निरीक्षकों को पाबंद किया गया है कि वे अपने-अपने क्षेत्र में संचालित हो रहे हर एक टैंकर की जांच करें और उन पर अनिवार्य रूप से संबंधित वार्ड की जानकारी और हेल्पलाइन नंबर अंकित करवाएं।
यदि इसके बाद भी किसी टैंकर पर जानकारी अधूरी पाई जाती है तो न केवल संबंधित ठेकेदार का भुगतान रोका जाएगा, बल्कि इलाके के जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भी अनुशासनात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
महापौर ने की समीक्षा
जल संकट की गंभीरता को देखते हुए महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने भी बीजलपुर स्थित नर्मदा प्रोजेक्ट के कंट्रोल रूम पहुंचकर शहर में हो रही जल आपूर्ति की बारीकी से समीक्षा की। महापौर ने स्पष्ट लहजे में अधिकारियों को निर्देशित किया कि भीषण गर्मी के इस दौर में शहर के किसी भी नागरिक को पानी के लिए परेशान नहीं होना चाहिए।
उन्होंने कंट्रोल रूम से ही निर्देश दिए कि टैंकरों के फेरों और उनके निर्धारित रूट की सघन मॉनिटरिंग की जाए ताकि जल वितरण में होने वाली मनमानी को पूरी तरह खत्म किया जा सके।
जल गुणवत्ता परीक्षण की प्रक्रिया तेज
निगम प्रशासन ने उन क्षेत्रों की सूची भी तैयार की है जहां पाइपलाइन का दबाव कम होने के कारण पानी की समस्या बनी हुई है। इन प्रभावित इलाकों में अतिरिक्त टैंकरों के माध्यम से तुरंत पानी पहुंचाने के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं, साथ ही, हाइड्रेंट निर्माण, कुओं की सफाई और जल गुणवत्ता परीक्षण की प्रक्रिया को भी तेज कर दिया गया है।
निगम का साफ संदेश है कि जल वितरण व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी और जवाबदेह होनी चाहिए। जो भी अफसर या कर्मचारी फील्ड में मुस्तैद नहीं पाया जाएगा या जनता की शिकायतों की अनदेखी करेगा, उसे बख्शा नहीं जाएगा। अब हर टैंकर की लोकेशन और उसके द्वारा बांटे गए पानी का हिसाब मुख्यालय को अनिवार्य रूप से देना होगा।
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