हिंसा: प्रदर्शनकारियों पर फायरिंग में इतने की मौत; चुनाव बहिष्कार के बीच बढ़ा तनाव
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, मुजफ्फराबाद।
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में विधानसभा चुनाव के पहले चरण से पहले हिंसा और राजनीतिक तनाव चरम पर पहुंच गया है। जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) ने दावा किया है कि रावलाकोट में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की फायरिंग में 19 प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई,0 जबकि कई अन्य घायल हुए हैं।
हालांकि, पाकिस्तान सरकार की ओर से इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। दूसरी ओर, पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) ने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) के समर्थकों की गोलीबारी में उसके एक कार्यकर्ता की मौत हो गई और दो अन्य घायल हुए। वहीं, PML-N और PPP ने एक-दूसरे पर चुनाव में धांधली के आरोप लगाए हैं।
चुनाव बहिष्कार के बीच भड़का विरोध
PoK में जारी विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) कर रही है। संगठन ने चुनावों के बहिष्कार का आह्वान किया था और सरकार के खिलाफ लगातार प्रदर्शन कर रहा है।
सरकार ने 5 जून को प्रस्तावित बड़े प्रदर्शन से पहले JAAC पर प्रतिबंध लगा दिया। इसके बाद संगठन के कई नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया, जबकि कुछ नेता भूमिगत हो गए। रावलाकोट समेत कई इलाकों में आंदोलन अब भी जारी है।
कई सप्ताह से तनावपूर्ण हालात
प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच लगातार झड़पों के कारण हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। कई इलाकों में लंबे समय तक धरने और सड़क जाम रहे। बैंक दो सप्ताह तक बंद रहे, जबकि कई क्षेत्रों में मोबाइल और इंटरनेट सेवाएं अब भी बाधित हैं।
भारत की सीमा से सटे पुंछ डिवीजन में सबसे ज्यादा विरोध प्रदर्शन हुए हैं। सुरक्षा कारणों से यह इलाका कई सप्ताह तक लगभग पूरी तरह सील रहा, जिससे आटा और अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति भी प्रभावित हुई।
12 शरणार्थी सीटें बनीं विवाद की वजह
PoK विधानसभा में कुल 45 निर्वाचित सीटें हैं, जिनमें 12 सीटें भारतीय प्रशासित जम्मू-कश्मीर से पाकिस्तान गए शरणार्थियों के लिए आरक्षित हैं। इन्हीं सीटों को लेकर सबसे बड़ा विवाद है।
JAAC का कहना है कि पाकिस्तान के अन्य हिस्सों में रहने वाले लोगों को PoK की सरकार चुनने का अधिकार नहीं होना चाहिए। संगठन का आरोप है कि इन 12 सीटों के कारण स्थानीय मतदाताओं की राय कमजोर पड़ जाती है।
अक्सर केंद्र की सत्ता में रहने वाली पार्टियों को फायदा मिलता है। वहीं, पाकिस्तान सरकार और अदालत का कहना है कि ये सीटें संविधान का हिस्सा हैं और इन्हें हटाने के लिए संवैधानिक संशोधन आवश्यक होगा।
तीन चरणों में हो रहे हैं चुनाव
45 सदस्यीय विधानसभा के चुनाव मूल रूप से 27 जुलाई को होने थे, लेकिन सुरक्षा और तनावपूर्ण हालात को देखते हुए चुनाव आयोग ने मतदान को तीन चरणों में कराने का फैसला किया।
मतदान कार्यक्रम
27 जुलाई: मीरपुर डिवीजन
2 अगस्त: मुजफ्फराबाद डिवीजन और शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 सीटें
10 अगस्त: पुंछ डिवीजन
इन सीटों का इतिहास
शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 सीटों की व्यवस्था वर्षों पुरानी है।
1960: पहली चुनावी व्यवस्था में शुरुआत
1964: कानून के जरिए व्यवस्था को मजबूत किया गया
1970: नई चुनावी व्यवस्था में भी बरकरार रखा गया
1974: अंतरिम संविधान में संवैधानिक दर्जा मिला
2018: 13वें संवैधानिक संशोधन के जरिए फिर पुष्टि की गई
नवाज शरीफ और बिलावल ने झोंकी पूरी ताकत
PoK चुनाव को लेकर पाकिस्तान की प्रमुख पार्टियों ने पूरी ताकत लगा दी है। PML-N की ओर से पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ और पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज ने कई चुनावी रैलियां कीं।
नवाज शरीफ ने क्षेत्र में सड़क, मेट्रो और विकास परियोजनाओं का वादा करते हुए कहा कि PoK उनके लिए "दूसरा घर" है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि पार्टी सत्ता में आई तो वह प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से उन्हें PoK का प्रधानमंत्री बनाने का अनुरोध करेंगे, ताकि वे सीधे विकास कार्यों की निगरानी कर सकें।
वहीं PPP प्रमुख बिलावल भुट्टो जरदारी भी लगातार चुनाव प्रचार में जुटे हैं। गिलगित-बाल्टिस्तान में बेहतर प्रदर्शन के बाद पार्टी को PoK में भी अच्छे नतीजों की उम्मीद है।
2021 में PTI ने बनाई थी सरकार
PoK में पिछला विधानसभा चुनाव 2021 में हुआ था, जिसमें इमरान खान की पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) ने 45 में से 25 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी। हालांकि, अगले कुछ वर्षों में वहां राजनीतिक अस्थिरता बनी रही।
पहले सरदार अब्दुल कय्यूम नियाजी, फिर सरदार तनवीर इलियास और उसके बाद चौधरी अनवरुल हक प्रधानमंत्री बने। नवंबर 2025 में अविश्वास प्रस्ताव के बाद उनकी सरकार गिर गई, जिसके बाद PPP के फैसल मुमताज राठौर ने प्रधानमंत्री पद संभाला।
फिलहाल क्या स्थिति है?
PoK में चुनावी प्रक्रिया के साथ-साथ राजनीतिक तनाव भी लगातार बढ़ रहा है। फायरिंग में 19 लोगों की मौत का दावा और चुनावी धांधली के आरोपों ने हालात को और संवेदनशील बना दिया है।
हालांकि, 19 लोगों की मौत के दावे की स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है, जबकि चुनावी हिंसा और विरोध प्रदर्शनों को लेकर जांच और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं।
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