लोकायुक्त ट्रैप के बाद विभागों का अलग-अलग रवैया: बिजली कंपनी ने रिश्वतखोर जेई को हटाया; पीएचई ने जांच अधूरी होने पर इंजीनियर को दे दिया प्रमोशन
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
लोकायुक्त की रिश्वतखोरी के मामलों में कार्रवाई के बाद सरकारी विभागों के अलग-अलग रवैये ने सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर पश्चिम क्षेत्र बिजली वितरण कंपनी ने 40 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगेहाथ पकड़े गए कनिष्ठ यंत्री (JE) को हटाकर झाबुआ अटैच कर दिया।
वहीं दूसरी ओर लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) विभाग ने रिश्वत के मामले में ट्रैप हो चुकी सहायक यंत्री को विभागीय जांच पूरी होने से पहले ही कार्यपालन यंत्री (Executive Engineer) के पद पर पदोन्नत कर दिया। दोनों मामलों ने भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे अधिकारियों के खिलाफ विभागों द्वारा अपनाए जा रहे अलग-अलग मानकों पर बहस छेड़ दी है।
40 हजार की रिश्वत लेते पकड़े गए JE पर तत्काल कार्रवाई
18 जुलाई को लोकायुक्त पुलिस इंदौर ने पश्चिम क्षेत्र बिजली वितरण कंपनी के उत्तर शहर संभाग के सुखलिया जोन में पदस्थ कनिष्ठ यंत्री (JE) नमेश कुमार भोंडेकर को 40 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार किया था।
बिल्डर एवं होटल व्यवसायी शिवकुमार बसवाल ने शिकायत की थी कि अंबे नगर स्थित उनके होटल में सोलर पैनल लगाने की फाइल आगे बढ़ाने के बदले JE ने 80 हजार रुपए की रिश्वत मांगी थी। शिकायत के सत्यापन के बाद लोकायुक्त ने ट्रैप कार्रवाई की।
कार्रवाई के बाद लोकायुक्त एसपी डॉ. राजेश सहाय ने बिजली कंपनी प्रबंधन को आरोपी अधिकारी को पद से हटाने की अनुशंसा की। इसके बाद कंपनी ने तत्काल कार्रवाई करते हुए भोंडेकर को इंदौर से हटाकर झाबुआ अटैच कर दिया।
नगर निगम ने भी रिश्वत मामले में दिखाई सख्ती
इसी तरह इंदौर नगर निगम ने मुख्यमंत्री जनकल्याण (संबल) योजना में रिश्वत लेने के मामले में लोकायुक्त कार्रवाई के बाद दो मस्टर कर्मियों पर कड़ा रुख अपनाया।
नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल ने जोन क्रमांक-13 की संध्या पथरोड और हरभजन सिंह सलूजा को तत्काल प्रभाव से कार्य एवं हाजिरी से मुक्त कर दिया। दोनों के पारिश्रमिक और अन्य भुगतान पर भी रोक लगा दी गई है।
लोकायुक्त ने संध्या पथरोड को रिश्वत लेते रंगेहाथ पकड़ा था, जबकि जांच में हरभजन सिंह सलूजा की भूमिका सामने आने के बाद उनके खिलाफ भी कार्रवाई की गई। निगम आयुक्त ने स्पष्ट कहा कि भ्रष्टाचार किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
उधर... ट्रैप इंजीनियर को मिल गया प्रमोशन
दूसरी ओर लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) विभाग का मामला चर्चा में है। जुलाई 2024 में उज्जैन में पदस्थ सहायक यंत्री निधि मिश्रा को जल जीवन मिशन के तहत एक ठेकेदार के करीब 80 लाख रुपए के बिल का भुगतान करने के बदले 60 हजार रुपए की रिश्वत लेते लोकायुक्त पुलिस ने रंगेहाथ गिरफ्तार किया था।
शिकायत के अनुसार, भुगतान रोककर रिश्वत की मांग की गई थी, जिसके बाद लोकायुक्त ने ट्रैप कार्रवाई की। बताया जा रहा है कि इस मामले में अब तक न्यायालय में चालान पेश नहीं हुआ है और विभागीय प्रक्रिया भी पूरी नहीं हुई है।
जांच अधूरी, फिर भी DPC में मिली पदोन्नति
हाल ही में हुई विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) की बैठक में निधि मिश्रा को सहायक यंत्री से कार्यपालन यंत्री पद पर पदोन्नत कर दिया गया। वर्तमान में उनकी पदस्थापना पीएचई मुख्य अभियंता कार्यालय, रेसकोर्स रोड, इंदौर में है।
इस फैसले ने विभाग के भीतर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि जहां विभागीय जांच या विवादों में घिरे कई अधिकारियों के नाम पदोन्नति सूची से बाहर रखे गए, वहीं लोकायुक्त ट्रैप में गिरफ्तार अधिकारी को जांच पूरी होने से पहले पदोन्नति देना दोहरे मानदंड अपनाने का संकेत देता है।
अलग-अलग फैसलों पर उठ रहे सवाल
एक ही तरह के भ्रष्टाचार के मामलों में अलग-अलग विभागों की कार्रवाई ने सरकारी व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जहां बिजली कंपनी और नगर निगम ने लोकायुक्त कार्रवाई के बाद तत्काल प्रशासनिक कदम उठाए।
वहीं, पीएचई विभाग में जांच लंबित होने के बावजूद पदोन्नति दिए जाने से पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। अब देखना होगा कि इस मामले में शासन या संबंधित विभाग आगे क्या रुख अपनाते हैं।
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