किस फल से जुड़ी अप्रिय खबरों ने बिगाड़ी बाजार की शक्ल: अचानक क्यों लाेगों ने कम कर दी खरीदारी; किन लोगों को हो रहा इससे नुकसान
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, भोपाल।
भीषण गर्मी के बीच राहत देने वाला तरबूज इस बार डर और अफवाहों का शिकार हो गया है। महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश में तरबूज खाने के बाद हुई मौतों की खबरें सामने आने के बाद लोगों ने इसकी खरीदारी कम कर दी है। इसका असर सीधे बाजार पर दिखाई दे रहा है। प्रदेश के कई शहरों में तरबूज की बिक्री अचानक गिर गई है, जिससे किसानों, व्यापारियों और छोटे फल विक्रेताओं को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
तरबूज के दाम 20 से 30 प्रतिशत तक टूट गए
भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर और जबलपुर सहित कई शहरों में तरबूज के दाम 20 से 30 प्रतिशत तक टूट गए हैं। सीजन की शुरुआत में जो तरबूज 18 से 20 रुपए किलो तक बिक रहा था, वह अब 12 से 13 रुपए किलो तक पहुंच गया है। वहीं थोक मंडियों में कीमतें 7 से 8 रुपए किलो तक गिर चुकी हैं।
मुंबई की घटना के बाद फैला डर
तरबूज को लेकर लोगों के बीच डर की शुरुआत मुंबई के पायधुनी इलाके में हुई घटना के बाद हुई। 25-26 अप्रैल की रात एक ही परिवार के चार लोगों की मौत हो गई थी। बताया गया कि परिवार ने पहले बिरयानी खाई थी और बाद में तरबूज खाया था। कुछ घंटों बाद सभी की तबीयत बिगड़ गई।
‘जिंक फास्फाइड’ नामक खतरनाक रसायन
फोरेंसिक साइंस लैबोरेटरी की रिपोर्ट में तरबूज में ‘जिंक फास्फाइड’ नामक खतरनाक रसायन मिलने की बात सामने आई। यह केमिकल सामान्य तौर पर चूहे मारने की दवा में इस्तेमाल किया जाता है। इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर तरह-तरह की खबरें और वीडियो वायरल होने लगे, जिससे लोगों के बीच डर बढ़ गया।
श्योपुर में भी सामने आया मामला
इसके बाद मध्यप्रदेश के श्योपुर जिले में भी ऐसा ही मामला सामने आया। 15 मई को ट्रांसपोर्ट व्यवसायी इंद्र सिंह परिहार और उनके बेटे विनोद ने रात में भोजन के बाद तरबूज खाया था। कुछ समय बाद दोनों की तबीयत बिगड़ गई। अस्पताल में इंद्र सिंह को मृत घोषित कर दिया गया, जबकि बेटे की नौ दिन बाद मौत हो गई। स्वास्थ्य विभाग ने मामले में तरबूज के सैंपल जांच के लिए भेजे हैं। फिलहाल रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
खरीदारों में डर, बाजार में सन्नाटा
भोपाल में पढ़ाई कर रहे छात्र अरमान अली बताते हैं कि लगातार खबरें देखने के बाद उन्होंने तरबूज खरीदना लगभग बंद कर दिया है। यदि खरीदते भी हैं तो पहले अच्छी तरह जांच करते हैं। ऐसे कई ग्राहक बाजारों में दिखाई दे रहे हैं जो अब तरबूज की जगह दूसरे फल खरीद रहे हैं।
15-20 दिनों में बिक्री पर बड़ा असर
करोंद फल मंडी के व्यापारी मोहम्मद सैफुद्दीन के मुताबिक पिछले 15-20 दिनों में बिक्री पर बड़ा असर पड़ा है। उन्होंने बताया कि पहले तरबूज से भरी गाड़ियां सुबह तक खाली हो जाती थीं, लेकिन अब दोपहर तक भी माल नहीं बिक रहा। मजबूरी में दाम घटाने पड़ रहे हैं।
वायरल खबरों ने पूरे बाजार को प्रभावित
इंदौर के फार्मिंग इन्फ्लूएंसर नीलेश पाटीदार का कहना है कि सोशल मीडिया पर वायरल खबरों ने पूरे बाजार को प्रभावित किया है। सामान्य स्थिति में अच्छी क्वालिटी का तरबूज 17-18 रुपए किलो तक बिकता, लेकिन अब 10-12 रुपए से ऊपर नहीं जा पा रहा।
सबसे ज्यादा असर छोटे विक्रेताओं पर
फुटपाथ और ठेले पर फल बेचने वाले छोटे व्यापारियों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। भोपाल के अशोका गार्डन इलाके में फल बेचने वाले राजू कहते हैं कि गर्मी के मौसम में तरबूज उनकी कमाई का सबसे बड़ा सहारा होता है, लेकिन इस बार बिक्री आधी रह गई है। उन्होंने बताया कि ग्राहक अब खरीदने से पहले कई सवाल पूछते हैं। कुछ लोग यह भी पूछते हैं कि कहीं फल में कोई केमिकल तो नहीं मिलाया गया।
किसानों की बढ़ी चिंता
खंडवा जिले के किसान अजय सिंह गुर्जर ने बताया कि इस बार मौसम अच्छा होने से उत्पादन बेहतर हुआ था और किसानों को अच्छी कमाई की उम्मीद थी। लेकिन अचानक मांग घटने से हालत बिगड़ गए। कई व्यापारियों ने खेतों से माल उठाना ही बंद कर दिया।
उन्होंने कहा कि कई जगह तरबूज के दाम 5-6 रुपए किलो तक पहुंच गए हैं, जिससे लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है। कई किसानों की फसल खेतों में ही खराब हो रही है।
फूड सेफ्टी विभाग अलर्ट मोड पर
मामलों के सामने आने के बाद फूड सेफ्टी विभाग भी अलर्ट हो गया है। भोपाल, जबलपुर समेत कई शहरों में जांच अभियान चलाया जा रहा है। दुकानों और गोदामों से तरबूज और अन्य फलों के सैंपल लिए जा रहे हैं।
भोपाल के फूड सेफ्टी अधिकारी पंकज श्रीवास्तव के अनुसार कुछ जगहों से संदिग्ध केमिकल भी जब्त किए गए हैं, जिनका उपयोग फलों को कृत्रिम रूप से पकाने में किया जा रहा था।
घर पर ऐसे करें पहचान
भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) के अनुसार लोग घर पर भी तरबूज की प्राथमिक जांच कर सकते हैं। कॉटन टेस्ट में तरबूज के लाल हिस्से पर सफेद कॉटन या टिशू रगड़ें। यदि रंग गहरा लाल या गुलाबी हो जाए तो कृत्रिम रंग होने की आशंका हो सकती है।
वॉटर टेस्ट में तरबूज का छोटा टुकड़ा पानी में डालें। यदि पानी तुरंत लाल या गुलाबी होने लगे तो यह मिलावट का संकेत माना जा सकता है। विशेषज्ञ लोगों को भरोसेमंद दुकानदार से ही फल खरीदने और किसी भी तरह की अफवाह से बचने की सलाह दे रहे हैं।
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