बेरोजगारी, कर्ज और बगावत ने रची खौफनाक कहानी: अपहरण से आजादी और ऐशो-आराम का सपना जीना चाहते थे आरोपी भाई-बहन
KHULASA FIRST
संवाददाता

चैटिंग और कॉल रिकॉर्डिंग ने खोले राज
अपहरण से लेकर रात 11 बजे तक घटनास्थल पर मौजूद था विनीत, बोला-
पुलिस और मीडिया वालों को किसने बुलाया, बच्चा सुरक्षित चाहिए कि नहीं
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
भाई-बहन की जोड़ी ने मिलकर न सिर्फ मासूम बच्चों का अपहरण किया, बल्कि फिरौती के पैसों से नई जिंदगी बसाने का सपना भी देख डाला। पुलिस जांच में सामने आई चैटिंग, कॉल रिकॉर्डिंग और घटनाक्रम ने इस पूरे मामले को और भी सनसनीखेज बना दिया है। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी विनीत बच्चों के अपहरण से लेकर रात 11 बजे तक घटनास्थल पर मौजूद था और पल-पल की खबर अपनी बहन को देने के साथ बच्चों के परिजन को वाट्सअप चैटिंग के माध्यम से पुलिस और मीडिया को बच्चे के अपरहण का बताने और बुलाने का कहकर डरा-धमका भी रहा था।
पलासिया थाना क्षेत्र में बीते दिनों हुए दो मासूम बच्चों के अपहरण कांड ने पूरे शहर को हिलाकर रख दिया था। इस केस में जो खुलासा हुआ है, वह सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि लालच, बगावत, बेरोजगारी और बिगड़ती सोच का खतरनाक मिश्रण है।
जानकारी के मुताबिक पूरे घटनाक्रम में सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि आरोपी विनीत वारदात के दौरान रात 11 बजे तक घटनास्थल के आसपास मौजूद था और बहन राधिका को हर पल की जानकारी दे रहा था। अपहरण के वक्त भी वह मौके पर पहुंचा और राधिका को निर्देश देता रहा कि बच्चों को घुमाते हुए ले जाओ और फिर कैब बुक करके निकल जाना। इससे साफ हो गया कि पूरी तरह से प्लानिंग के तहत वारदात की। जब फिरौती मांगने का वक्त आया, तो आरोपियों का असली चेहरा सामने आ गया।
परिजन के माध्यम से पुलिस ने आरोपियों से चैटिंग की। इसमें उन्होंने सीधे कहा-आप बताओ, आपकी औलाद की कीमत क्या है?, जब परिवार ने खुद को गरीब बताया, तो आरोपी भड़क गए और बोले हम भी गरीब हैं, इसलिए ये किया, पैसे नहीं दोगे तो बच्चों को ड्रग्स केस में फंसा देंगे।
इतना ही नहीं, उन्होंने बच्चों के वीडियो भेजकर डराने की कोशिश की और यहां तक कह दिया कि इंजेक्शन लगा दिए हैं। इस दौरान उसने चैटिंग के माध्यम से परिजन को धमकाया कि तुमने इतने पुलिसवालों को क्यों बुला लिया और इतने मीडिया वाले भी आ गए, क्या तुम्हें बच्चे सही-सलामत नहीं चाहिए।
इसके बाद पुलिस धीरे-धीरे मौके से निकली, जिससे अपरहणकर्ता को लगे कि पुलिस वहां निकल गई है। जिसके बाद पुलिस तकनीकी सहायता से आरोपियों तक पहुंची और गिरफ्तार किया। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि आरोपियों को अपने किए पर पछतावा नहीं है। पुलिस के मुताबिक चारों आरोपी सामान्य व्यवहार कर रहे हैं, जैसे कुछ हुआ ही न हो।
विनीत था फेलियर, बेरोजगार, फिर भी महंगी शराब और बार, रिसॉर्ट का था शौकीन
आरोपी विनीत की जिंदगी खुद एक असफलताओं की कहानी रही है। 12वीं में तीन बार फेल होने के बाद उसका पढ़ाई से नाता टूट गया। घर में आए दिन झगड़े होते थे और आखिरकार पिता ने उसे घर से निकाल दिया। इसके बाद वह किराए के फ्लैट में रहने लगा और एक फर्जी एडवाइजरी में काम करने लगा, लेकिन वहां से भी नौकरी चली गई।
पिछले छह महीनों से बेरोजगार रहने के कारण उस पर कर्ज बढ़ता गया, लेकिन उसकी अय्याशी नहीं रुकी। उसे गर्लफ्रेंड, दोस्तों के साथ महंगे रिसॉर्ट, कैफे बार जाने और महंगी शराब का शौक था। खास बात यह है कि विनीत के फ्लैट का महीनों का किराया बकाया है, लोगों की उधारी है और तो और गर्लफ्रेंड से डेढ़ लाख रुपए उधार ले चुका है। जब कर्ज का भार बढ़ा तो इन सबने उसे मानसिक दबाव में ला दिया। लेकिन इस दबाव से निकलने के लिए उसने बहन के साथ बच्चों के अपहरण का रास्ता चुना।
राधिका को आजादी चाहिए थी, रास्ता गलत चुना
इस पूरे केस में बहन राधिका की भूमिका भी उतनी ही अहम रही। वह अपने माता-पिता की सख्ती से परेशान थी और आजाद जिंदगी जीना चाहती थी। बीए सेकंड ईयर की छात्रा रह चुकी राधिका फ्लिपकार्ट में नौकरी करती थी। वहां से नौकरी छूटने के बाद सात हजार रुपए महीने पर कपड़े की दुकान में काम करने लगी।
राधिका ने पुलिस पूछताछ में कबूल किया कि वह घर छोड़कर भाई की तरह अलग रहना चाहती थी और फिरौती के पैसों से अपनी जिंदगी अपने तरीके से जीना चाहती थी यानी यह अपराध सिर्फ पैसों के लिए नहीं, बल्कि अपनी शर्तों पर जिंदगी जीने की गलत सोच से भी जुड़ा हुआ था।
दोस्ती के कारण फ्लैट बना अपहरण का अड्डा
इस साजिश में ललित और उसकी पत्नी तनीषा को भी शामिल किया गया। राधिका ने उन्हें साफ कहा था तुम्हारा काम सिर्फ इतना है कि बच्चों को एक दिन के लिए अपने फ्लैट में रखना है, बाकी सब हम संभालेंगे। ललित बच्चों को स्कूल छोड़ने का काम करता था और तनीषा हाउसवाइफ थी। दोनों को उम्मीद थी कि फिरौती में से 3-4 लाख रुपए मिलेंगे, जिससे वे अपनी जिंदगी सुधार सकेंगे।
सात पुलिसकर्मियों पर इनाम की बारिश
इधर, अपहरणकांड में त्वरित कार्रवाई कर उन्हें सुरक्षित छुड़ाने वाली पुलिस टीम को सम्मानित किया गया है। पलासिया थाना में मामला दर्ज होते ही पुलिस ने तकनीकी साक्ष्य, सीसीटीवी फुटेज और मुखबिर तंत्र के आधार पर जांच तेज की। कुछ ही घंटों में पुलिस ने दो महिला और दो पुरुष आरोपियों को गिरफ्तार कर दोनों बच्चों को सकुशल बरामद कर लिया।
इस संवेदनशील मामले में उत्कृष्ट कार्य करने पर पुलिस मुख्यालय भोपाल ने सात पुलिसकर्मियों को नकद पुरस्कार देने की घोषणा की। इसमें प्र.आर. लोकेश गाथे (छोटी ग्वालटोली) और प्र.आर. देवेेंद्र जादौन (तुकोगंज) को 10-10 हजार रुपए का इनाम दिया गया।
वहीं प्र.आर. कालीचरण (संयोगितागंज), आरक्षक पवन प्रजापत (छोटी ग्वालटोली), राहुल जाट (तुकोगंज), संदीप और विजय (दोनों संयोगितागंज) को 6-6 हजार रुपए से पुरस्कृत किया गया। पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा ने टीम की तत्परता और प्रोफेशनल कामकाज की सराहना करते हुए इसे प्रभावी पुलिसिंग का उदाहरण बताया है।
600 कॉल रिकॉर्डिंग और खुलते राज?
पुलिस जांच में आरोपियों के मोबाइल से करीब 600 कॉल रिकॉर्डिंग मिली हैं। इन्होंने पूरे केस की परतें खोल दीं। इसमें भाई-बहन की बातचीत, प्लानिंग और रेकी की चर्चा, पैसों के बंटवारे की बात, भविष्य में और अपराध करने की योजना है। एक रिकॉर्डिंग में तो यह भी सामने आया कि अगर यह काम सफल हो गया, तो वे आगे भी 2-4 ऐसी वारदातें करेंगे। रिकॉर्डिंग्स में यह भी खुलासा हुआ कि आरोपी बच्चों को सिर्फ एक रात फ्लैट में रखने वाले थे और सुबह उन्हें कहीं फेंकने की योजना थी।
पुलिस की सूझबूझ दिखी चैटिंग से लोकेशन तक
पुलिस ने इस पूरे मामले में बेहद सूझबूझ से काम लिया। अपहरणकर्ताओं से बातचीत कर उन्हें उलझाया चैटिंग और कॉल ट्रैकिंग की। सीसीटीवी फुटेज खंगाले उसके बाद रूट ट्रैक करते हुए आरोपियों तक पहुंची। तकनीकी जांच के जरिए पुलिस ने आरोपियों की लोकेशन ट्रेस की और दबिश देकर बच्चों को सुरक्षित छुड़ा लिया। पुलिस ने आरोपियों को घटनास्थल और फ्लैट पर ले जाकर वारदात का रिक्रिएशन कराया। इसमें राधिका ने बताया कि कैसे उसने बच्चों को बहलाया और उन्हें अपने साथ ले गई।
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