बिल गेट्स का मायाजाल समझिए!
KHULASA FIRST
संवाददाता

चंद्रशेखर शर्मा 94250-62800 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
चलिए, पहले आपको कुछ जानकारी से अवगत करा दिया जाए। सो यह कि सन 1800 तक हमारे देश में मीठे के लिये सिर्फ गुड़ खाया जाता था। यानी शकर का न दूर-दूर तक नाम था और न पते। फिर यह हुआ कि ब्रिटिशर्स हमारे देश में शकर लेकर आये। इसके तहत ब्रिटिशर्स 1800 से लेकर 1947 तक यानी डेढ़ सौ बरस में हमारे देश में बेशुमार शुगर मिल्स लेकर आये।
जमा वहां की तकनीक आदि लेकर आए और धीरे-धीरे हमें शकर खिलाना शुरू की। नतीजा यह कि हमें शकर की इतनी लत लगा दी गई कि चाय-कॉफ़ी से लेकर जाने क्या-क्या पीने-खाने में हम शकर कंज्यूम करने लगे। इसके चलते खपत इतनी बढ़ गई कि हम जावा से शकर आयात करने लगे यानी मंगवाने लगे!
बाद में उसी जावा की शकर पर टैरिफ लगा दिया गया! गोया आप कथा को समझ रहे हो न? दरअसल वो हम भारतीयों को हर तरह से निचौड़ और चूस रहे थे और गुलामी और हीनभावना के चलते हम ये मानते थे कि अंग्रेज जो कहे सो पत्थर की लकीर !
चलिए, अब ताजा संदर्भ पर आते हैं। तीन बरस पहले की खबर है कि गुजरात सरकार ने निर्णय किया कि वो 50 हजार सांडों का बधिया करण यानी नसबंदी करेगी। सांड बोले तो वो पशु जो गायों के गर्भाधान के लिए काम में लिया जाता है। तीन बरस बाद अब खबर ये है कि बिल गेट्स महाराष्ट्र में गायों के कृत्रिम गर्भाधान के लिए 200 सेंटर्स खोलने जा रहे हैं।
इसके पहले यह भी विदित हो कि भारत में जर्सी गायों की संख्या और उनके दबदबे से कोई अनजान न। अलबत्ता जर्सी गाय हमारी मां यानी गोमाता न है। एक आंकड़ा ये देखिए कि 1947 में हमारे पास 1 आदमी पर 8 देसी गायें थीं। आज चार आदमी पर 1 देसी गाय है! समझ रहे हो न आप? ऊपर से हमने अपनी इन गायों के गर्भाधान के लिए बिल गेट्स नाम के एक ऐसे बंदे को चुना है जो मानसिक रूप से बीमार है, विकृत है।
जिसे इस उम्र में छोटी-छोटी लड़कियां (एपस्टीन फाइल्स) चाहिए। जिसकी पत्नी उसे इसीलिए छोड़कर चली गई और आज तक गालियां देती हैं। इनको सिर्फ धन की हवस न है और इस सिलसिले में यह भी जान लीजिए कि इन्होंने धंधे के नाम पूरी दुनिया के बीजों पर कब्जा कर लिया है। अकूत दौलत के दम पर पहले ये बीजों को खरीदते हैं, उन पर अपना हक जताते हैं, उनका पेटेंट कराते हैं, फिर उनको जेनेटिकली मोडीफाई करते हैं और जमा जाने क्या-क्या।
आपको पता है वर्ष 2013 में सर्वाइकल कैंसर की बीमारी के वैक्सीन के नाम पर हमारे देश में क्या हुआ था ? ये वही गेट्स थे और आंध्रप्रदेश में जाने कितनी लड़कियां इनके उस वैक्सीन की वजह से मौत के मुंह में चली गयी थीं और न जाने कितनी को पैरालिसिस हो गया था। 14-14, 15-15 साल की लड़कियां, जिनके माता-पिता से परमिशन भी नहीं ली गयी थी और उनके प्रिंसिपल को पैसे देकर सब करा लिया और हो गया।
उसी वैक्सीन को ये पूरे भारत में लाना-लगाना चाहते हैं। अब ताजा में तेरह साल बाद ये फिर उसी आंध्रप्रदेश में घुसे हैं और वहां कह रहे हैं कि आपकी यानी आंध्रप्रदेश के लोगों की जो हेल्थ है, उसे मैं एआई से जोड़ दूंगा! इसके अलावा आपकी जो खेती है, उसे भी एआई से जोड़ दूंगा! ऊपर गुड़ और शकर का किस्सा आपको बताया ही है।
सो इनकी इस नई चाल को देखें तो कह सकते हैं कि एपस्टीन वाला इनका अपराध तो मामूली है। वो इस संदर्भ में कि यदि आंध्रप्रदेश के लोगों की हेल्थ और खेती एआई के जरिये इनको सौंप दी गई तो ये उन लोगों की बेशुमार पुश्तों को अपना गुलाम बना लेंगे! मालूम हो कि डोनाल्ड ट्रम्प की भी पूरी कोशिश थी कि अमेरिका के लिए भारत की डेयरी और कृषि क्षेत्र को खोल दिया जाए, लेकिन मोदी ने उनकी बात नहीं मानी।
अमेरिकन कम्पनी यूनिलीवर और उसके वनस्पति घी ‘डालडा’ का पुराना किस्सा भी सब जानते ही हैं। बहरहाल मालूम हो कि जब कोरोना महामारी आयी थी तो उसमें भी संलिप्तता को लेकर गेट्स का नाम आया था। यह भी मालूम हो कि कोरोना वायरस के उस दौर में एक और वायरस, लंपी वायरस भी सामने आया था और उसकी वजह से बड़ी तादाद में हमारे यहां गायें मारी गईं थीं।
आपको जानकर शायद हैरत हो कि ये बिल गेट्स करीब चार लाख एकड़ खेती की जमीन के मालिक किसान हैं! वहां ये जेनेटिकली मोडिफाइड बीजों का इस्तेमाल करते हैं। इसके अलावा हायब्रिड गायें ये बनाते हैं। उन गायों से ये दूध, मक्खन, दही, चॉकलेट्स और जाने क्या-क्या बनाते हैं।
इनका नया कांड ये है कि इन्होंने अपनी लैब में एक नया बटर यानी नया मक्खन बना लिया है ! ऐसा मक्खन जिसमें गाय का कोई उपयोग ही न। बताते हैं कि हवा से कार्बन डाईऑक्साइड और पानी से हायड्रोजन लेकर एक रासायनिक प्रक्रिया के जरिये लैब में बनाया गया इनका मक्खन 2027 में यानी अगले बरस पूरी दुनिया में उतारा जाना है।
आप सोचिए कि होटल्स, रेस्टोरेंट्स से लेकर तमाम खाद्य पदार्थ बेचने-बनाने वाले संस्थानों और हर घर-घर तक मक्खन की कितनी विशाल मात्रा में खपत होती है और यह कितना विशाल कारोबार है ? वहां सब जगह अपना यह मक्खन पहुंचाने की इनकी योजना है। यह भी देखिए कि ये जनाब हर हफ्ते 3 करोड़ जेनेटिकली मोडिफाइड मच्छर भी बनाते हैं।
ये कहते हैं कि इससे डेंगू रुकेगा ! यही नहीं, बल्कि वो श्रीलंका, इंडोनेशिया और वियतनाम सहित 18 देशों में इन मच्छरों का छिड़काव भी करते हैं। जैसे दवा का छिड़काव करते हैं न, ठीक वैसे। कुल मिलाकर ये बिल गेट्स एक साइकोपैथ हैं !
बोले तो ऐसा मनोरोगी जिसे इस उमर में अपनी हवस की पूर्ति के लिए छोटी-छोटी बच्चियां चाहिए! जमा अपनी अकूत दौलत की हनक में इसको पूरी मानवता पर कब्जा करना है। बोले तो हमारी हेल्थ, हमारी गायें, हमारे बीज, हमारे डेयरी उत्पाद, हमारी फसल गोया सब पर कब्जा करना है।
एक कहावत है कि इस पृथ्वी पर हर मनुष्य की जरूरत पूरी करने के लिए पर्याप्त संसाधन हैं, लेकिन एक मनुष्य के लालच के सामने वो सब भी अपर्याप्त हैं! कह सकते हैं कि ये बिल गेट्स उन्हीं में से एक हैं। आप देखिए कि इन्हीं बिल गेट्स को हमारे यहां गायों के कृत्रिम गर्भाधान के लिए सेंटर्स खोलने का काम दे दिया गया है!
समझ नहीं पड़ता कि मानव कल्याण और मानव हितों के लिए काम करने वाले हमारे तमाम एनजीओज़ कहाँ घुइयां छील रहे हैं ? बता दें कि उपरोक्त तमाम जानकारी प्रयागराज के वरिष्ठ पत्रकार अनुपम मिश्र के यूट्यूब चैनल ‘लोकतंत्र का नृत्य’ से ली गई है।
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