नाना के चक्कर में मामू बनती पुलिस: कार्रवाई नहीं होने से प्रदेश स्तर पर पिट रही भद्
KHULASA FIRST
संवाददाता

रॉनी कौशल बेचता था बेटिंग आईडी, लल्ला चौहान चलाता था बुकी नेटवर्क
गैरेज की आड़ में कमीशन पर चलाता था सट्टे का काला साम्राज्य
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
ब्राउन शुगर से शुरू हुई पुलिस की जांच अब ऑनलाइन क्रिकेट सट्टे के नेटवर्क तक पहुंच गई है, जिसकी कमान गैरेज की आड़ में संजय उर्फ रॉनी कौशल चला रहा था। रॉनी की भूमिका कमीशन पर आईडी बांटने वाले के रूप में थी तो दिनेश उर्फ लल्ला चौहान और मनीष बड़े स्तर पर बुकियों का नेटवर्क संचालित करते थे।
वहीं ड्रग्स का आदी नाना पटवारी भी सट्टेबाजी में हाथ आजमाता था। उसके मोबाइल की कॉल हिस्ट्री ने उसके पत्ते खोलकर रख दिए थे। पुलिस की जांच अब ड्रग्स के साथ ऑनलाइन सट्टे और करोड़ों के वित्तीय लेनदेन तक पहुंच गई है।
हालांकि नाना के खिलाफ जमानेभर के सबूत सामने आने के बाद भी पुलिस की कार्रवाई पर सवाल खड़े हो रहे हैं और प्रदेशभर में इंदौर पुलिस की भद् पिट रही है। कहा जा रहा है कि लसूड़िया थाने के खुशी कुलवाल और विजय नगर थाने के एमडी केस की तरह इस बार भी पुलिस नाना के मामले में मामू बन जाएगी।
राजेंद्र नगर पुलिस ने एमडी ड्रग्स मामले में जब आरोपी संजय उर्फ रॉनी कौशल का जब्त मोबाइल (9826200058) खंगाला तो हिस्ट्री सर्चिंग में ऑनपैनलईएक्ससीएच9.को और ग्रेंडईएक्ससीएच.कॉम जैसे ऑनलाइन बेटिंग प्लेटफार्म बार-बार सर्च किए जाने की बात सामने आई।
इसके बाद कॉल डिटेल, वाट्सएप चैट और डिजिटल रिकॉर्ड ने पुलिस को ऑनलाइन क्रिकेट सट्टे के संगठित नेटवर्क तक पहुंचा दिया। ड्रग्स केस में गिरफ्तार रॉनी कौशल ने पूछताछ में स्वीकारा कि वह कथित तौर पर बेटिंग आईडी उपलब्ध कराता था।
पुलिस के अनुसार उसे प्रत्येक लेनदेन पर 20 से 100 रुपए तक कमीशन मिलता था। पुलिस ने रॉनी कौशल के साथ-साथ क्रिकेट की बेटिंग से जुड़े दिनेश उर्फ लल्ला चौहान, मनीष जादौन, प्रीतेश त्रिपाठी सहित अन्य लोगों को भी आरोपी बनाया है। जांच में जिस दिनेश उर्फ लल्ला चौहान का नाम सामने आया है, उसे पुलिस छोटे स्तर का बुकी नहीं मान रही।
सूत्रों के अनुसार लल्ला चौहान कथित तौर पर बड़े स्तर पर क्रिकेट सट्टे का नेटवर्क संचालित करता था। इतना ही नहीं लल्ला चौहान का ब्याज पर पैसे देने का भी कामकाज है। वह क्रिकेट के सट्टे में रुपए हारने वालों को मोटे ब्याज पर पैसे भी देता था।
वसूली के लिए वह गुंडागर्दी, धमकीबाजी, डराना-धमकाना से बाज नहीं आता है। उसने 50 से लेकर 100 लोगों को आईडी बांट रखी है। ये तो ठीक, लल्ला चौहान अय्याश प्रवृत्ति का भी है।
पबों में जाना और शराब पीना उसका शौक है। गत नवरात्रि के दौरान समाजवाद इंदिरा नगर में आदिवासी परिवार पर लल्ला ने हमला किया था। छत्रीपुरा पुलिस ने इस मामले में केस भी दर्ज किया था।
वाट्सएप पर आती थी लिंक
पुलिस जांच में सामने आया कि सच्चिदानंद नगर निवासी मनीष पमनानी भी कथित रूप से वाट्सएप के जरिये रॉनी को बेटिंग पैनल भेजता था। इन लिंक के माध्यम से पांच हजार रुपए या उससे अधिक बैलेंस वाली बेटिंग आईडी तैयार रहती थीं, जिन्हें आगे खिलाड़ियों तक पहुंचाया जाता था। रॉनी के मोबाइल से मिले डिजिटल साक्ष्यों ने इस पूरे नेटवर्क का खुलासा कर दिया।
ड्रग्स से सट्टे तक... अब बैंक खातों की पड़ताल
एमडी ड्रग्स मामले की जांच अब आर्थिक लेनदेन तक पहुंच गई है। पुलिस ने नाना पटवारी और कॉलोनाइजर सुमित मंत्री से 10 वर्षों के बैंक ट्रांजेक्शन मांगे हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि ड्रग्स, ऑनलाइन सट्टे और वित्तीय लेनदेन के बीच सीधा संबंध है या नहीं। सुमित मंत्री से पूछताछ के दौरान कथित मेडिकल सर्टिफिकेट को लेकर भी पुलिस जांच कर रही है।
डायरी में दर्ज था पूरा हिसाब
पुलिस पूछताछ में यह भी पता चला कि रॉनी केवल आईडी नहीं बेचता था, बल्कि किसे आईडी दी गई, कितना पैसा आया और कितना कमीशन मिला, इसका हिसाब डायरी में दर्ज करता था। अब पुलिस उस डायरी को जब्त कर उसमें दर्ज नामों और लेनदेन के आधार पर अन्य संदिग्धों तक पहुंचने की तैयारी कर रही है।
नाना की जांच अब भी जारी
पुलिस के अनुसार रॉनी कौशल तो पहले से गिरफ्तार है, लेकिन अब मनीष जादौन, लल्ला चौहान और प्रीतेश त्रिपाठी की तलाश है। फिलहाल नाना पटवारी का नाम गैंबलिंग एक्ट की उक्त एफआईआर में आरोपी के रूप में शामिल नहीं किया है। हालांकि पुलिस का कहना है कि यदि जांच में उसकी संलिप्तता के ठोस साक्ष्य मिलते हैं तो उसके खिलाफ भी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
राजेंद्र नगर पुलिस के मुताबिक जब्त मोबाइल, कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स, वाट्सएप चैट, ऑनलाइन बेटिंग वेबसाइट की हिस्ट्री और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर जांच लगातार आगे बढ़ रही है। आने वाले दिनों में इस कथित नेटवर्क से जुड़े कई और नाम सामने आने की संभावना है।
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