राजवाड़ा पर लग गए दो यूनिपोल: दिनभर ट्रैफिक का रहता है दबाव; हादसा हुआ तो हो सकता है जान का खतरा
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
नगर निगम अफसरों से मिलीभगत कर विज्ञापन कंपनी ने राजवाड़ा पर दो यूनिपोल लगा दिए, जबकि शहर के ह्रदयस्थल पर यूनिपोल लगाने की अनुमति नहीं है, लेकिन कमाई के लिए निगम अफसरों ने ठेकेदार को मनमानी करने की छूट दे दी है। इससे राजवाड़े की सुंदरता में ग्रहण लग गया है। विशालकाय यूनिपोल से हादसे का खतरा है।
नगर निगम में अफसरशाही हावी है। इसके चलते निगम में नियमों को ताक पर रखकर अफसर अपनी मनमानी कर रहे हैं। इसके चलते शहर में डिवाइडर, फुटपाथ, ग्रीनबेल्ट सहित पुल से सटकर यूनिपोल बनाकर विज्ञापन कंपनियों के कर्ताधर्ता कमाई कर रहे हैं, जबकि निगम अफसर अपनी कमाई की वजह से इन विज्ञापन कंपनियों के कर्ताधर्ताओं को मनमानी करने की छूट दे रहे हैं। इसके चलते ही विज्ञापन कंपनी ने शहर के ह्रदय स्थल राजवाड़ा पर दो यूनिपोल बनाकर उनमें विज्ञापन लगाना शुरू कर दिया है।
इन यूनिपोल की बीस फीट से अधिक ऊंचाई होने और सड़क किनारे होने से कभी भी हादसा हो सकता है। जबकि राजवाड़ा क्षेत्र में ट्रैफिक का सर्वाधिक दबाव रहता है। ऐसे में हादसा हुआ तो शहरवासियों के लिए जानलेवा हो सकता है, लेकिन निगम अफसरों ने इन बातों को दरकिनार कर यूनिपोल बनवा दिए। नियम विरुद्ध बनाए गए यूनिपोल के निर्माण रोकने की जहमत किसी ने नहीं उठाई।
कमीशन का खेल
सूत्रों की मानें तो नगर निगम में विज्ञापन कंपनी हर माह निगम को लाखों रुपए टैक्स अदा करती है। जबकि अफसरों को अलग से हर माह कमिशन के नाम पर चढ़ावा चढ़ाया जाता है। इसके चलते ही निगम अफसरों ने विज्ञापन कंपनी के कर्ताधर्ताओं को मनमानी करने की छूट दे रखी है।
इसका खामियाजा शहरवासियों को भुगतना पड़ रहा है। सूत्रों की मानें तो विज्ञापन कंपनी पर जितना टैक्स हर माह बनता है, उतनी राशि भी जमा नहीं कराई जाती है। इस तरह विज्ञापन कंपनी को निगम अफसरों की लापरवाही से मनमानी करने का लाइसेंस मिल गया है।
जानलेवा यूनिपोल
नगर निगम अफसरों की मिलीभगत से विज्ञापन कंपनियों ने शहर के डिवाइडर, ग्रीनबेल्ट सहित राजबाड़ा पर भी याूनिपोल बनाकर लाखों रुपए महीने की कमाई शुरु कर दी है। शहर में लगाए गए अवैध यूनिपोल की जांच तत्कालीन निगमायुक्त दिलीप कुमार यादव ने कराई थी तो उसमें जांच अधिकारी तत्कालीन अपर आयुक्त रोहित सिसोनिया और अर्थ जैन ने बीआरटीएस के यूनिपोल को क्लीनचिट दे दी थी।
जबकि शहर की कई सड़कों व डिवाइडरों के साथ फुटपाथ पर बनाए गए जानलेवा यूनिपोल अवैध बताए जा रहे हैं। इसके बाद भी निगम अफसर मौन साधे बैठे हैं।
बेबस अफसर
निगमायुक्त क्षितिज सिंघल के पास भी शहर भर में लगाए गए यूनिपोल के मामलो की शिकायत पहुंच गई है। इससे यह कहा जा रहा है कि इस बार विज्ञापन कंपनियों पर कार्रवाई हो सकती है। जिससे सडक़ किनारे फुटपाथ, डिवायडर, चौराहो पर बनाए गए यूनिपोल को लेकर विज्ञापन कंपनियों पर कार्रवाई हो सकती है। लेकिन विज्ञापन कंपनियो के कर्ताधर्ताओ की राजनीतिक पैठ के आगे अब तक सभी निगमायुक्त बेबस रह गए। ऐसा ही इस बार भी हो सकता है।
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