वर्दी के दो शेरों का सीएम दरबार में सम्मान: इंदौर के दो जांबाज पुलिसकर्मियों को भोपाल में मिला केएफ रूस्तमजी पुरस्कार
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
भोपाल में आयोजित केएफ रुस्तमजी पुरस्कार वितरण समारोह में जब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के हाथों प्रदेश के चुनिंदा पुलिसकर्मियों को सम्मानित किया जा रहा था, तब इंदौर पुलिस के दो नाम सबसे ज्यादा चर्चा में रहे।
एक ने कोरोना काल में मौत का सौदा करने वाले नकली रेमडेसिविर माफिया की जड़ें हिला दी थीं, तो दूसरे ने साइबर अपराधियों के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की कमर तोड़ दी थी।
समारोह में डीजीपी कैलाश मकवाना, एडीजीपी चंचल शेखर, एडीजी आदर्श कटियार और आईजी रुचिवर्धन मिश्र की मौजूदगी में इंदौर क्राइम ब्रांच के एएसआई विजय सिंह चौहान और इंदौर साइबर सेल के कांस्टेबल गजेंद्र सिंह राठौर को उनके असाधारण साहस और उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया गया।
मौत के सौदागरों से भिड़नेवाला ‘दबंग’ पुलिसिया चेहरा
एएसआई विजय सिंह चौहान उन पुलिसवालों में गिने जाते हैं जो मैदान में उतरकर अपराधियों का खेल खत्म करते हैं। कोरोना काल में जब नकली रेमडेसिविर लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे थे, तब मई 2020 में इंदौर क्राइम ब्रांच में पदस्थ विजय सिंह चौहान ने करीब 400 नकली इंजेक्शन पकड़कर पूरे रैकेट का खुलासा कर दिया था।
1996 में सिपाही के रूप में मध्य प्रदेश पुलिस में भर्ती हुए विजय सिंह मूलत: उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। उनके चाचा मानसिंह चौहान इंदौर के अजाक थाने से रिटायर हुए थे। उन्हीं की दबंग कार्यशैली से प्रभावित होकर विजय सिंह ने पुलिस सेवा में आने का फैसला लिया था।
उनकी बहादुरी की सबसे चर्चित कहानी स्कीम-78 डकैती कांड की रही, जब चार हथियारबंद डकैतों से वे अकेले भिड़ गए थे। जान की परवाह किए बिना उन्होंने मुख्य डकैत को दबोच लिया था। यह वही खूंखार बदमाश था जो पहले दो हत्याएं कर चुका था।
साल 2011 में इंदौर के श्रीनगर मेन इलाके में हुए चर्चित देशपांडे ट्रिपल मर्डर केस में भी विजय सिंह चौहान ने आरोपियों नेहा वर्मा, राहुल चौधरी और मनोज आटोद को पकड़ने में अहम भूमिका निभाई थी।
इस साहसिक कार्रवाई के बाद विजय सिंह चौहान को आउट ऑफ टर्न प्रमोशन मिला था। तीन दशक की सेवा में उन्हें 450 से ज्यादा नकद इनाम, रिवार्ड और प्रशस्ति पत्र मिल चुके हैं। बताया जाता है कि शुरुआती दौर में आईजी बीएम कुंवर ने उन्हें एक हजार रुपए का नकद इनाम दिया था, जो उस दौर में किसी सिपाही को मिलने वाले सबसे चर्चित पुरस्कारों में गिना गया।
साइबर दुनिया के शिकारी को सीएम ने दो-दो बार किया सलाम
कांस्टेबल गजेंद्र सिंह राठौर ने साइबर अपराध की दुनिया में ऐसे ऑपरेशन किए, जिनकी गूंज विदेश तक सुनाई दी। मुख्यमंत्री ने उन्हें एक ही दिन में दो बार सम्मानित किया। वर्ष 2019-20 और 2021-22 के लिए उन्हें विशिष्ट श्रेणी में रुस्तमजी अवार्ड प्रदान किया गया।
2013 बैच के गजेंद्र सिंह राठौर मूलत: रतलाम के रहने वाले हैं। खास बात यह है कि उनके परिवार में उनसे पहले कोई भी पुलिस सेवा में नहीं था। उनकी कार्यशैली को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिली और उन्हें एफबीआई एंबेसी से प्रशस्ति पत्र भी प्राप्त हो चुका है।
गजेंद्र सिंह ने वर्ष 2019 में इंदौर में चल रहे इंटरनेशनल कॉल सेंटर का खुलासा करने में अहम भूमिका निभाई थी। यह गिरोह अमेरिका के नागरिकों को ठगता था और कार्रवाई में 80 आरोपियों की गिरफ्तारी हुई थी।
वर्ष 2020 में फिल्मों में काम दिलाने के नाम पर महिला का अश्लील वीडियो बनाकर 32 वेबसाइटों पर अपलोड करने वाले गिरोह के खिलाफ कार्रवाई में भी गजेंद्र सिंह ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
पुलिस ने न सिर्फ वीडियो तुरंत हटवाए, बल्कि आरोपियों को भी सराहनीय योगदान दिया। वर्ष 2021 में जापानी नागरिक से जुड़े 7.30 करोड़ रुपए के क्रिप्टो करेंसी फ्रॉड केस की जांच में भी गजेंद्र सिंह राठौर की भूमिका निर्णायक रही। आरोपी को मथुरा-वृंदावन से गिरफ्तार किया गया था।
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