तिकोना बगीचा घोटाला: जमीन लुटी, अधिकारी देखते रहे तमाशा
KHULASA FIRST
संवाददाता

निगम, राजस्व और पुलिस की मिलीभगत से शासकीय बगीचे पर कब्जा, फर्जी दस्तावेजों के दम पर खड़ी कर दी दुकानों की लाइन
अंकित शाह 99264-99912 खुलासा फर्स्ट…इंदौर
छत्रीबाग राजस्व ग्राम कॉलोनी स्थित ‘तिकोना बगीचा’ अब बगीचा कम और सरकारी जमीन पर कब्जे, भ्रष्टाचार और प्रशासनिक संरक्षण का जीवंत प्रतीक ज्यादा नजर आने लगा है।
नगर निगम के आधिपत्य वाली इस शासकीय भूमि को कथित भूमाफियाओं और निजी व्यक्तियों के हवाले कर दिया गया, जहां पहले छह दुकानों और एक ऑफिस का निर्माण किया गया और अब बची हुई जमीन पर भी छोटे-छोटे दुकानों का निर्माण तेजी से जारी है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर सरकारी जमीन पर यह सब खुलेआम होता रहा और जिम्मेदार अधिकारी वर्षों तक आंखें बंद कर बैठे रहे।
कब्जाधारियों को न्यायालय में पक्ष रखने का अवसर दिया: मामले में पहले भी कलेक्टर कार्यालय और नगर निगम में कई शिकायतें की गईं, लेकिन कार्रवाई करने के बजाय कब्जाधारियों को न्यायालय में पक्ष रखने का अवसर दिया जाता रहा।
सरकारी अधिकारियों द्वारा समय पर जवाब प्रस्तुत नहीं किए जाने के कारण मामला वर्षों तक लटका रहा और इसी दौरान धीरे-धीरे पूरे बगीचे पर अवैध निर्माण खड़ा कर दिया गया।
शिकायतकर्ता दौड़ते रहे, अधिकारी बदलते रहे और भूमाफिया कब्जा करते रहे
सरकारी बगीचे की जमीन को बचाने की जिम्मेदारी एसडीएम, तहसीलदार, पटवारी, अपर आयुक्त, भवन अधिकारी और भवन निरीक्षकों की थी, लेकिन इन अधिकारियों ने कार्रवाई करने के बजाय शिकायतकर्ताओं को विभागों के चक्कर कटवाने का काम किया।
22 वर्षों में अधिकारी बदलते रहे, शिकायतें पुरानी होती गईं और दूसरी तरफ कब्जाधारियों ने कथित रूप से फर्जी दस्तावेज तैयार कर वैध अनुमति हासिल कर ली। इन्हीं फर्जी दस्तावेजों के आधार पर अवैध निर्माण की नींव रखी गई, जो आज भी सीना तानकर खड़ा है। आरोप है कि इस सरकारी जमीन का क्रय-विक्रय कर लाखों नहीं बल्कि करोड़ों रुपए का अवैध कारोबार किया गया।
नौकरशाहों के संरक्षण में बढ़े कब्जाधारियों के हौसले
अब कब्जाधारियों के हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं कि सरकारी बगीचे की शेष भूमि पर भी कब्जा कर निर्माण किया जा रहा है। नगर निगम के अधिकारियों को वर्षों से मालूम था कि संबंधित खसरा नंबर राजस्व रिकॉर्ड में शासकीय भूमि के रूप में दर्ज है, इसके बावजूद कथित मिलीभगत और भ्रष्टाचार के चलते वर्ष 2025 में भवन निर्माण अनुमति जारी कर दी गई।
6 मई 2026 को मामले का खुलासा होने के बाद भ्रष्ट अधिकारियों ने भवन अनुज्ञा अनुमति क्रमांक PMT/IND/0152/3107/2025 दिनांक 14 अगस्त 2025 को म.प्र. भूमि विकास नियम 2012 के नियम 25 के तहत प्रतिसंहित कर दिया, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी।
इसके बाद भी प्रतिदिन जिला प्रशासन और नगर निगम अधिकारियों को मौके पर जारी अवैध निर्माण की जानकारी और सबूत दिए जाते रहे, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ पत्राचार चलता रहा और निर्माण कार्य लगातार जारी रहा।
राजनीतिक संरक्षण: प्रशासन बौना
शहर में चर्चा है कि भूमाफियाओं की राजनीतिक पकड़ इतनी मजबूत है कि कलेक्टर, निगम कमिश्नर, तहसीलदार, पटवारी, भवन अधिकारी और थाना प्रभारी तक प्रभावी कार्रवाई करने की स्थिति में नजर नहीं आते। यही कारण है कि सरकारी जमीनों पर कब्जे का खेल लगातार बढ़ता जा रहा है।
प्रदेश के नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय भूमाफियाओं पर नकेल कसने की बात जरूर करते हैं, लेकिन सवाल यह है कि यदि उनके गृह क्षेत्र इंदौर में ही सरकारी जमीनें सुरक्षित नहीं हैं तो बाकी प्रदेश का क्या हाल होगा।
नोटिस जारी, लेकिन क्या सच में चलेगा बुलडोजर?
लाल बहादुर शास्त्री (राजमोहल्ला) जोन क्रमांक-02 भवन अनुज्ञा शाखा द्वारा 15 दिवस का नोटिस जारी कर अवैध निर्माण हटाने के निर्देश दिए गए हैं। इसमें चेतावनी दी गई है कि निर्धारित अवधि में स्वयं निर्माण नहीं हटाने पर नगर पालिक निगम अधिनियम 1966 एवं भूमि विकास नियम 2012 के तहत निर्माण सील अथवा हटाने की कार्रवाई की जाएगी।
यह समय सीमा 21 मई 2026 को समाप्त हो रही है। अब पूरे शहर की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या नगर निगम वास्तव में बुलडोजर चलाकर कार्रवाई करेगा या फिर यह नोटिस भी बाकी फाइलों की तरह कागजों में दफन हो जाएगा।
अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) मल्हारगंज, इंदौर के पत्र क्रमांक 167/रीडर/मल्हारगंज/2026 दिनांक 29 अप्रैल 2026 में साफ उल्लेख किया गया है कि परमजीत कौर लौंगिया द्वारा कस्बा इंदौर पार्ट मल्हारगंज की भूमि सर्वे नंबर 911 रकबा 0.6110 हेक्टेयर मद शासकीय भूमि पर लगभग 30×40 यानी 1200 वर्गफीट क्षेत्र में निर्माण कार्य किया जा रहा है।
सीमांकन रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट हुआ कि निर्माण ‘तिकोना बगीचा’ की शासकीय भूमि खसरा क्रमांक 911 रकबा 0.038 हेक्टेयर तथा खसरा क्रमांक 912 रकबा 0.056 हेक्टेयर पर किया गया है।
फर्जी दस्तावेजों के दम पर सरकारी जमीन को बना दिया निजी संपत्ति
पूरे मामले में सबसे गंभीर आरोप यह है कि भूमाफियाओं ने शासकीय उद्यान की जमीन पर कब्जा करने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार किए और उन्हीं के आधार पर भवन अनुज्ञा अनुमति हासिल की गई। यह दस्तावेज आज भी सरकारी कार्यालयों में जमा हैं, जो एक बड़े फर्जी दस्तावेज गिरोह का पर्दाफाश कर सकते हैं।
आरोप है कि इसी तरह के फर्जी दस्तावेजों के दम पर कई अन्य सरकारी जमीनों को भी निजी साबित कर दिया गया। इसका बड़ा उदाहरण केसर बाग रोड स्थित महादेव मंदिर की जमीन का मामला है, जहां कथित रूप से कलेक्टर के नाम दर्ज शासकीय भूमि को निजी घोषित कर अवैध कॉलोनियां विकसित कंेर दी गईं और करोड़ों रुपए का कारोबार किया गया।
दोनों मामलों में सरकारी जमीन हथियाने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार करने का आरोप राजेंद्र भुसारी पर लगाया गया है।
संबंधित समाचार

चर्चित अभि तोमर हत्याकांड की आग भिंड तक जा पहुंची:इंदौर की गैंगवार का बदला लेने चली गोलियां

शौक पूरे करने के लिए करता था चोरी:दो ऑटो किए बरामद; रात के अंधेरे में उड़ाता था वाहन, पुलिस ने किया गिरफ्तार

सिंहस्थ की जमीन से हटाया अतिक्रमण:20 अवैध मकान ध्वस्त 3 हेक्टेयर जमीन को कब्जा मुक्त; पुलिस बल की मौजूदगी में अभियान चलाया

इस अधिकारी ने बढ़ाया देवी अहिल्या की नगरी का गौरव:ओडिशा के राज्यपाल की एडीसी बनी; ऐसा करने वाली पहली महिला ऑफिसर भी
टिप्पणियाँ
अभी कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी करें!