रिश्वतखोरी के खेल में नप गए पीडब्ल्यूडी के तीन अफसर: ढाई लाख रुपए घूस लेते पकड़ाए थे; हफ्तेभर बाद निलंबित कर ग्वालियर किया अटैच
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
भ्रष्टाचार के दलदल में धंसे लोक निर्माण विभाग के अफसर आखिरकार कानून के शिकंजे में आ ही गए। ठेकेदार से तीन लाख रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़े गए पीडब्ल्यूडी के तीन अधिकारियों पर एक हफ्ते बाद गाज गिर गई।
देर रात जारी आदेश में तीनों को निलंबित कर ग्वालियर अटैच कर दिया गया है, लेकिन सवाल यह है कि क्या सिर्फ निलंबन से इस खेल का अंत हो जाएगा?
लोकायुक्त की कार्रवाई के बाद पीडब्ल्यूडी इंदौर संभाग-1 के प्रभारी कार्यपालन यंत्री जयदेव गौतम, उपयंत्री अंशु दुबे और टीके जैन को आखिरकार सस्पेंड कर दिया गया। तीनों को मुख्यालय के निर्देश पर ग्वालियर कार्यालय से जोड़ दिया गया है।
विभाग अब इंदौर में नई नियुक्तियों की तैयारी कर रहा है, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने सिस्टम की साख पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला 21 अप्रैल का है, जब सोहागपुर (पीथमपुर) के ठेकेदार राजपाल सिंह पंवार ने लोकायुक्त से शिकायत की।
आरोप था कि 2023 में सड़क निर्माण का काम पूरा करने के बावजूद करीब 30 लाख रुपये का भुगतान जानबूझकर रोक दिया गया और बदले में रिश्वत की मांग की जा रही थी। शिकायत के बाद लोकायुक्त ने जाल बिछाया।
ठेकेदार ने बातचीत रिकॉर्ड की और तय योजना के तहत पैसे देने पहुंचा। जैसे ही रकम सौंपी गई, टीम ने दबिश देकर एसडीओ और उपयंत्री को ऑफिस से दबोच लिया, जबकि कार्यपालन यंत्री को घर से गिरफ्तार किया गया। वह रिश्वत की रकम छिपाने की कोशिश में भी पकड़ा गया।
कार्रवाई में करीब ढाई लाख रुपये जब्त हुए। अब इस मामले ने नया मोड़ ले लिया है। लोकायुक्त पुलिस सिर्फ इस एक केस तक सीमित नहीं है, बल्कि तीनों अफसरों के पुराने रिकॉर्ड भी खंगाले जा रहे हैं।
शुरुआती जांच में सामने आया है कि कई ठेकेदार लंबे समय से इनसे परेशान थे। भुगतान अटकाने और रिश्वत मांगने की शिकायतें पहले भी मुख्यालय तक पहुंची थीं, लेकिन तब कार्रवाई नहीं हुई।
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