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बद्रीनाथ धाम हर दिन हजारों श्रद्धालु पहुंच रहे हैं दर्शनों के लिए: 8 से 10 घंटे तक कर रहे इंतजार

Khulasa First

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संवाददाता

29 मई 2026, 6:38 pm
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बद्रीनाथ धाम हर दिन हजारों श्रद्धालु पहुंच रहे हैं दर्शनों के लिए

रातभर ट्रैकिंग से बढ़ रही चिंता लगातार भीड़ और अव्यवस्थाओं को लेकर श्रद्धालुओं में नाराजगी

तीन दिन के सफर में लग रहे दस दिन तक

एक दिन में पांच हजार से ज्यादा घोड़े और खच्चर नहीं जा सकेंगे

खुलासा फर्स्ट, केदारनाथ।
उत्तराखंड की केदारनाथ यात्रा में लगातार बढ़ रही भीड़ और अव्यवस्थाओं को लेकर अब श्रद्धालुओं की नाराजगी खुलकर सामने आने लगी है। धाम से लौट रहे कई भक्तों ने प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर सवाल उठाते हुए कहा है कि क्षमता से अधिक श्रद्धालुओं को भेजे जाने के कारण हालात लगातार बिगड़ रहे हैं।

यात्रियों का कहना है कि कठिन ट्रैक और खराब मौसम के बीच उन्हें घंटों लाइन में खड़े रहना पड़ रहा है, जबकि दर्शन के लिए कोई तय व्यवस्था दिखाई नहीं दे रही।

भक्तों को घंटों बाद भी दर्शन नहीं हो सके
एक श्रद्धालु से मिली जानकारी के अनुसार सुबह 5 से 6 बजे के बीच लाइन में लगे कई भक्तों को घंटों बाद भी दर्शन नहीं हो सके। बताया गया कि रात 2 से 4 बजे के बीच श्रद्धालुओं का एक बड़ा समूह ट्रैक पूरा कर केदारनाथ धाम पहुंचा था, लेकिन अत्यधिक भीड़ के कारण सुबह तक भी दर्शन नहीं हो पाए।

श्रद्धालुओं ने सबसे बड़ा सवाल प्रशासन द्वारा रातभर यात्रा चालू रखने को लेकर उठाया है। उनका कहना है कि केदारनाथ का ट्रैक बेहद कठिन और जोखिमभरा माना जाता है। ऐसे में देर रात और खराब मौसम के दौरान भी लगातार यात्रियों को ऊपर भेजना किसी बड़े हादसे को न्योता देने जैसा है।

क्षमता के अनुसार ही श्रद्धालुओं को अनुमति दें
यात्रियों का कहना है कि प्रशासन को धाम की क्षमता के अनुसार ही श्रद्धालुओं को अनुमति देनी चाहिए। यदि धाम में इतनी संख्या में यात्रियों की व्यवस्था नहीं है तो भीड़ को नियंत्रित करने के लिए सख्त कदम उठाए जाना चाहिए।

श्रद्धालुओं के अनुसार धाम में दर्शन के लिए 8 से 10 घंटे तक इंतजार करना पड़ रहा है। कई लोग लंबे ट्रैक के बाद थकान, ठंड और ऑक्सीजन की कमी जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। इसके बावजूद लाइनें लगातार बढ़ती जा रही हैं।

रिकॉर्ड संख्या और व्यवस्थाओं की वाहवाही में व्यस्त
यात्रा से लौटे कुछ श्रद्धालुओं का कहना है कि प्रशासन केवल रिकॉर्ड संख्या और व्यवस्थाओं की वाहवाही में व्यस्त दिखाई दे रहा है, जबकि जमीन पर हालात अलग हैं। यात्रियों के आराम, सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण को लेकर पर्याप्त तैयारी नजर नहीं आ रही।

कुछ श्रद्धालुओं ने यात्रियों से भी अपील की है कि सभी लोग गर्मी की छुट्टियों में ही यात्रा करने की बजाय थोड़ा इंतजार करें। उनका कहना है कि केदारनाथ यात्रा दीपावली तक चलती है और बाद के महीनों में भी दर्शन किए जा सकते हैं। यदि श्रद्धालु अलग-अलग समय पर यात्रा करें तो भीड़ और अव्यवस्था दोनों कम हो सकती हैं।

सच बोलना जरूरी
यात्रा व्यवस्था को लेकर नाराज एक श्रद्धालु ने कहा कि धाम में भक्तों की संख्या तय किए बिना लगातार भीड़ भेजना गंभीर चिंता का विषय है।

फिलहाल प्रशासन की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन लगातार बढ़ती भीड़ और लंबा इंतजार यात्रियों की चिंता जरूर बढ़ा रहा है।

चारधाम पहुंचने से पहले जाम ले रहा सब्र की परीक्षा
चारधाम यात्रा चरम पर है, लेकिन यात्रा मार्ग पर कई जगह संकरी सड़कें और रास्ता ठीक नहीं होने के कारण बार-बार जाम लग रहा है। ऐसे में वाहन रेंगते हुए आगे बढ़ रहे हैं। चारधाम यात्रियों के साथ ही स्थानीय लोगों का भी यात्रा का शेड्यूल गड़बड़ा रहा है। लोगों के तीन दिन के सफर में दस दिन लग रहे हैं।

यात्रा पर पटना से आए अमित कुमार ने बताया कि कदम-कदम पर जाम लग रहा है। तीन दिन के सफर में दस दिन लग गए हैं। पार्किंग की उचित व्यवस्था न होने से सड़क किनारे वाहन खड़े किए गए हैं, जिससे कई बार जाम की स्थिति बन रही है।

वहीं, धनंजय कुमार ने बताया कि लगा था एक सप्ताह में यात्रा आसानी से पूरी हो जाएगी, लेकिन अभी तक 12 दिन हो चुके हैं और घर पहुंचते-पहुंचते 15 दिन बीत जाएंगे।

एनएच अधिकारियों को दिक्कतें दूर करने किया निर्देशित... चालक अक्षय चावला बताते हैं कि बदरीनाथ और केदारनाथ दर्शन के लिए सवारियों को लेकर आए थे, लेकिन एक घंटे का रास्ता तय करने में ही दोगुना समय लग रहा है।

वहीं एसडीएम अलकेश नौडियाल ने कहा कि प्रशासन पूरी तरह चारधाम यात्रियों की मदद कर रहा है। एनएच के अधिकारियों को दिक्कतें दूर करने के लिए निर्देशित किया गया है।

सिंगल लेन हो गई सड़क...श्रीनगर, धारीदेवी, फरासू और सिरोहबगड़ में वाहनों की आवाजाही धीमी है। यहां वाहन रेंगते हुए आगे बढ़ रहे हैं। रुद्रप्रयाग के बाद कमेड़ा-टू में नदी किनारे सुरक्षा कार्य के कारण सड़क सिंगल लेन की हो गई है।

सुबह और रात में दोनों ओर से वाहनों के आने पर जाम लग रहा है। दिन में ड्यूटी कर्मी एक-एक कर वाहनों को रवाना कर रहे हैं। ऐसे में यहां वाहनों की कतारें लग रही हैं। कर्णप्रयाग में सड़क चौड़ीकरण न होने से भी वाहन रेंगते हुए चल रहे हैं।

एसपी ने लिया व्यवस्था का जायजा... पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पंवार ने बद्रीनाथ धाम में यातायात व सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि यात्रा में बढ़ती भीड़ के कारण व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने में स्थानीय लोगों के साथ समन्वय बनाए रखना अत्यंत महत्वपूर्ण है। बद्रीनाथ धाम में लगातार श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती जा रही है।

हर दिन हजारों श्रद्धालु धाम में दर्शनों के लिए पहुंच रहे हैं। ऐसे में भीड़ नियंत्रण, यातायात प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था को बनाए रखना पुलिस प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है।

वीआईपी दर्शनों को लेकर खुलासा, केदारनाथ धाम में पर्चियां लहराते हुए धक्का-मुक्की का वीडियो वायरल
चारधाम यात्रा अपने चरम पर है। केदारनाथ में भीड़ को संभाल पाने में शासन-प्रशासन विफल नजर आ रहा है। आम श्रद्धालुओं की तो बात ही छोड़िए, वीआईपी दर्शनों के लिए भी मारामारी मची है।

केदारनाथ धाम का एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वीआईपी गेट के बाहर भारी भीड़ लगी है, धक्का-मुक्की की नौबत आ रही है और श्रद्धालु वीआईपी पर्चियां लहराते नजर आ रहे हैं।

केदारनाथ धाम में वीआईपी दर्शन व्यवस्था को लेकर फिर विवाद खड़ा हो गया है। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में बड़ी संख्या में लोग वीआईपी पर्चियां लहराते हुए मंदिर गेट पर धक्का-मुक्की करते नजर आ रहे हैं।

हालात ऐसे दिखे कि मौके पर तैनात पुलिसकर्मी भी भीड़ के सामने बेबस नजर आ रहे हैं। दूसरी तरफ जैसे तैसे धक्के खाकर पैदल मार्ग से केदारनाथ पहुंचे भक्त अपने आप को ठगा महसूस कर रहे हैं। कोई पंजीकरण न हो पाने से मायूस है तो किसी को दर्शन करने के लिए कई दिनों का इंतजार करना पड़ रहा है।

दरअसल, बद्री केदार मंदिर समिति कई बार ये दावा करती है कि सभी को सुलभ दर्शन कराए जा रहे हैं और किसी को भी वीआईपी ट्रीटमेंट नहीं दिया जा रहा है, लेकिन वीआईपी गेट से आई इन तस्वीरों ने उन तमाम दावों की पोल खोल दी है।

हो सकता है कि मंदिर समिति इस मामले की भी ठीक उसी तरह लीपापोती कर दे जिस तरह आरटीआई के जवाब से वीआईपी के रहन-सहन पर किए गए खर्च के मामले को किया था। लेकिन ये तस्वीरें वायरल हो रही हैं, और इससे न सिर्फ व्यवस्था पर सवाल उठ रहा है बल्कि मंदिर समिति से लोगों का भरोसा भी उठ रहा है।

नई मानक संचालन प्रक्रिया से पशु क्रूरता पर लगेगी रोक
उत्तराखंड सरकार ने केदारनाथ, यमुनोत्री, हेमकुंड साहिब और आदि कैलाश यात्रा मार्गों पर घोड़ा-खच्चरों के संचालन के लिए नई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की है। यह व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है।

इसका उद्देश्य श्रद्धालुओं की सुरक्षित और व्यवस्थित यात्रा सुनिश्चित करना है। साथ ही, यात्रा मार्गों पर पशुओं के कल्याण और संरक्षण को प्राथमिकता देना है। यह नई एसओपी उच्च न्यायालय नैनीताल और राष्ट्रीय हरित अधिकरण के निर्देशों के अनुरूप है।

हाईकोर्ट और एनजीटी के निर्देशों के बाद सरकार ने केदारनाथ धाम, यमुनोत्री धाम, हेमकुंड साहिब और आदिकैलाश यात्रा मार्ग पर घोड़े खच्चरों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कई नियम लागू किए हैं।

सबसे बड़ा फैसला यह लिया गया है कि अब केदारनाथ मार्ग पर एक दिन में 5,000 से ज्यादा घोड़े खच्चर संचालित नहीं होंगे। इनमें से 4,000 यात्रियों की सवारी के लिए और 1,000 सामान ढोने के लिए निर्धारित रहेंगे। जबकि यमुनोत्री मार्ग पर एकदिन में अधिकतम 595 और हेमकुंड साहिब मार्ग पर 1050 घोड़े-खच्चरों के संचालन की ही अनुमति होगी।

रजिस्ट्रेशन से पहले हर पशु की जांच जरूरी...अब बिना पंजीकरण और स्वास्थ्य प्रमाण पत्र के किसी भी पशु का संचालन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। रजिस्ट्रेशन से पहले हर पशु की ग्लैंडर्स जांच, ईयर टैगिंग और माइक्रोचिपिंग अनिवार्य की गई है ताकि हर पशु की डिजिटल ट्रैकिंग हो सके।

इतना ही नहीं, 45 दिनों बाद पशु की जांच करवाकर हेल्थ सर्टिफिकेट को रिन्यू करवाना होगा। सरकार ने संचालन के समय को लेकर भी सख्त नियम बनाए हैं। सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले घोड़े खच्चरों का संचालन नहीं किया जा सकेगा।

पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिद्धू ने की पूजा-अर्चना
पूर्व क्रिकेटर और नेता नवजोत सिंह सिद्धू इन दिनों उत्तराखंड के दौरे पर हैं। अपनी धार्मिक यात्रा के दौरान सिद्धू हरिद्वार पहुंचे, जहां उन्होंने हरिद्वार की अधिष्ठात्री देवी माया देवी के मंदिर में जाकर विशेष पूजा-अर्चना की।

सिद्धू के मंदिर में आने पर जूना अखाड़ा के संतों ने उनका स्वागत किया। मंदिर में पुजारी ने पूजा-अर्चना कराई। सिद्धू ने भी साधु-संतों से आशीर्वाद लिया। सिद्धू ने मंदिर परिसर में स्थित भैरव मंदिर में भी मत्था टेका और भैरव आरती में भाग लिया।

जूना अखाड़ा के संतों और मंदिर से जुड़े पुजारियों ने उन्हें दोनों मंदिर की ऐतिहासिक और धार्मिक विशेषताओं की जानकारी दी। संतों ने बताया कि माया देवी मंदिर हरिद्वार के प्राचीन सिद्धपीठों में

शामिल है। मंदिर आस्था का प्रमुख केंद्र: मां माया देवी हरिद्वार की अधिष्ठात्री देवी हैं और दूरदराज से आने वाले श्रद्धालुओं के साथ ही स्थानीय लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है। यहां माता सती की नाभि गिरी थी। यहां आने वाले श्रद्धालुओं की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

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