चापलूसी से पद और नेतावाद का कब्जा: भाजपा महिला मोर्चा में नई नियुक्ति पर फूटा पूर्व नगर अध्यक्ष का गुस्सा; सोशल मीडिया पोस्ट डिलीट होने के बाद भी सियासत गर्म
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
भारतीय जनता पार्टी महिला मोर्चा की निवर्तमान नगर अध्यक्ष शैलजा मिश्रा ने नई नगर अध्यक्ष श्रेष्ठा जोशी के चयन पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। सोशल मीडिया पर साझा की अपनी पोस्ट में शैलजा ने लिखा कि 25-25 साल से निष्ठा से काम कर रहे कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज किया जा रहा है और दो-तीन साल पहले दूसरी पार्टियों से आए या नेताओं की परिक्रमा करने वालों को तवज्जो दी जा रही है।
उन्होंने साफ शब्दों में लिखा कि आज संगठन में विचारधारा नहीं, बल्कि ‘जी हुजूरी’ देखी जा रही है। नेता अब ऐसे लोगों को चुन रहे हैं, जो सवाल न पूछें और केवल हां में हां मिलाएं। यह न्याय का नहीं, संगठन के अस्तित्व का सवाल है, क्योंकि चुनाव सिर्फ फेसबुक और इंस्टाग्राम से नहीं, बल्कि बूथ पर खड़े रहने वाले पुराने कार्यकर्ता की बदौलत जीते जाते हैं।
श्रेष्ठा जोशी की नियुक्ति के साथ ही इंदौर भाजपा में विधानसभा क्षेत्र तीन का प्रभाव और मजबूत माना जा रहा है। भाजपा नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा भी इसी विधानसभा क्षेत्र से आते हैं और अब महिला मोर्चा की कमान भी इसी क्षेत्र की नेता को सौंपी गई है।
श्रेष्ठा जोशी का पिछला कार्यकाल भी विवादों से अछूता नहीं रहा। वर्ष 2021 में पूर्व मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान के खिलाफ की गई पोस्ट और उज्जैन के एक मंडल उपाध्यक्ष के साथ ऑडियो विवाद सामने आने के बाद उन्हें जनवरी 2020 में महिला मोर्चा के प्रदेश मंत्री पद से हटा दिया गया था।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि श्रेष्ठा जोशी को पद दिलाने में विधायक मालिनी गौड़ की अहम भूमिका रही। इंदौर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान विधायक गौड़ खुद श्रेष्ठा जोशी को अपनी गाड़ी में लेकर पहुंचीं और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात कराई।
दूसरी ओर कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का समर्थन जुटाने में उनकी पारिवारिक सहयोगी और श्रेष्ठा की करीबी मित्र पूजा पाटीदार की भूमिका प्रमुख रही। नियुक्ति के बाद जब श्रेष्ठा बधाई देने पहुंचीं तो कैबिनेट मंत्री विजयवर्गीय ने उनके विवादित अतीत का जिक्र करते हुए सभी को साथ लेकर चलने की हिदायत भी दे डाली।
पूर्व नगर अध्यक्ष शैलजा मिश्रा का कहना है कि उन्होंने पोस्ट जरूर हटा ली है, लेकिन वे अपनी बात पार्टी के अधिकृत फोरम पर मजबूती से रखेंगी। इस घटनाक्रम ने इंदौर भाजपा के भीतर कार्यकर्ताओं की उपेक्षा और नेताओं की पसंद-नापसंद के आधार पर पद बांटने के आरोपों को फिर से हवा दे दी है।
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