स्टॉक लिमिट नहीं होने से महंगी है शकर: जमाखोरी रोकने केंद्र ने तय की थी 4000 क्विंटल की सीमा
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, भोपाल।
चीनी के दाम लगातार बढ़ रहे हैं, लेकिन जमाखोरी रोकने के लिए केंद्र की तय स्टॉक लिमिट महीनेभर बाद भी लागू नहीं हुई। केंद्र ने 28 जुलाई को नोटिफिकेशन जारी कर 1 अगस्त से एक डीलर के लिए अधिकतम 4000 क्विंटल की सीमा तय की थी।
मप्र के खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने प्रस्ताव शासन को भेजा, लेकिन आदेश नहीं निकला। इसलिए स्टॉक की जांच और निगरानी शुरू नहीं हो सकी। यह लिमिट 30 नवंबर तक लागू रहनी है। इसके उलट राजस्थान ने केंद्र के आदेश के बाद स्टॉक लिमिट सख्ती से लागू की और ऑनलाइन ऑर्डर पर भी अधिकतम 5 किलो की कैपिंग लगाई।
इसका असर यह हुआ कि वहां चीनी 6 दिन में 6 रुपए किलो सस्ती हो गई। वहां 22 अगस्त को भाव 68 रुपए किलो था, जो अब घटकर 62 रुपए रह गया है। ज्यादातर चीनी महाराष्ट्र और यूपी की मिलों से आती है। स्टॉक लिमिट लागू होती तो बड़े डीलरों को आवक, बिक्री और बचे माल की जानकारी देनी पड़ती। 4000 क्विंटल से ज्यादा स्टॉक मिलने पर कार्रवाई हो सकती थी। खाद्य विभाग के अफसर जिलों में व्यापारियों और गोदामों की नियमित जांच भी कर सकते थे।
अभी यह व्यवस्था नहीं होने से यह पता लगाना मुश्किल है बढ़ते दाम के पीछे वास्तविक कमी है या कहीं बड़े स्तर पर माल रोककर कृत्रिम कमी बनाई जा रही है। व्यापारियों का आरोप है कि सरकारी निगरानी सख्त नहीं होने से कीमतें लगातार बढ़ रही हैं।फूड कमिश्नर दिनेश जैन ने बतायाचीनी की स्टॉक लिमिट लगाने और प्रभावी जांच व निगरानी के लिए प्रस्ताव शासन को भेजा है। अभी तक आदेश जारी नहीं हुए हैं। उम्मीद है जल्द आदेश जारी होंगे।
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