मलेरिया का कहर: 3 दिन में दूसरी मौत; इतने बच्चों की मौत का दावा,10 वर्षीय बच्ची ने अस्पताल में तोड़ा दम
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, बालाघाट।
जिले के आदिवासी इलाकों में मलेरिया का प्रकोप लगातार चिंता बढ़ा रहा है। तीन दिन के भीतर मलेरिया से दूसरी मौत का मामले का खुलासा हुआ है।
परसवाड़ा क्षेत्र की मोहनपुर पंचायत की 10 वर्षीय काजल गोंदिया की एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। बच्ची का शव लेकर परिजन एम्बुलेंस से घर लौट रहे थे। इसी दौरान एक सरकारी जीप द्वारा एम्बुलेंस का पीछा किए जाने का मामला सामने आया है।
परिजनों का आरोप है कि रास्ते में एक रिपोर्टर ने एम्बुलेंस रोककर उनसे घटना के संबंध में बात करने की कोशिश की। इसी दौरान सरकारी जीप में मौजूद टीम ने कथित तौर पर एम्बुलेंस चालक को फटकार लगाई और वाहन रोकने पर आपत्ति जताई।
रिपोर्टर को परिजन से बात करने से रोकने का आरोप
घटना के दौरान सरकारी जीप में मौजूद महिलाओं ने मीडिया से बातचीत नहीं की और वाहन का गेट बंद कर एम्बुलेंस के पीछे चलती रहीं। परिजनों के अनुसार, एम्बुलेंस को रास्ते में रोकने को लेकर भी चालक को फोन पर निर्देश दिए गए थे।
हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम को लेकर प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। इसलिए सरकारी टीम द्वारा एम्बुलेंस का पीछा करने और मीडिया को रोकने के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।
तीन दिन में दूसरी मौत
मोहनपुर पंचायत में तीन दिन के भीतर मलेरिया से यह दूसरी मौत बताई जा रही है। इससे पहले बैगाटोला में लवकुश मरकाम की मलेरिया से मौत हुई थी।
उस मामले में भी परिजनों ने आरोप लगाया था कि प्रशासनिक टीम के पहुंचने से पहले ही अंतिम संस्कार कर दिया गया। लगातार हो रही मौतों ने क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं और मलेरिया नियंत्रण अभियान को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
24 अगस्त को हुई थी मलेरिया की पुष्टि
जानकारी के मुताबिक, काजल की तबीयत खराब होने के बाद 24 अगस्त को मलेरिया की पुष्टि हुई थी। 27 अगस्त को परिजन उसे इलाज के लिए बालाघाट के एक निजी केयर अस्पताल लेकर पहुंचे।
हालत में सुधार नहीं होने पर उसे गोंदिया के यूनाइटेड अस्पताल रेफर किया गया, जहां शनिवार सुबह उसकी मौत हो गई। मौत के बाद परिजन बच्ची का शव एम्बुलेंस से लेकर अपने गांव लौट रहे थे।
26 बच्चों की मौत का दावा
बालाघाट के बैहर और परसवाड़ा के आदिवासी क्षेत्रों में मलेरिया के साथ खसरा, त्वचा संबंधी बीमारियों और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं को लेकर भी चिंता बनी हुई है। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध जानकारी और दावों के मुताबिक, इन इलाकों में अब तक 26 बच्चों की मौत हो चुकी है।
हालांकि, 26 बच्चों की मौत का आंकड़ा किस अवधि में और किन-किन बीमारियों के कारण हुई मौतों को शामिल करता है, इसे लेकर आधिकारिक स्वास्थ्य विभाग के विस्तृत आंकड़े सामने आना बाकी हैं।
एम्बुलेंस नहीं रोकने के लिए फोन आने का दावा
काजल के चाचा के मुताबिक, शव लेकर घर लौटते समय एम्बुलेंस चालक के मोबाइल पर फोन आया था। उन्हें कथित तौर पर निर्देश दिया गया कि एम्बुलेंस को रास्ते में कहीं नहीं रोकना है।
इसके बाद सरकारी जीप द्वारा एम्बुलेंस का पीछा किए जाने की बात सामने आई। इस घटना ने प्रशासन की मंशा और स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
मुख्यमंत्री के दौरे से पहले मामला चर्चा में
काजल की मौत ऐसे समय हुई है, जब मुख्यमंत्री के बालाघाट दौरे को लेकर प्रशासनिक तैयारियां चल रही हैं। जिले के आदिवासी क्षेत्रों में मलेरिया से बच्चों की मौत का मुद्दा पहले से ही चर्चा में है।
अब काजल की मौत और एम्बुलेंस के कथित पीछा किए जाने की घटना ने मामले को और गंभीर बना दिया है। मौतों के वास्तविक आंकड़े, स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई और एम्बुलेंस प्रकरण में प्रशासन की भूमिका पर आधिकारिक स्थिति सामने आने के बाद ही तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट होगी।
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