जिन पर कार्रवाई और जांच की जिम्मेदारी वे ही छिपा रहे मुंह: पटाखा बाजार में लगे 45 लाख की वसूली के आरोप
KHULASA FIRST
संवाददाता

मंत्री, विधायक, पार्षदों के नाम उछले, फिर भी कार्रवाई शून्य
कल के अंक में खुलासा फर्स्ट ने प्रमुखता से किया था खुलासा
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
पटाखा बाजार में गुंडों-बदमाशों की कथित वसूली रोकने के नाम पर एसोसिएशन को सौंपी गई व्यवस्था अब खुद सवालों के घेरे में है। करीब 150 दुकानों से 30 हजार रुपए प्रति दुकान लेने के आरोप, मंत्री-विधायक और पार्षदों के नाम सामने आने तथा प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठने के बावजूद अब तक यह स्पष्ट नहीं है कि जांच कहां पहुंची और दोषी कौन पाया गया?
व्यापारियों को न गुंडों के आतंक से पूरी राहत मिली और न ही प्रशासन से समय पर दुकानें। कई व्यापारी लाखों रुपए का पटाखा लेकर दशहरा मैदान में दुकान आवंटन का इंतजार करते रहे। एसोसिएशन पदाधिकारी 30 हजार रुपए जमा कराने की शर्त पर अड़े रहे।
दूसरी ओर विस्फोटक अधिनियम के तहत लाइसेंस में निर्धारित भंडारण क्षमता की जांच तक नहीं होने के आरोप हैं। ऐसे में सवाल है कि प्रशासन की प्राथमिकता व्यापारियों की सुरक्षा और विस्फोटक नियमों का पालन है या पूरे मामले को दबाकर निकल जाना?
खुलासा फर्स्ट ने दशहरा मैदान में दुकान निर्माण के नाम पर 30 हजार रुपए प्रति दुकान वसूली का खुलासा किया था। करीब 143 दुकानों के निर्माण की जानकारी सामने आई है। इस हिसाब से लगभग 42.90 लाख रुपए की राशि बनती है। पहले करीब 150 दुकानों के आधार पर 45 लाख रुपए की वसूली का अनुमान सामने आया था।
पुरानी वसूली की शिकायतों में कौन दोषी पाया गया?... एसोसिएशन अध्यक्ष घनश्याम साहू ने 15 हजार रुपए निर्माण और 15 हजार रुपए बिजली व्यवस्था के लिए लेने की बात स्वीकार की थी। उन्होंने यह भी बताया था कि संगठन का पंजीयन नहीं कराया गया है।
कोषाध्यक्ष नरेश कौशल ने राशि की पूरी जिम्मेदारी अध्यक्ष की बताई थी, जबकि पार्षद जीतू राठौर ने संगठन के कामकाज में हस्तक्षेप से इनकार किया था। व्यापारियों के विधायक मालिनी गौड़ से मिलने के बाद एसोसिएशन बनने की बात भी सामने आई थी। लेकिन पार्षद का बेटा दुकान में बैठकर 30 हजार रुपए की रसीद काटता पाया गया।
मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से जुड़े व्यक्ति द्वारा पिछले वर्ष टेंडर लेने और पार्षद योगेश गेंदर से जुड़े लोगों पर पूर्व में वसूली के आरोप भी सामने आए थे। इन सभी दावों और आरोपों की प्रशासनिक जांच का नतीजा अब तक सार्वजनिक नहीं हुआ है। सवाल यह है कि प्रशासन ने संबंधित लोगों से पूछताछ की या नहीं? पुरानी वसूली की शिकायतों में कौन दोषी पाया गया और क्या कार्रवाई हुई?
30 हजार नहीं दिए तो दुकान नहीं? मैदान में माल लेकर बैठे रहे व्यापारी... व्यापारियों ने बताया कि इस बार उन्हें दशहरा मैदान में कारोबार के लिए छह दिन का समय मिल रहा है, लेकिन इसके लिए 30 हजार रुपए देने पड़े, जो काफी अधिक हैं।
उनका कहना है कि एसोसिएशन को सहमति केवल इसलिए दी गई थी कि पिछले वर्षों से चला आ रहा गुंडों और असामाजिक तत्वों का हस्तक्षेप खत्म होगा, रुपए भी पहले के मुकाबले कम देना होंगे, अब तो पांच हजार रुपए अधिक लिए गए, लेकिन वह समस्या पूरी तरह समाप्त नहीं हुई।
कई व्यापारियों के लाइसेंस रिन्यू नहीं हो पाए थे। दुकान आवंटन और निर्माण में देरी के कारण व्यापारी अपना माल लेकर मैदान में बैठे रहे। एसोसिएशन पदाधिकारी 30 हजार रुपए जमा कराने की बात पर अड़े रहे।
व्यापारियों का कहना है कि उन्होंने पटाखे खरीदने के लिए ब्याज पर कर्ज लिया है, यहां तक कि कुछ लोगों ने जेवर गिरवी रखकर कारोबार में पैसा लगाया है। ऐसे में दुकान मिलने में देरी और अतिरिक्त आर्थिक बोझ ने उनकी परेशानी बढ़ा दी है।
विस्फोटक अधिनियम की क्षमता का हिसाब किसके पास?
पटाखा बाजार का सबसे गंभीर पहलू विस्फोटक अधिनियम के तहत निर्धारित भंडारण क्षमता की निगरानी है। थोक और खेरची लाइसेंस में विस्फोटक सामग्री रखने की अधिकतम सीमा तय होती है।
इसके बावजूद आरोप है कि जिले में दुकानों और गोदामों पर वास्तविक भंडारण की मात्रा जांचने के लिए प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। व्यापारी कितना पटाखा रख सकता है और वास्तव में कितना स्टॉक मौजूद है, इसका सत्यापन किसने किया?
अधिकारियों से इस संबंध में स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पा रही है। सूत्रों का दावा है कि कुछ थोक और खेरची विक्रेताओं के यहां निर्धारित क्षमता से कई गुना अधिक पटाखे रखे गए हैं। हालांकि, इसकी पुष्टि के लिए प्रशासनिक निरीक्षण और स्टॉक का आधिकारिक रिकॉर्ड सामने आना जरूरी है।
विडंबना यह है कि प्रशासन और पुलिस कार्बाइड गन और फायर सेफ्टी की तलाश में सक्रिय दिखाई दे रहे हैं, लेकिन विस्फोटक लाइसेंस में निर्धारित भंडारण क्षमता का पालन हो रहा है या नहीं, इस पर कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई है।
मंगलवार शाम बांटे शेष लाइसेंस, कुल संख्या पर भी डाला पर्दा
मंगलवार शाम तहसीलदार और पटवारी द्वारा शेष लाइसेंसों का वितरण किया गया। इसके बावजूद कितने लाइसेंस रिन्यू हुए और कितने नए जारी किए गए, इसका स्पष्ट आंकड़ा सामने नहीं आया।
जानकारी के अनुसार दशहरा मैदान में 143 दुकानों का निर्माण हुआ है, लेकिन अधिकारियों से संपर्क नहीं होने के कारण आवंटित दुकानों और लाइसेंसधारियों की वास्तविक संख्या की पुष्टि नहीं हो सकी।
लाइसेंस जारी करने के बाद प्रशासन की असली जिम्मेदारी यह तय करने की है कि लाइसेंसधारी तय सीमा के भीतर ही विस्फोटक सामग्री रखे और दुकान तथा गोदाम सुरक्षा मानकों के अनुरूप संचालित हों।
खुलासा फर्स्ट के सवालों के बाद अधिकारी फोन उठाने से बच रहे?
मामले में संबंधित अधिकारियों से जांच और कार्रवाई की जानकारी लेने का प्रयास किया गया, लेकिन कई अधिकारियों ने फोन रिसीव नहीं किए।
एडीएम बोले- जांच के लिए निर्देश देकर रिपोर्ट लेता हूं...निर्धारित क्षमता से अधिक पटाखों के भंडारण के सवाल पर एडीएम नवजीवन पवार ने बताया कि इस संबंध में एसडीएम को निर्देश देकर जांच रिपोर्ट प्राप्त करेंगे।
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