कमिश्नर की जनसुनवाई में छलके बुजुर्गों के आंसू: त्योहार की रौनक के बीच भी नहीं थमी फरियादियों की कतार
KHULASA FIRST
संवाददाता

थानों से लेकर बड़े अफसरों तक चक्कर काटने के बाद 100 पीड़ित पहुंचे कमिश्नर संतोष सिंह के पास
किसी को धोखाधड़ी, तो किसी को मारपीट और सुनवाई नहीं होने की शिकायत
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
त्योहार सिर पर हैं, बाजारों में रौनक है और पुलिस महकमा भी सुरक्षा इंतजामों में व्यस्त है, लेकिन इन सबके बीच पुलिस कमिश्नर कार्यालय में कल फरियादियों की कतार कम नहीं हुई। छुट्टियों और त्योहार की तैयारियों के बीच भी 100 पीड़ित अपनी अलग-अलग पीड़ा लेकर पुलिस कमिश्नर संतोष कुमार सिंह के सामने पहुंचे।
किसी को अपनों से प्रताड़ना की शिकायत थी तो कोई जमीन और प्लॉट की धोखाधड़ी से परेशान था। किसी के साथ मारपीट हुई थी तो कोई थाने के चक्कर काटने के बाद भी सुनवाई नहीं होने से निराश था।
जनसुनवाई में इस बार सबसे ज्यादा ध्यान बुजुर्ग फरियादियों ने खींचा। कई बुजुर्ग ऐसे थे, जो दूसरी और तीसरी बार अपनी शिकायत लेकर पहुंचे थे। अपनी परेशानी बताते-बताते कुछ इस कदर भावुक हुए कि कमिश्नर के सामने ही उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। उन्होंने अधिकारियों से गुहार लगाई कि आखिर उनकी शिकायत पर कार्रवाई कब होगी?
कल जनसुनवाई में 100 आवेदन पहुंचे। पिछली जनसुनवाई के मुकाबले संख्या करीब 35 कम रही, लेकिन त्योहार नजदीक होने के कारण उम्मीद थी कि इस बार फरियादियों की संख्या कम रह सकती है, पर सुबह से ही आवेदकों के पहुंचने का सिलसिला जारी रहा।
कुछ देर में फरियादियों की मौजूदगी बढ़ती गई और संख्या 100 तक पहुंच गई। इससे साफ था कि त्योहार के बावजूद लोगों की पुलिस से जुड़ी समस्याएं और न्याय की उम्मीदें अपनी जगह कायम रहीं।
हालांकि पुलिस कमिश्नर संतोष कुमार सिंह ने एक-एक फरियादी की बात सुनी। बुजुर्गों की पीड़ा सामने आने पर उन्होंने तत्काल अपने साथ मौजूद एसीपी स्तर के अधिकारियों को संबंधित मामलों में कार्रवाई करने और शिकायतों का जल्द निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
बुजुर्गों की पीड़ा ने खींचा ध्यान
इस बार जनसुनवाई में बुजुर्गों की संख्या भी उल्लेखनीय रही। कोई संपत्ति से जुड़ी धोखाधड़ी का शिकार होने की शिकायत लेकर पहुंचा था तो किसी ने मारपीट और प्रताड़ना की बात रखी। कुछ बुजुर्गों का कहना था कि वे पहले भी अपनी समस्या अधिकारियों के सामने रख चुके हैं, लेकिन अब तक उन्हें राहत नहीं मिली।
बार-बार चक्कर लगाने के बाद भी जब समस्या जस की तस रही तो वे दोबारा कमिश्नर के सामने पहुंच गए। अपनी बात रखते समय कई बुजुर्ग भावुक हो गए। यहां तक कि एक बुजुर्ग ने अपने आवेदन में सुनवाई नहीं होने के कारण अपनी आत्महत्या तक कि तारीख तक आवेदन में लिख दी।
उनकी आंखों में आंसू देखकर जनसुनवाई में मौजूद अधिकारियों ने भी शिकायतों को गंभीरता से लिया। कमिश्नर ने मौके पर मौजूद एसीपी, डीसीपी स्तर के अधिकारियों को संबंधित मामलों में तत्काल आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।
थाने से निराश, अब कमिश्नर से आस
जनसुनवाई में पहुंचे कई आवेदकों की शिकायतों के पीछे एक बड़ी वजह थाना स्तर पर सुनवाई नहीं होना भी सामने आई। पीड़ितों का कहना था कि वे पहले ही संबंधित थानों में शिकायत कर चुके हैं।
किसी को सप्ताहभर से जवाब का इंतजार है तो कोई महीनेभर से कार्रवाई की उम्मीद लगाए बैठा है। इसके बावजूद उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ। ऐसे में उन्हें वरिष्ठ अधिकारियों के पास पहुंचना पड़ रहा है।
इन शिकायतों का रहा ज्यादा दबाव
जनसुनवाई में कुल 100 आवेदन में पति-पत्नी के विवाद, बेटा-बहू द्वारा परेशान करने, रिश्तेदारों व पड़ोसियों से विवाद जैसे मामले प्रमुख रहे। पैसों के लेन-देन, फाइनेंशियल फ्रॉड, लोन दिलाने के नाम पर धोखाधड़ी, प्लॉट-मकान और जमीन की धोखाधड़ी से जुड़ी शिकायतें भी सामने आईं।
महिला अपराध, स्कूल में प्रवेश और डॉक्टर से इलाज संबंधी विवाद तथा पुलिस थानों पर सुनवाई नहीं होने की शिकायतें भी आवेदकों ने रखीं।
फोन पर भी दिए निर्देश, मध्यस्थता पर जोर.. कमिश्नर संतोष कुमार सिंह ने समस्याएं सुनने के साथ ही अधिकारियों को मौके पर और फोन के माध्यम से भी आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने प्रभावी कार्रवाई कर शिकायतें हल करने को कहा।
जनसुनवाई में अतिरिक्त पुलिस आयुक्त मयंक अवस्थी सहित सभी जोन के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। पारिवारिक और आपसी विवादों के मामलों में पुलिस मध्यस्थता केंद्रों के जरिए काउंसलिंग कराकर भी समाधान के प्रयास किए जा रहे हैं।
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