AI से बनाए सरकारी अफसरों के फर्जी वीडियो वायरल: सरकारी कामकाज और राष्ट्रीय प्रतीकों से जुड़े भ्रामक वीडियो सोशल मीडिया पर किए पोस्ट
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक का दुरुपयोग कर सरकारी अधिकारियों और शासकीय संस्थाओं से जुड़े फर्जी वीडियो तैयार करने का मामला इंदौर में सामने आया है। सोशल मीडिया पर AI की मदद से बनाए गए इन वीडियो को वायरल करने के आरोप में पंढरीनाथ थाना पुलिस ने कृषि क्रांति नाम से संचालित सोशल मीडिया पेज के एडमिन के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। यह कार्रवाई कृषि विभाग के उप संचालक की शिकायत पर की गई है।
आरोप है कि सोशल मीडिया पेज के एडमिन ने AI टूल्स का इस्तेमाल कर शासकीय अधिकारियों, कर्मचारियों, सरकारी कार्यालयों और उनकी कार्यप्रणाली से जुड़े भ्रामक, आपत्तिजनक और मानहानिकारक वीडियो तैयार किए। इतना ही नहीं, वीडियो में वास्तविक अधिकारियों से मिलते-जुलते चेहरे भी डीपफेक तकनीक के जरिए तैयार किए गए। इसके बाद इन वीडियो को फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपलोड कर प्रसारित किया गया।
कृषि विभाग के उप संचालक ने दर्ज कराई शिकायत
पुलिस के मुताबिक, कलेक्ट्रेट स्थित कार्यालय उप संचालक कृषि किसान कल्याण तथा कृषि विकास के अधिकारी संदीप यादव ने इस मामले में शिकायत की है। उन्होंने पुलिस को बताया कि फेसबुक और इंस्टाग्राम पर कृषि क्रांति नाम से एक सोशल मीडिया पेज संचालित किया जा रहा है। इस पेज के माध्यम से AI तकनीक से तैयार किए गए ऐसे वीडियो प्रसारित किए गए, जिनमें सरकारी अधिकारियों और शासकीय व्यवस्था को लेकर गलत और भ्रामक संदेश दिए गए।
शिकायत में बताया गया कि वीडियो में अधिकारियों के चेहरों से मिलते-जुलते डिजिटल चेहरे तैयार किए गए। इस तरह वास्तविक व्यक्तियों की छवि का इस्तेमाल कर ऐसे दृश्य बनाए गए, जिनका वास्तविक घटनाओं या सरकारी कामकाज से कोई संबंध नहीं है।
कृषि विभाग ने वीडियो से जताई असहमति
शिकायतकर्ता अधिकारी के अनुसार, सोशल मीडिया पर प्रसारित किए जा रहे इन वीडियो का कृषि विभाग की वास्तविक कार्यप्रणाली, अधिकारियों या विभागीय गतिविधियों से कोई लेना-देना नहीं है। इसके बावजूद वीडियो इस तरह तैयार और प्रसारित किए गए कि देखने वालों के बीच सरकारी कामकाज को लेकर भ्रम पैदा हो सकता है।
विभाग की ओर से इन वीडियो को भ्रामक, आपत्तिजनक और मानहानिकारक बताते हुए कार्रवाई की मांग की गई। शिकायत में यह भी आशंका जताई गई कि इस तरह की सामग्री से शासकीय संस्थाओं की छवि और विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है।
राष्ट्रीय प्रतीकों से जुड़ी सामग्री भी जांच के दायरे में
मामले में केवल अधिकारियों के चेहरों और सरकारी कार्यालयों से जुड़े वीडियो ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय प्रतीकों से संबंधित सामग्री तैयार किए जाने का आरोप भी सामने आया है। पुलिस को दी गई शिकायत में इन वीडियो की प्रकृति और उनके प्रसार की जांच करने की मांग की गई है।
जांच में यह पता लगाया जाएगा कि वीडियो किस AI टूल की मदद से बनाए गए, उन्हें किसने तैयार किया और सोशल मीडिया पर अपलोड करने के पीछे क्या उद्देश्य था।
IP एड्रेस और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच की मांग
शिकायत में पुलिस से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध वीडियो के URL, डिजिटल रिकॉर्ड, IP लॉग्स और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की तकनीकी जांच कराने की मांग की गई है। इसके जरिए वीडियो तैयार करने और अपलोड करने वाले व्यक्ति की पहचान के साथ ही यह भी पता लगाने की कोशिश होगी कि सामग्री को किन-किन सोशल मीडिया अकाउंट्स के माध्यम से प्रसारित किया गया। पुलिस डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर वीडियो के निर्माण, अपलोडिंग और प्रसार से जुड़ी जानकारी जुटाएगी।
BNS और IT एक्ट की धाराओं में केस दर्ज
पंढरीनाथ थाना पुलिस ने कृषि विभाग के उप संचालक की शिकायत के आधार पर कृषि क्रांति सोशल मीडिया पेज के एडमिन के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 356(1) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act 2000) की धारा 66C और 66D के तहत एफआईआर दर्ज की है।
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