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हिंदुओ पर ही दिखाएंगे मर्दानगी: भाजपा के निशाने पर हिंदू; अपने ही ‘कोर वोटर्स’ का सोशल मीडिया पर भड़का गुस्सा

KHULASA FIRST

संवाददाता

29 मई 2026, 2:10 pm
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हिंदुओ पर ही दिखाएंगे मर्दानगी

लोग टूट जाते हैं एक घर बनाने में, तुम तरस नहीं खाते बस्तियां जलाने में।

बशीर बद्र की ये लाइनें छावनी में हुई नगर निगम की वैध मकान-दुकानों को तोड़ने की कार्रवाई पर सटीक बैठती हैं

जिंसी-छावनी की कार्रवाई के बाद बढ़ता जा रहा भाजपा के खिलाफ ‘भाजपाई शहर’ में गुस्सा

पहले स्मार्ट सिटी, अब मास्टर प्लान के नाम पर सिर्फ हिंदुओं को ही निशाना बनाने पर जबरदस्त रोष

कट्टर भाजपाई गढ़ क्षेत्र के रहवासियों व हिंदू संगठनों से जुड़े सोशल मीडिया ग्रुप पर प्रदेश सरकार और निगम के खिलाफ खुलेआम आक्रोश

वाट्सएप ग्रुप्स पर मोहन सरकार को चैलेंज- दम है तो 25 साल से अटकी चंदन नगर से एयरपोर्ट रोड बनाकर दिखाओ

मकान, दुकान तोड़ने, ड्रिंक ड्राइव, हेलमेट के नाम पर पुलिस जांच, गुंडागर्दी, प्लॉट/मकान पर कब्जे, टैक्स बढ़ोतरी ‘अपने वोटर्स’ पर

सोशल मीडिया पर दिए जा रहे योगी, हेमंता, धामी, शुभेंदु अधिकारी के उदाहरण कि इनसे सीखें हिंदूहित में कामकाज

नितिन मोहन शर्मा 94250-56033 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
जिसका डर था, वो अब कम से कम इंदौर में तो घटने लगा है। भाजपा के खिलाफ अब उसके ही कट्टर वोटर्स होने लगे हैं। अभी ये खिलाफत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ही नजर आ रही है, लेकिन जिस तरह की मुखरता कमलदल के प्रति ‘कमल प्रेमी’ प्रकट कर रहे हैं, वह एकछत्र सूबे में व इंदौर नगर निगम में राज कर रही भाजपा के लिए खतरे की घंटी है।

खतरे की घंटी इसलिए कि ये खिलाफत प्रतिपक्ष, यानी कांग्रेस के समर्थकों की नहीं, बल्कि ये कट्टर हिंदू वोट बैंक इलाकों से होती हुई हिंदू संगठनों के सोशल मीडिया ग्रुप्स में बेखौफ गूंज रही है। वाट्सएप व फेसबुक इसका माध्यम बने हुए हैं।

छावनी-जिंसी में लगे बैनर-पोस्टर भी इसका उदाहरण हैं। इन्हें लगाने वाले मौजूदा भाजपा के ही सक्रिय पदाधिकारी, कार्यकर्ता परिवार हैं। सोशल मीडिया पर तो भाजपा पर अपने ही कोर ‘हिंदू वोटर्स’ को सताने का आरोप प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस वक्तव्य के हवाले से लग रहा है, जिसमें उन्होंने कहा था- लंबे समय तक सत्ता में रहने के कारण नेता जमीनी हकीकत से दूर हो जाते हैं।

सा री मर्दानगी हिंदुओं पर ही दिखाओगे? दम है तो 25 साल से अटकी हुई चंदन नगर से एयरपोर्ट तक की सड़क बनाकर दिखाओ, वरना अगली बार हिंदुत्व, भाषण, मंच व नारे और भावनाओं के सहारे वोट मांगने मत आना, क्योंकि अब जनता पूछेगी कि वोट मांगते वक्त हिंदू याद आता है, लेकिन विकास के समय सिर्फ हिंदुओं की ही बलि क्यों ली जाती है? इंदौर की जनता अब ‘थोड़े बहुत’ से संतुष्ट नहीं होने वाली।

छावनी में नगर निगम के बुलडोजरों ने जिस तरह का आतंक मचाया, उसने साफ कर दिया कि सरकार हिंदुओं के घर पर तो ताकत दिखा सकती है, लेकिन 25 साल पुरानी चंदन नगर से एयरपोर्ट रोड वाली अधूरी योजनाओं पर उसकी हिम्मत जवाब दे जाती है।

सारी मर्दानगी हिंदुओं पर ही दिखाना है। प्लॉट पर कब्जे करो, लोगों के मकान तोड़ो, टैक्स बढ़ाओ, अनाप-शनाप बिजली के बिल, गुंडागर्दी, हेलमेट के नाम पर परेशान करना, लूटना।

इंदौर में तो नेताओं ने हद कर दी। इन्हें ईमानदार नागरिकों को आए दिन सताने, सड़क पर लाने में मजा आ रहा है। मोदीजी ने सही बोला था कि ‘लंबे समय से सत्ता में रहने पर जमीनी हकीकत नजर नहीं आती।’

ये खरी-खरी व तल्ख बयानबाजी प्रदेश की भाजपा सरकार, इंदौर नगर निगम, इंदौर के भाजपा नेताओं और जनप्रतिनिधियों के प्रति उस इंदौर की है, जिसे ‘भाजपाई शहर’ कहा जाता है।

उसी भाजपाई शहर के बाशिंदों का गुस्सा अब ‘अपनी ही भाजपा’ पर फूट पड़ा है। गुस्से का कारण बनी है छावनी व जिंसी क्षेत्र में मास्टर प्लान के नाम पर हुई भारी तोड़फोड़।

गुस्से का माध्यम बना है सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म वाट्सएप, फेसबुक आदि। हैरत की बात तो ये है कि ये गुस्सा उन रहवासी क्षेत्रों के ग्रुप्स पर फूट रहा है, जिन्हें शहर में कट्टर भाजपाई गढ़ कहा जाता है।

इनमें रामबाग से लेकर राजेंद्र नगर तक जैसी शहर की बरसों पुरानी बसाहट के क्षेत्र शामिल हैं। गुस्सा प्रकट करने वाले समुदाय का ‘डीएनए’ भाजपा से मेल खाता है और इनमें हिंदू संगठनों से जुड़े ग्रुप्स व लोग भी हैं।

भाजपा के अपने ही समर्थकों के मन में जमा लावा जैसे छावनी-जिंसी की कार्रवाई के बाद फूट पड़ा है। केंद्र में हिंदुत्व को रखते हुए पार्टी के कोर वोटर्स, पार्टी की रीति-नीति को ही अब आड़े हाथों ले रहे हैं कि वोट लेते समय ये दल के नेता हिंदू की बात करते हैं और फिर सत्ता में आने के बाद अपने कोर वोटर्स को पुलिस प्रशासन व अफसरों के हवाले कर देते हैं, सताने के लिए।

कभी हेलमेट के नाम पर पुलिस लूट रही है, तो कभी गुंडे नाक में दम कर रहे हैं। प्लॉट, मकान, दुकान पर जब चाहे तब कब्जे हो रहे हैं। गुंडागर्दी चरम पर है। ईमानदारी से जीवन जीने वालों को तो नेताओं ने चुनाव जीतने के बाद लावारिस छोड़ दिया।

मर्जी आए तब टैक्स लाद दिया। चाहे जब बिजली काटना, नक्शा पास करने में वसूली, पार्षदों की लूट जैसे मुद्दे भी अब सोशल मीडिया पर मुखरता से वो ही तबका उठा रहा है, जो एकछत्र भाजपाई राज स्थापित करने में सबसे आगे है। छावनी के बाद ये ही वर्ग सरकार को चैलेंज कर रहा है कि है 25-30 साल से सत्ता में होने के बाद भी कोई माई का लाल, जो चंदन नगर से आगे सड़क बना दे..?

नायबसिंह सैनी के साथ मुख्यमंत्री की तुलना...सोशल मीडिया पर हमारे मुख्यमंत्री की तुलना हरियाणा के मुख्यमंत्री नायबसिंह सैनी, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल, छत्तीसगढ़ के विष्णुदेव, गुजरात के भूपेंद्र पटेल और ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी के साथ की जा रही है।

इन मुख्यमंत्रियों के विषय में लिखा जा रहा है कि ये सब के सब सिर्फ कुर्सी संभालते दिख रहे हैं, जमीन पर आग बनकर उतरते नहीं, जबकि योगी आदित्यनाथ, हेमंत विश्वकर्मा, पुष्करसिंह धामी, रेखा गुप्ता और अब शुभेंदु अधिकारी ने बताया दिया कि कानून सिर्फ किताबों का हिस्सा नहीं, सड़क पर भी दिखाई देना चाहिए।

हमारे मुख्यमंत्री को ये ‘ठंडे गार’ होने का तंज हिंदुत्व के दम पर सत्ता में आने के नाम पर मिला है कि ये हिंदुओं के वोट से बने सीएम नजर ही नहीं आते।

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