अबकी बारी, शुभेंदु अधिकारी: गंगोत्री से गंगासागर तक आया उत्सव का दिन
KHULASA FIRST
संवाददाता

आजादी के बाद पहली बार बंगाल में भाजपा की सरकार, कोलकाता की सड़कों पर उमड़ा सैलाब
बंगाल में आज से शुभेंदु युग का आगाज, भाजपा के पहले मुख्यमंत्री के रूप में अधिकारी ने ली शपथ
प्रधानमंत्री मोदी, गृहमंत्री शाह, योगी के अलावा 21 राज्यों के मुख्यमंत्री पहुंचे कोलकाता, शपथ समारोह के बने साक्षी
बंगाल के शहरों, गांव, गली, कस्बों से कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड तक उत्सव का माहौल, जय बांग्ला-जय सियाराम की गूंज
गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती के जरिये बंगाल अस्मिता से जुड़ा भाजपा का राज्यारोहण, सिंहासन पर आए शुभेंदु दादा
बंगाल में त्योहार, तमिलनाडु में पसरा सन्नाटा, विजय की ताजपोशी पर सस्पेंस बरकरार, केरल में भी इंतजार
नितिन मोहन शर्मा 94250-56033 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
सूबे के गांव, कस्बों, शहरों से लेकर कोलकाता की गलियों से होते हुए शपथ समारोह स्थल ब्रिगेड परेड ग्राउंड तक उत्सव-उल्लास-त्योहार पसरा हुआ है। कोलकाता की सड़कों पर जनसैलाब उमड़ा हुआ है।
नजारा किसी उत्सव से भी बढ़कर नजर आ रहा है। उत्सव का ये दिन भाजपा के लिए गंगोत्री से गंगासागर तक आया है। इस उत्सव का साक्षी बनने बंग भूमि पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर देश के 21 राज्यों के मुख्यमंत्री पहुंचे।
गृहमंत्री अमित शाह ने तो कोलकाता में एक दिन पहले से ही डेरा डाल रखा है। आखिर इस इतिहास को रचने वाली तारीख के वे अहम किरदार जो हैं।
बंगाल में शनिवार का सूरज एक नई शुरुआत, नई इबारत, नई उम्मीद, नए स्वप्न लेकर आया। आजादी के बाद से पहली बार सूबे में सनातन धर्म-संस्कृति व परंपराओं से जुड़े दल की सरकार बनने जा रही है। इतिहासकारों की मानें तो हिंदुत्व से जुड़ा ये शासन, सत्ता, सरकार करीब 800 साल बाद बंगाल में आ रहा है।
खिलजी के दौर के बाद से बंगाल एक तरह से सनातन की मूल परंपरा से दूर था। आजादी के बाद भी यहां पर हिंदुत्व की बयार नहीं बह पाई। पहले धर्मनिरपेक्ष के मूलमंत्र वाली कांग्रेस, फिर धर्म को अफीम मानने वाली साम्यवादी-वामपंथी विचारधारा का राज आया।
ममता बनर्जी के रूप में बदलाव की एक बयार 15 बरस पहले सूबे में एक नई उम्मीद लेकर आई, लेकिन उनका राज भी ‘हंसिया-बाली’ के राज के अनुरूप ढल गया। नतीजे में भद्रलोक कहे जाने वाले बंगाली जनमानस की छटपटाहट बढ़ गई और वह 2026 के चुनावों में नतीजे के रूप में सामने आ गई।
दशकों की साधना, संघर्ष व बलिदान के बाद राज्य में कमल खिल गया। हिंदुत्व के नारे के साथ भाजपा ने अपने पितृपुरुष श्यामाप्रसाद मुखर्जी के स्वप्न को साकार कर दिया।
इस स्वप्न को साकार होते देखने के लिए एक तरह से देशभर का समूचा भाजपा का नेतृत्व बंगाल की धरा पर पहुंचा। हर राज्य के प्रतिनिधि शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए। प्रधानमंत्री मोदी भी खुले वाहन में सवार हो शपथ ग्रहण समारोह में पहुंचे।
तय समय से पहले ही मोदी का विमान भी कोलकाता सुबह 10.20 बजे पहुंच गया। समारोह स्थल पर भी वे तय समय 11 बजे के पहले ही पहुंच गए। इसके अलावा भाजपा व एनडीए शासित 21 राज्यों के मुख्यमंत्री भी शुभेंदु अधिकारी के शपथ समारोह में शामिल हुए। इनमें मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी थे।
रवींद्र नाथ टैगोर की जयंती के अवसर पर गूंजते रवींद्र संगीत के बीच शपथ ग्रहण समारोह स्थल का नजारा जय-जय सियाराम के गगनभेदी नारों से गूंज रहा था। कोलकाता की सड़कों पर भीड़ ऐसी उमड़ी कि नए चुने गए कई विधायक भी रास्तों में फंस गए और परेड ग्राउंड तक नहीं पहुंच पाए।
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, गृहमंत्री अमित शाह, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ, महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस सहित एक हजार से ज्यादा अतिविशिष्ट अतिथि भाजपा के इस ऐतिहासिक पल में शामिल हुए।
देश की चुनावी राजनीति के लिहाज से सबसे दुर्गम किले के रूप में भाजपा ने पश्चिम बंगाल को फतह कर लिया। कमलदल के लिए 4 मई की तारीख शुभ घड़ी लेकर आई तो 9 मई शुभेंदु को लेकर सामने आई। जी हां, बंगाल में आज से जन-जन में दादा के नाम से लोकप्रिय शुभेंदु अधिकारी का राज्यारोहण हो गया।
भाजपा ने गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती पर इतिहास रच दिया। दशकों के संघर्ष के बाद पहली बार बंगाल में भाजपा की सरकार बन गई।
वह भी प्रचंड विजय व बहुमत के साथ। गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की विशाल तस्वीर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पुष्प अर्पित कर राज्य में शुभेंदुराज का उदय कराया।
तमिलनाडु में ‘विजय’राज पर फिर गहराया सस्पेंस केरल में इंतजार
एक तरफ पश्चिम बंगाल में उत्सव उल्लास का नजारा था, तो तमिलनाडु में सन्नाटा पसरा हुआ है। परिणाम आने के 5 दिन बाद भी तमिलनाडु में सरकार बनने के आसार नहीं बन पाए। तमिल सुपरस्टार विजय थलापति नायक से जननायक बन नहीं पा रहे।
शुक्रवार को तीसरी बार राज्यपाल से मिलने के बाद भी उन्हें सरकार बनाने के लिए आमंत्रित नहीं किया गया। बताते हैं कि बहुमत के 118 आंकड़े से विजय महज 2 अंक से अब भी पीछे हैं। लिहाजा बंगाल के साथ-साथ 9 मई को तमिलनाडु में भी नई सरकार बनते-बनते रुक गई।
ये ही हाल केरल में हैं। इस राज्य में बहुमत का तो अड़ंगा नहीं है, लेकिन कांग्रेस के ही नेताओं का अहम आड़े आ गया है। सीएम पद की दावेदारी पर तीन-तीन नेताओं की आमद ने केरलम में नई सरकार के मामले में इंतजार लिख दिया है, जबकि 9 मई का दिन यहां भी सरकार बनाने के लिए तय था, लेकिन उत्सव सिर्फ भाजपा के हिस्से में बंगाल में मन रहा है और दक्षिण के इन दोनों राज्यों में सन्नाटा पसरा हुआ है।
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