मध्य प्रदेश के इस अफसर को मिली बड़ी जिम्मेदारी: पहली बार किसी भारतीय को मिला यह अहम वैश्विक पद
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, नई दिल्ली।
भारत ने अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सुरक्षा के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। मध्य प्रदेश कैडर के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी विवेक अग्रवाल को फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स ( एफएटीएफ ) का उपाध्यक्ष चुना गया है।
एफएटीएफ के शीर्ष नेतृत्व में पहुंचने वाले वे पहले भारतीय अधिकारी बन गए हैं। विदेश मंत्रालय ने इसे भारत के बढ़ते वैश्विक प्रभाव और वित्तीय अपराधों के खिलाफ उसकी मजबूत प्रतिबद्धता की महत्वपूर्ण मान्यता बताया है।
एफएटीएफ इन गतिविधियों पर रखती है नजर
एफएटीएफ दुनिया की सबसे प्रभावशाली संस्थाओं में से एक है, जो मनी लॉन्ड्रिंग, आतंकवाद के वित्तपोषण और सामूहिक विनाश के हथियारों के प्रसार के लिए होने वाली फंडिंग पर निगरानी रखती है। इसके मानकों और सिफारिशों को दुनिया के 200 से अधिक देश और अधिकार क्षेत्र अपनाते हैं।
भारत के लिए क्यों अहम है यह नियुक्ति?
विवेक अग्रवाल की नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब भारत डिजिटल भुगतान, फिनटेक नवाचार, वर्चुअल एसेट्स और वित्तीय सुरक्षा के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की भूमिका निभा रहा है।
देश की आवाज अब और मजबूत होगी
एफएटीएफ के उपाध्यक्ष के रूप में भारत अब उन अंतरराष्ट्रीय नीतियों को आकार देने में और अधिक प्रभावी भूमिका निभाएगा, जिनका संबंध वित्तीय अपराधों और आतंकवाद की फंडिंग पर रोक लगाने से है।
विशेषज्ञों का मानना है कि क्रिप्टोकरेंसी, डिजिटल ट्रांजैक्शन और सीमा पार वित्तीय अपराधों जैसी उभरती चुनौतियों पर भारत की आवाज अब और मजबूत होगी।
एफएटीएफ में पहले भी निभा चुके हैं महत्वपूर्ण भूमिका
1994 बैच के मध्य प्रदेश कैडर के आईएएस अधिकारी विवेक अग्रवाल वर्तमान में भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय में सचिव हैं। इससे पहले वे वित्त मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव और फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट-इंडिया ( एफआईयू-आईएनडी) के निदेशक रह चुके हैं।
वे एफएटीएफ में भारत के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व भी कर चुके हैं। वर्ष 2024 में जारी भारत की म्यूचुअल इवैल्यूएशन रिपोर्ट के दौरान उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उस रिपोर्ट में एफएटीएफ ने भारत के एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद विरोधी वित्तीय ढांचे की सराहना की थी।
विदेश मंत्रालय ने बताया ऐतिहासिक उपलब्धि
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस नियुक्ति को भारत की बड़ी कूटनीतिक और संस्थागत सफलता बताया। उन्होंने कहा कि विवेक अग्रवाल का अनुभव और विशेषज्ञता एफएटीएफ के कामकाज को नई दिशा देने में मदद करेगी।
'जीरो टॉलरेंस' नीति को मिलेगी मजबूती
मंत्रालय ने कहा कि यह नियुक्ति वैश्विक स्तर पर भारत के प्रति बढ़े विश्वास का प्रमाण है और आतंकवाद के खिलाफ भारत की 'जीरो टॉलरेंस' नीति को और मजबूती प्रदान करेगी।
विवेक अग्रवाल बोले- यह पूरे भारत का सम्मान
नियुक्ति पर प्रतिक्रिया देते हुए विवेक अग्रवाल ने कहा कि यह सम्मान केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि भारत के मजबूत एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद-रोधी वित्तीय तंत्र की वैश्विक पहचान है।
उन्होंने कहा कि एफएटीएफ के वैश्विक नेटवर्क के साथ मिलकर अंतरराष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और समावेशी बनाने की दिशा में काम करना उनके लिए गर्व की बात होगी।
मध्य प्रदेश से लेकर केंद्र तक निभाईं कई अहम जिम्मेदारियां
विवेक अग्रवाल का प्रशासनिक अनुभव तीन दशकों से अधिक का है। उन्होंने मध्य प्रदेश, पंजाब और केंद्र सरकार में कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है। वे इंदौर, उज्जैन, राजगढ़ और कपूरथला के कलेक्टर रह चुके हैं।
इसके अलावा मुख्यमंत्री सचिवालय, मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन, एमपी रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन, एमपी अर्बन डेवलपमेंट कंपनी और कृषि मंत्रालय में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं।
इंदौर में कई महत्वाकांक्षी योजनाओं की नींव रखी
इंदौर में उनके कार्यकाल के दौरान अटल इंदौर सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विस, सुपर कॉरिडोर, क्रिस्टल आईटी पार्क, इंदौर बीआरटीएस, इंदौर एसईजेड और मेट्रो परियोजना जैसी कई महत्वाकांक्षी योजनाओं की नींव रखी गई।
एफएटीएफ क्या है?
फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स ( एफएटीएफ ) की स्थापना वर्ष 1989 में की गई थी। यह एक अंतर-सरकारी संस्था है, जो मनी लॉन्ड्रिंग, आतंकवाद के वित्तपोषण और अन्य वित्तीय अपराधों पर रोक लगाने के लिए वैश्विक मानक तय करती है।
एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट और ब्लैक लिस्ट में शामिल देशों को अंतरराष्ट्रीय निवेश, कर्ज और वित्तीय लेन-देन में गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। यही कारण है कि एफएटीएफ के निर्णयों और सिफारिशों को पूरी दुनिया में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
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