निगम के इस पूर्व बेलदार को हाईकोर्ट से बड़ा झटका: इतने करोड़ के जेवर से हाथ धोना पड़ सकता है; फिलहाल लोकायुक्त की कस्टडी में ही रहेंगे
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
आय से अधिक संपत्ति मामले में फंसे इंदौर नगर निगम के पूर्व बेलदार मोहम्मद असलम खान को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। हाईकोर्ट ने जिला अदालत के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें असलम खान के परिवार के नाम से जब्त की गई करोड़ों रुपए की सोने की ज्वेलरी को 70 लाख रुपए की गारंटी पर वापस करने के निर्देश दिए गए थे। हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि जब्त ज्वेलरी फिलहाल लोकायुक्त की कस्टडी में ही रखी जाएगी।
आय से अधिक संपत्ति की शिकायत
मामला वर्ष 2018 में हुई लोकायुक्त कार्रवाई से जुड़ा है। नगर निगम की रिमूवल शाखा में बेलदार के पद पर कार्यरत मोहम्मद असलम खान के ठिकानों पर लोकायुक्त ने आय से अधिक संपत्ति की शिकायत के आधार पर छापा मारा था। छापे के दौरान असलम खान के पास मिली संपत्ति और सोने-चांदी के आभूषण देखकर जांच अधिकारी भी हैरान रह गए थे।
छापे में मिली थी करोड़ों की संपत्ति
लोकायुक्त की कार्रवाई में असलम खान के यहां से बड़ी मात्रा में सोने के आभूषण, सोने के बिस्किट, नकदी और संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज बरामद किए गए थे। जांच के दौरान करीब दो किलो सोने की ज्वेलरी, लगभग एक किलो सोने के बार, चांदी, 25 लाख रुपए नकद और कई संपत्तियों के दस्तावेज मिलने की बात सामने आई थी। छापे के समय बरामद संपत्ति का अनुमानित मूल्य करीब 4 करोड़ 40 लाख रुपए बताया गया था, जबकि जांच एजेंसियों के अनुसार बाजार मूल्य इससे कई गुना अधिक था।
परिवार के नाम की ज्वेलरी को लेकर विवाद
मोहम्मद असलम खान, पिता अफजल खान, निवासी अशोका कॉलोनी, माणिक बाग रोड, इंदौर ने अदालत में आवेदन देकर कहा था कि लोकायुक्त छापे के दौरान उसके परिवार के उन सदस्यों की ज्वेलरी भी जब्त कर ली गई थी, जो मामले में आरोपी नहीं हैं।
आवेदन में बताया गया कि उसकी पुत्रियों सिदरा खान, राहेमीन खान और अलिस्बा खान तथा उसकी मां बिलकिस खान के नाम की ज्वेलरी भी जब्त की गई थी। परिवार की ओर से तर्क दिया गया कि जब ये लोग मामले में आरोपी नहीं हैं, तो उनकी ज्वेलरी वापस की जानी चाहिए। छापे के समय इस ज्वेलरी की कीमत करीब 58 लाख रुपए आंकी गई थी, लेकिन सोने के दाम बढ़ने के कारण वर्तमान बाजार मूल्य 3 करोड़ रुपए से अधिक बताया जा रहा है।
जिला कोर्ट ने 70 लाख की गारंटी पर लौटाने का दिया था आदेश
जिला अदालत ने परिवार की याचिका पर सुनवाई करते हुए लोकायुक्त को निर्देश दिया था कि 70 लाख रुपए की गारंटी लेने के बाद ज्वेलरी वापस की जा सकती है। अदालत ने ज्वेलरी के उपयोग को लेकर शर्तें भी तय की थीं। इसके अनुसार ज्वेलरी को बेचा नहीं जा सकेगा, उसमें कोई बदलाव नहीं किया जा सकेगा और जरूरत पड़ने पर अदालत या जांच एजेंसी के सामने दोबारा प्रस्तुत करना होगा।
लोकायुक्त ने हाईकोर्ट में दी चुनौती
जिला अदालत के आदेश के खिलाफ लोकायुक्त इंदौर ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। लोकायुक्त की ओर से तर्क दिया गया कि मामला अभी विचाराधीन है और गंभीर आरोपों की जांच चल रही है। ऐसे समय में जब्त संपत्ति को वापस करना उचित नहीं होगा। लोकायुक्त ने इस मामले में बिलकिस खान और राहेला खान को भी पक्षकार बनाया था।
हाईकोर्ट ने लोकायुक्त की दलीलों को देखते हुए जिला अदालत के आदेश पर रोक लगा दी और निर्देश दिया कि ज्वेलरी फिलहाल लोकायुक्त की कस्टडी में ही रहेगी। अदालत ने सभी पक्षों से जवाब मांगा है और मामले में अंतिम सुनवाई की जाएगी।
एक किलो सोने के बार भी नहीं होंगे वापस
असलम खान के यहां से बरामद करीब एक किलो वजन के 12 सोने के बार को वापस करने से जिला अदालत पहले ही इनकार कर चुकी थी। अदालत ने माना था कि यह संपत्ति कथित अवैध आय से खरीदी गई हो सकती है। इन सोने के बार की वर्तमान कीमत डेढ़ करोड़ रुपए से अधिक बताई जा रही है।
वेतन से 1216 प्रतिशत अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप
लोकायुक्त जांच में सामने आया था कि असलम खान का मासिक वेतन करीब 18 हजार रुपए था, लेकिन उसके पास उसकी ज्ञात आय से कई गुना अधिक संपत्ति मिली। जांच एजेंसी के अनुसार असलम खान ने अपनी आय से करीब 1216 प्रतिशत अधिक संपत्ति अर्जित की थी। आयकर विभाग की बेनामी संपत्ति शाखा और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी इस मामले में कार्रवाई की थी।
लोकायुक्त छापे में बरामद प्रमुख सामान
लोकायुक्त कार्रवाई के दौरान सामने आई संपत्तियों और सामान में शामिल थे- करीब 25 लाख रुपए नकद। लगभग दो किलो सोना और एक किलो चांदी। एक किलो सोने के बिस्किट।छह बैंक खाते। 21 संपत्तियों के दस्तावेज। नगर निगम से संबंधित कई फाइलें। दो कार, एक जीप और एक बुलेट। करीब 1.60 लाख रुपए कीमत के पांच बकरे।
संपत्तियों की लंबी सूची आई थी सामने
जांच में असलम खान और उसके परिवार से जुड़ी कई संपत्तियों की जानकारी सामने आई थी। इनमें देवास जिले के कमलापुर में 1.07 हेक्टेयर और 0.93 हेक्टेयर जमीन, जिसे करीब 54 लाख रुपए में खरीदा गया था। महू के चिकली क्षेत्र में 0.212 हेक्टेयर जमीन। सुखलिया में चार प्लॉट। सुतार गली में पैतृक संपत्ति। स्कीम नंबर 103 और 136 में प्लॉट। जागृति सहकारी संस्था में मां बिलकिस खान के नाम भूखंड। राजगृही क्षेत्र में पत्नी राहेला खान के नाम भूखंड। कंचनबाग और एबी रोड पर कार्यालय। तीन मंजिला मकान, जिसमें किराएदार रहते थे। अन्य मकान और फ्लैट।
1998 में नगर निगम में भर्ती हुआ था असलम खान
मोहम्मद असलम खान वर्ष 1998 में नगर निगम में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के रूप में भर्ती हुआ था। इससे पहले वह एक निजी कॉलेज में नौकरी करता था। बाद में वह नगर निगम की रिमूवल शाखा में बेलदार के पद पर कार्यरत रहा। जांच के दौरान आरोप लगाए गए कि उसने रियल एस्टेट से जुड़े कार्यों और भवन अनुज्ञा शाखा से संबंधित प्रभाव का इस्तेमाल कर अवैध संपत्ति अर्जित की। उसे वर्ष 2010, 2011, 2015 और 2017 में निलंबित भी किया गया था, हालांकि बाद में वह बहाल हो गया।
परिवार के अन्य सदस्य भी मामलों में आए थे सामने
असलम खान के भाई और अन्य रिश्तेदार इंदौर नगर निगम के करीब 150 करोड़ रुपए के कथित फर्जी बिल मामले में भी आरोपी बनाए गए थे। इस मामले में बाई एहतेश्याम उर्फ काकू का नाम भी चर्चा में आया था। फिलहाल हाईकोर्ट के आदेश के बाद असलम खान के परिवार को जब्त ज्वेलरी वापस नहीं मिलेगी और यह संपत्ति लोकायुक्त की निगरानी में रहेगी। मामले में आगे की सुनवाई के बाद ही अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी।
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