इस कांग्रेस नेता को अब छोड़ना होगा एक पद: किस पूर्व मुख्यमंत्री ने कही-‘एक व्यक्ति-एक पद’ की बात; प्रदेश प्रभारी से क्या कहा
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
शहर की कांग्रेस राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस के शहराध्यक्ष चिंटू चौकसे पर ‘एक व्यक्ति-एक पद’ के नियम को लेकर दबाव बढ़ता नजर आ रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने स्पष्ट तौर पर मध्यप्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी से इस नियम को लागू करने की बात कही है, जिसके बाद चौकसे की दोनों में से एक कुर्सी जाने की अटकलें तेज हो गई हैं।
चिंटू चौकसे वर्तमान में दो अहम पदों पर
दरअसल, चिंटू चौकसे वर्तमान में दो अहम पदों शहर कांग्रेस अध्यक्ष और नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष पर काबिज हैं। दिग्विजय सिंह का मानना है कि संगठन में संतुलन और अवसर के लिए ‘एक व्यक्ति-एक पद’ का सिद्धांत लागू होना चाहिए। उन्होंने इस संबंध में प्रभारी हरीश चौधरी से भी चर्चा की है और चौकसे को एक पद छोड़ने की सलाह दी है।
लंच मीटिंग में उठा मुद्दा, फिर खुलकर सामने आई नाराजगी
हाल ही में इंदौर दौरे पर आए दिग्विजय सिंह रविवार को पूर्व शहराध्यक्ष सुरजीत सिंह चड्ढा के निवास पर लंच के लिए पहुंचे थे। यहां मौजूद नेताओं के बीच जब चिंटू चौकसे नजर नहीं आए, तो दिग्विजय सिंह ने उनके बारे में पूछताछ की। इसी दौरान उन्होंने खुलासा किया कि चौकसे से कई बार एक पद छोड़ने को कहा जा चुका है, लेकिन अब तक उन्होंने न तो इस्तीफा दिया और न ही लिखित आश्वासन दिया है।
कई बार कर चुके चर्चा
दिग्विजय सिंह ने यह भी कहा कि वे चौकसे से 6-7 बार इस विषय पर चर्चा कर चुके हैं। यहां तक कि उन्होंने यह विकल्प भी दिया कि चौकसे अपने भरोसेमंद किसी व्यक्ति को दूसरा पद सौंप सकते हैं, लेकिन इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
पुराना विवाद भी बना दबाव का कारण
चौकसे और दिग्विजय सिंह के बीच पहले भी मतभेद सामने आ चुके हैं। विशेष रूप से राजू भदौरिया को लेकर विवाद ने तूल पकड़ा था। दिग्विजय सिंह द्वारा भदौरिया को फटकार लगाए जाने के बाद चौकसे की नाराजगी खुलकर सामने आई थी। उस समय एक ऑडियो भी वायरल हुआ था, जिसमें चौकसे ने दिग्विजय सिंह के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां की थीं।
दोनों के बीच तनातनी हुई थी
इसके अलावा, शीतला माता बाजार के दौरे को लेकर भी दोनों के बीच तनातनी हुई थी। चौकसे ने उस दौरे को गैर-आधिकारिक बताते हुए स्थानीय कांग्रेस नेताओं को उसमें शामिल न होने की सलाह दी थी। यहां तक कि उन्होंने पार्टी दफ्तर गांधी भवन में यह तक कह दिया था कि कोई भी राष्ट्रीय नेता बिना शहराध्यक्ष को सूचना दिए दौरा नहीं कर सकता।
बाद में सुलह, लेकिन अब फिर बढ़ी सियासी सरगर्मी
हालांकि, बाद में चिंटू चौकसे ने अपने बयान पर खेद जताया और भोपाल जाकर दिग्विजय सिंह से मुलाकात कर विवाद को शांत करने की कोशिश की। इसके बाद दिग्विजय सिंह के अगले इंदौर दौरे में वे उनके साथ भी नजर आए थे।
फिलहाल, ‘एक व्यक्ति-एक पद’ के मुद्दे ने कांग्रेस संगठन के भीतर नई बहस छेड़ दी है। अब देखना होगा कि पार्टी नेतृत्व इस मामले में क्या निर्णय लेता है और क्या चिंटू चौकसे स्वेच्छा से कोई एक पद छोड़ते हैं या संगठनात्मक स्तर पर कोई बड़ा फैसला लिया जाता है।
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