शुक्र है, फख्र है, सुकून है: गद्गद् हुई भोजशाला; धन्य हुई धारा नगरी
KHULASA FIRST
संवाददाता

सदियों बाद जुम्मे पर सूर्योदय से सूर्यास्त तक हुई अखंड पूजा-अर्चना
धार में निर्विघ्न हुई अखंड पूजा, जुम्मे की नमाज मस्जिदों में हुई मुकम्मल, कड़े रहे सुरक्षा बंदोबस्त
हाई कोर्ट के फैसले के बाद पहली अखंड पूजा हुई, मां वाग्देवी की प्रतिकृति के हुए दर्शन, हवन हुआ
लंदन से पहले ग्वालियर से वाग्देवी की प्रतिकृति वाली प्रतिमा लाने की मांग हुई बुलंद
अब भोजशाला के अंदर बनी विवादित संरचना हटाने पर अड़े श्रद्धालु, पुरातत्व विभाग से मांग
आरएसएस प्रचारक से संत बने आंदोलन के मुख्य किरदार नवलकिशोर से आज मिलेंगे याचिकाकर्ता
धार के मुसलमानों ने पहली बार भोजशाला में नहीं पढ़ी नमाज, काली पट्टी बांधकर मस्जिदों में हुई
पुलिस कप्तान के ‘सिंघम अवतार’ व कलेक्टर की संजीदगी से पूरे दिन धार में बनी रही शांति
नितिन मोहन शर्मा 94250-56033 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
शुक्र है, अब भोजशाला मुकम्मल रूप से हिंदुओं की हुई, सनातन मतावलंबियों की हुई। फख्र है कि हिंदू समाज ने अपने मानबिंदु के लिए एक लंबी लड़ाई लड़ी। सदियों तक संघर्ष किया। पीढ़ी-दर-पीढ़ी अपने गौरवशाली अतीत को जेहन में रखा।
न समाज रुका, न थमा, न डरा, न डिगा। गर्व है हिंदू एकता पर। सुकून है अब, हर मंगलवार ही नहीं हर शुक्रवार भी भोजशाला के द्वार हिंदुओं के लिए पूरे दिन खुले रहेंगे। मां वाग्देवी के इस पुनीत आंगन में अब किसी भी अन्य इबादत के लिए जाजम नहीं बिछेगी।
सकून है, अब सिर्फ मंत्रोच्चार गूंजेंगे, यज्ञवेदी अग्नि ऋचाएं आलोकित करेगी। भजन होंगे, पूजन होगा और लगेंगे वाग्देवी मैया के जयकारे। अब भोजशाला व सनातन के बीच कोई बाधा नहीं होगी। अब पुलिस की लाठियां नहीं होंगी। न उपद्रव होगा, न पूजन के लिए संघर्ष।
न अब धारा नगरी छावनी बनेगी, न धार की सरजमीं आपसी वैमनस्य का कारण बनेगी। शुक्रवार को इसी सुकून के साथ भोजशाला पूरे दिन गद्गद् हुई और धन्य-धन्य हुई राजा भोज की नगरी। उम्मीद है अब हर शुक्रवार धार में शुक्र-शुभ-मंगल बना रहेगा।
तपती व चिलचिलाती गर्मी में भी धार में आस्था का सैलाब पूरे दिन एक समान बहता रहा। हाई कोर्ट के फैसले के बाद कल शुक्रवार को पहली अखंड पूजा का दिन था। मां वाग्देवी से लाड़ लड़ाने भक्तों का ऐसा तांता लगा कि भोजशाला का आंगन छोटा पड़ गया।
721 साल बाद भोजशाला में शुक्रवार के दिन हिंदुओं ने अपनी आराध्य देवी का पूजन किया। अन्यथा हर शुक्रवार यहां इबादत के लिए मुस्लिम समाज की जाजम बिछती थी। यदि शुक्रवार को वसंत पंचमी हो, तब भी यहां नमाज पढ़ी जाती थी।
इस दिन वसंत पंचमी होने पर सनातनी समाज का पूरा दिन इसी संघर्ष में बीतता था कि पूजन नहीं, कम से कम गर्भगृह के दर्शन तो कर लेने दीजिए। कल शुक्रवार को इस संघर्ष को स्थायी विराम मिल गया। पूरा दिन निष्कंटक पूजन, भजन, हवन, अर्चन हुआ।
भोजशाला आंदोलन में शहीद हुए कारसेवक परिवारों को सम्मानित किया गया। याचिकाकर्ता आशीष गोयल, कुलदीप तिवारी, भारत रक्षा मंच के प्रांतीय अध्यक्ष राजेश बिंजवे को भी भगवा अंगवस्त्र के साथ सम्मान दिया गया।
जिला कलेक्टर की संजीदगी व पुलिस कप्तान द्वारा गुरुवार को दिखाए गए ‘सिंघम अवतार’ के बाद शुक्रवार को धार में सब कुछ शांति से बीता। पूजन भी हुआ और तय वक्त पर नमाज भी हुई, लेकिन यह नमाज भोजशाला में नहीं, मुस्लिम समाज ने अपने-अपने इलाके की मस्जिदों व घरों में पढ़ी।
मुस्लिम समाज की दुकानें और व्यावसायिक प्रतिष्ठान भी खुले रहे। अल्पसंख्यक समाज ने समझदारी का परिचय दिया और धार सदर अब्दुल समद सहित तमाम लोगों ने कानून का साथ देकर नई मिसाल कायम की। कमाल मौला दरगाह पर सलाना जश्न भी सुकून से हुआ।
जिला प्रशासन ने किसी भी समुदाय का जमावड़ा नहीं होने दिया। भोजशाला उत्सव समिति की शोभायात्रा रद्द कर दी गई, ताकि आस्था का उत्सव सड़कों पर शक्ति प्रदर्शन का हिस्सा न बने। इसका असर दूसरे समुदाय पर अच्छा हुआ और दिन सुकून से बीता।
आज एक अन्य याचिकाकर्ता कुलदीप तिवारी व भारत रक्षा मंच के प्रांतीय अध्यक्ष राजेश बिंजवे महेश्वर में नवलकिशोर शर्मा से मिलने जा रहे हैं। शर्मा धार जिले में संघ प्रचारक रहे हैं और भोजशाला मुक्ति आंदोलन के प्रमुख किरदार थे। वे अब संन्यासी के रूप में महेश्वर हैं।
शाम 7 बजे अकस्मात बने तनाव के हालातआमने-सामने नारेबाजी
शाम 7 बजे जैसे ही अनाउंसमेंट हुआ कि अब परिसर खाली कीजिए, उसी वक्त तनाव के हालात बन गए। दोनों पक्षों की तरफ से नारेबाजी शुरू हो गई। एक पक्ष भोजशाला से लौट रहा था, दूसरा दरगाह पर जमा हुआ था। दरगाह तक जाने का रास्ता कल बंद था।
लिहाजा घूमकर जाना पड़ा। शाम को दरगाह परिसर व ऊंचाई पर खड़े हो हुजूम भोजशाला की तरफ जब देख रहा था, तब ही पूजन कर लौटते लोगों की तरफ से नारेबाजी शुरू हो गई- काशी, मथुरा, भोजशाला... पूर्ण विजय संकल्प हमारा।
भोजशाला तो झांकी है, काशी-मथुरा बाकी हैं...। तुरंत सुरक्षा बलों ने स्थिति को कंट्रोल किया। इस काम में मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों ने सराहनीय भूमिका निभाई और थोड़ी देर की तनातनी के बाद तनाव खत्म हो गया।
भोजशाला से मेहराब, आयत, सिंहासन हटाने की मांग
कल जब भोजशाला में बड़ी संख्या में लोग पूजन पर पहुंचे तो उन्होंने परिसर में एक स्थान पर ऊंची सिंहासन जैसी संरचना व मेहराब को हटाने की मांग की। बताते हैं कि इसी ऊंचाई से नमाज पढ़वाई जाती थी।
इस स्थान के आसपास बनी मेहराब और वहां उर्दू भाषा में लिखी कुछ आयतों को लेकर भी लोगों का रोष सामने आया। भोज उत्सव समिति से जुड़े लोगों का कहना था कि कोर्ट के फैसले के बाद ये साफ हो गया है कि भोजशाला मंदिर है, तो फिर मंदिर के स्वरूप को बदलने के प्रयास वाली संरचना अब आर्कियोलॉजी सर्वे ऑफ इंडिया को हटाना चाहिए।
लंदन से पहले ग्वालियर में रखी मां वाग्देवी प्रतिमा लाने की मांग
भोजशाला में स्थापित मां वाग्देवी का मूल विग्रह तो लंदन के संग्रहालय में है, लेकिन जब भोजशाला मुक्ति आंदोलन चरम पर था, तब मूल विग्रह की हूबहू प्रतिकृति बनवाने का काम शुरू हुआ था।
आंदोलन के अगुआकार व आरएसएस के जिला प्रचारक नवलकिशोर शर्मा ने धार के नागरिकों के साथ इसकी पहल की थी। ये प्रतिकृति साढ़े 3 टन वजनी है और अष्टधातु से बनी हुई है।
बताते हैं मूर्ति बनकर तैयार है, लेकिन वह धार आती, उसके पहले ही आंदोलन की दशा व दिशा बदल गई और जनांदोलन में बिखराव हो गया। सरकारी हस्तक्षेप बढ़ गया और अष्टधातु की वह प्रतिमा ग्वालियर में ही अटक गई।
अब कल ये मांग भी बुलंद हुई कि लंदन से पहले ग्वालियर में बनी प्रतिमा लाई जाए। चूंकि लंदन की प्रतिमा खंडित है और सनातन धर्म में खंडित मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा व पूजन नहीं होता।
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