गाड़ी के आगे रोती रही महिलाएं: कैमरे चमके तो उतरे निगमायुक्त
KHULASA FIRST
संवाददाता

अफसरशाही की बेरुखी… जनसुनवाई में सिर्फ आश्वासनों का झुनझुना, बूंद-बूंद पानी को तरसती वार्ड-16 की महिलाएं गाड़ी के आगे अड़ी, तो हुआ निगम के दावों का खुलासा
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
नगर निगम की जनसुनवाई में अपनी बुनियादी जरूरतों के लिए गुहार लगाने पहुंचने वाली जनता को सिर्फ आश्वासनों दिया जा रहा है। इसका एक जीवंत और संवेदनहीन नजारा मंगलवार को निगम मुख्यालय में देखने को मिला, जब पानी की समस्या से जूझ रहीं वार्ड नंबर 16 और जोन नंबर 1 के अंतर्गत आने वाले रूपनगर छोटा बांगड़दा क्षेत्र की दर्जनों महिलाएं अपनी फरियाद लेकर पहुंची थीं।
निगमायुक्त क्षितिज सिंघल जब जनसुनवाई समाप्त कर मीडिया कॉन्फ्रेंस के बाद वापस लौट रहे थे, तभी अपनी पीड़ा सुनाने के लिए बेताब महिलाओं ने उनकी गाड़ी के आगे आकर उसे रोकने का प्रयास किया।
महिलाएं हाथ जोड़कर अपनी समस्या सुनने की मिन्नतें करती रहीं, लेकिन निगमायुक्त सिंघल संवेदनशीलता दिखाने के बजाय सीधे कार में जाकर बैठ गए। इस दौरान निगमायुक्त सिंघल के साथ मौजूद दो पुलिसकर्मियों ने महिलाओं को गाड़ी के सामने से जबरन हटने के लिए कहा और तर्क दिया कि साहब को एक बेहद जरूरी वीसी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग बैठक में शामिल होने जाना है।
अधिकारियों की इस बेरुखी के बीच जब वहां मौजूद मीडियाकर्मियों और कैमरामैन ने इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो बनाना शुरू किया, तो कैमरे की चमक और मीडिया के दबाव को देखते हुए आखिरकार निगमायुक्त सिंघल को अपनी गाड़ी से नीचे उतरना पड़ा और उन्होंने महिलाओं की पीड़ा सुनी।
जनसुनवाई में पहुंचीं पीड़ित महिलाएं सरोज साहू, सोनू कुमावत, टीना प्रजापत, लता साहू, पुष्पा प्रजापत, संजू बघेल, मांगी बाई, संतोष चौहान, लल्ली प्रजापत, सुंदरी बाई और डोगरी प्रजापत ने अधिकारियों के सामने अपना रोष व्यक्त करते हुए आरोप लगाए। महिलाओं का कहना है कि वे हर मंगलवार को जनसुनवाई में चक्कर काट रही हैं, लेकिन हर बार उन्हें सिर्फ कोरा आश्वासन देकर वापस भेज दिया जाता है और जमीन पर कोई काम नहीं होता।
34 परिवारों में रोज विवाद... क्षेत्र की पीड़ित महिला लता साहू ने बताया कि इलाके की सभी महिलाओं को एकजुट होने में समय लग गया और भीषण गर्मी के कारण नगर निगम मुख्यालय तक आने के लिए समय पर कोई साधन भी उपलब्ध नहीं हो सका।
सुबह से ही इतनी तेज धूप होती है कि महिलाओं के लिए घर से निकलना भी दूभर हो जाता है, इसके बावजूद वे अपनी प्यास बुझाने की मांग को लेकर यहां तक पहुंची थीं। वहीं एक अन्य पीड़ित महिला पुष्पा प्रजापत ने क्षेत्र के जमीनी हालात बयां करते हुए बताया कि रूपनगर की गली नंबर 5 में एक सरकारी बोरिंग है, जहां से पूरे इलाके के लोग पानी भरते हैं।
इस बोरिंग के आसपास करीब 34 मकान हैं और बोरिंग के ऊपर लगे एक ही पाइप से सभी को पानी भरना पड़ता है। यह सरकारी बोरिंग दिनभर में मात्र एक घंटे के लिए चालू होती है, जिसके कारण 34 परिवारों में पानी भरने को लेकर रोज विवाद और आपसी झगड़े की नौबत आ जाती है।
महिलाओं की मांग है कि उनकी सरकारी गली में जल्द से जल्द पानी की नई पाइपलाइन डाली जाए ताकि सभी के घरों तक नल का पानी पहुंच सके और इस रोज-रोज के विवाद से मुक्ति मिले।
लापरवाही का खुलासा... इस पूरे मामले में नगर निगम के जमीनी तंत्र और ठेकेदारों की घोर लापरवाही का भी खुलासा हुआ है। पीड़ित जनता के अनुसार, इस पूरे क्षेत्र की व्यवस्था देखने वाला विजय सिंह नामक नगर निगम कर्मचारी जो कि जोन क्रमांक 1 में बैठता है, वह भी इस समस्या का समाधान नहीं करा पा रहा है।
क्षेत्र में नल की लाइन बिछाने का काम देखने वाला ठेकेदार पिछले दो महीनों से इतना लापरवाह हो चुका है कि वह आम जनता तो दूर, खुद नगर निगम के कर्मचारियों के फोन तक उठाना मुनासिब नहीं समझ रहा है।
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