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इंतेहा हो गई इंतजार की: प्राधिकरण अध्यक्ष; इंदौर, भोपाल, कटनी, देवास पर सस्पेंस बरकरार

KHULASA FIRST

संवाददाता

02 मई 2026, 12:55 pm
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इंतेहा हो गई इंतजार की

निगम-मंडल-आयोग-प्राधिकरणों में नियुक्तियों की लगी है झड़ी, इंदौर में सूखा

मोहन सरकार एक के बाद एक कर रही लाभ के पद पर राजनीतिक नियुक्तियां

योग आयोग, युवा आयोग, खादी ग्रामोद्योग बोर्ड, गृह निर्माण मंडल, पाठ्य पुस्तक निगममें नेता तैनात

जबलपुर-सिंगरौलीरतलाम में भी बन गए प्राधिकरण अध्यक्ष, इंदौर के हिस्से में अब तक इंतजार

कुश समाज कल्याण बोर्ड, महर्षि पतंजलि संस्थान में भी मनोनीत हुए अध्यक्ष

आईडीए अध्यक्ष को लेकर सरकार व संगठन के बीच बन नहीं पा रही सहमति, विजयवर्गीय का भी पेंच

नितिन मोहन शर्मा 94250-56033 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
इंतेहा हो गई इंतजार की, आई न कुछ खबर ‘सरकार’ की... टकटकी एक जैसी लगी है राजधानी की तरफ। दिल की धक-धक बढ़ती ही जा रही है। रह-रहकर मैसेज की टुन-टुन चौंका देती है। नजरें फैक्स मशीन, वाट्सएप संदेश पर एक जैसी लगी हुई हैं। हर दिन उम्मीद से शुरू हो रहा है, लेकिन रात निराशा में बदल जा रही है।

कभी खबर दौड़ती है कि बस, अब इंतजार की घड़ियां खत्म ही होने वाली हैं, लेकिन ऐसा होता नहीं और एक बार फिर उम्मीदें धूल-धूसरित हो जाती हैं। एक तरफ नियुक्तियों की झड़ी-सी लगी है और दूसरी तरफ एकदम सूखा-सा पसरा हुआ है।

झड़ी तो दूर, हलकी बूंदाबांदी भी अब तक नहीं हुई। न ऐसे आसार नजर आ रहे कि ये इंतजार जल्द खत्म होने वाला है। हैरानी तो बस इस बात पर है कि जब सब कुछ तय हो ही चुका है तो आखिर ‘कृपा’ कहां आकर अटक गई है?

जी हां, ये ही हाल हैं इन दिनों प्रदेश की राजनीतिक राजधानी इंदौर के। एक तरफ मोहन सरकार निगम, मंडल, आयोग, बोर्ड, प्राधिकरणों में एक के बाद एक राजनीतिक नियुक्तियां कर रही है, वहीं राज्य की राजनीतिक राजधानी के अब तक हाथ खाली हैं। ‘हलकी-पतली’ एक-दो नई नियुक्तियों के अलावा इंदौर का दामन फिलहाल लाभ के पद के मामले में रीता ही है। सबसे ज्यादा बेसब्री इंदौर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष पद को लेकर है। बताते हैं कि नाम तो तय हो गया है, बस घोषणा शेष है, लेकिन ये तर्क लंबे होते इंतजार के कारण गले नहीं उतर रहा।

अगर नाम तय ही है तो फिर वे कौन-सी परिस्थितियां हैं, जो सरकार को घोषणा करने से रोक रही हैं? ये सवाल ही इस पद पर सस्पेंस को निरंतर बढ़ा रहा है, लेकिन कुहांसा है कि छंटने का नाम ही नहीं ले रहा।

अब तक इंदौर के साथ भोपाल, जबलपुर, रतलाम, देवास, कटनी जैसे बड़े शहरों के प्राधिकरण अध्यक्ष भी अटके हुए थे तो माना जा रहा था कि संगठन व सरकार के बीच कुछ चिंतन-मंथन चल रहा है, लेकिन रतलाम के बाद अब शुक्रवार को जबलपुर जैसे बड़े शहर में अध्यक्ष की घोषणा ने इंदौर के हिस्से में एक बार फिर निराशा दर्ज करवाई। सूत्रों की मानें तो इंदौर के मसले पर संगठन व सरकार के बीच कुछ न कुछ उलझन है, जो दूर नहीं हो रही।

एक तरफ सरकार के मुखिया हैं, दूसरी तरफ संगठन के मुखिया। इन दोनों के बीच ‘मंत्री महोदय’ का भी पेंच फंसा हुआ है। नतीजे में इंदौर के हिस्से में अब तक सिर्फ बाट जोहना ही आ रहा है।

शुक्रवार को सरकार ने लाभ के पद पर थोकबंद राजनीतिक नियुक्तियां की। इनमें योग आयोग, युवा आयोग, खादी ग्रामोद्योग बोर्ड, गृह निर्माण मंडल, पाठ्य पुस्तक निगम, कुश समाज कल्याण बोर्ड, महर्षि पतंजलि संस्थान में अध्यक्ष की तैनाती की गई।

इसके अलावा जबलपुर व सिंगरौली में प्राधिकरण अध्यक्ष के साथ-साथ सहरिया विकास प्राधिकरण अध्यक्ष भी मनोनीत कर दिए गए हैं। सरकार की तरफ से खबरें आ रही हैं कि शेष बचे निगम, मंडल व प्राधिकरणों के नाम भी लगभग तय हैं और किसी भी वक्त घोषणा कर दी जाएगी। पर्यटन विकास निगम, ऊर्जा विकास निगम, गो-संवर्धन बोर्ड, हथकरघा व हस्त शिल्प विकास निगम, कृषि विपणन बोर्ड, रोजगार निर्माण बोर्ड आदि में नियुक्तियां अभी शेष हैं।

युवा आयोग में इंदौर की थी चर्चा, ग्वालियर के हिस्से में गया पद
युवा आयोग अध्यक्ष पद की सौगात ग्वालियर के हिस्से में चली गई, जबकि इस पद को लेकर सर्वाधिक चर्चा इंदौर को लेकर बनी हुई थी। कांग्रेस से भाजपा में आए नेताओं के नाम परोसे जा रहे थे कि इन्हें युवा आयोग की कमान मिलने जा रही है, लेकिन बताते हैं ग्वालियर के प्रवीण शर्मा को ये जवाबदारी मिलने जा रही है।

ऐसे ही गृह निर्माण मंडल में भी इंदौरी नेताओं के पग में घुंघरू बंधे थे और बांध भी दिए गए थे, लेकिन बाजी मुख्यमंत्री के गृहनगर उज्जैन के हिस्से आई। मंडल में ओम जैन अध्यक्ष बनाए गए। जैन आरएसएस की पृष्ठभूमि से और मुख्यमंत्री के नजदीक थे।

शुक्रवार को जो आदेश पार्टी कार्यालय से निकले, उनमें प्रदेश दफ्तर के ही पूर्व कार्यालय मंत्री सत्येंद्र भूषण सिंह को लघु उद्योग निगम लिमिटेड के संचालक मंडल का अध्यक्ष बनाया गया। वहीं गुड्डी आदिवासी को सहरिया विकास प्राधिकरण का अध्यक्ष बनाया गया। एमपी एग्रो व राज्य स्तरीय संस्थानों में नियुक्तियों की भी तैयारियां हैं।

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