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बड़े खेल का खुलासा: ट्रकों की अवैध डील दबाने रेंजर संगीता ठाकुर की पिकअप वाली पैंतरेबाजी

KHULASA FIRST

संवाददाता

24 मई 2026, 8:24 pm
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बड़े खेल का खुलासा

गीली लकड़ियों से भरे ट्रक के मामले में अब अवैध चिरान गाड़ी पकड़कर शुरू की नई कार्रवाई

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
वन विभाग में भ्रष्टाचार, रसूखदारों से सांठगांठ और माफिया को संरक्षण देने का खेल हर दिन एक नया मोड़ ले रहा है। वन विभाग के आला अधिकारियों और दागदार फील्ड स्टाफ की मिलीभगत के कारण सरकार की छवि लगातार धूमिल हो रही है।

ताजा घटनाक्रम में वन परिक्षेत्र अधिकारी एवं उड़नदस्ता प्रभारी संगीता ठाकुर ने अपनी चौतरफा घिरी कार्यप्रणाली को बचाने और पूर्व के बड़े भ्रष्टाचार के मामलों से ध्यान भटकाने के लिए एक सफेद रंग का योद्धा पिकअप वाहन संख्या एमपी 09 जीएच 7909 पकड़ा है।

इस वाहन में बिना किसी वैध ट्रांजिट पास और अनुज्ञा पत्र के आरा मशीनों से अवैध रूप से काटी गई चिरान की रीप भरकर परिवहन की जा रही थी। शुक्रवार रात गश्ती दल की इस कार्रवाई को केवल एक छोटी और दिखावे की कार्रवाई माना जा रहा है, क्योंकि रेंजर ठाकुर की भूमिका खुद पूर्व के बड़े मामलों में बेहद संदिग्ध और गंभीर विवादों के घेरे में है।

भ्रष्ट तंत्र ने जांच का जिम्मा रेंजर को सौंपा
हाल ही में विशेष उड़नदस्ते द्वारा रालामंडल वन परिक्षेत्र अधिकारी प्रीति शाक्य के नेतृत्व में दो बड़े ट्रकों को रंगे हाथों पकड़ा गया था, जिसमें भारी मात्रा में अवैध रूप से गीली लकड़ियां भरी हुई थीं।

उस बड़ी कार्रवाई के तुरंत बाद विभाग के भ्रष्ट तंत्र ने खेल करते हुए जांच का पूरा जिम्मा उसी रेंजर संगीता ठाकुर को सौंप दिया था।

विभागीय साठगांठ का नतीजा यह रहा कि बड़े चेहरों को बचाने और अवैध गीली लकड़ियों से भरे ट्रक के मामले को दबाने के लिए एक ट्रक को मोटी सौदेबाजी कर रातोरात बिना किसी जांच के छोड़ दिया गया, जिससे ईमानदार अधिकारियों का मनोबल पूरी तरह टूट चुका है।

धड़ल्ले से हो रहा बिना टीपी लकड़ियों का परिवहन
सूत्रों की मानें तो जीएनटी मार्केट और उसके आसपास के क्षेत्रों से रोजाना बिना टीपी के कीमती गीली लकड़ियों और अवैध चिरान का परिवहन धड़ल्ले से किया जा रहा है।

छोटी गाड़ियां हर दिन आरा मशीनों से माल भरकर सिंहासा, नवदापंथ, सांवेर रोड और पीथमपुर जैसे औद्योगिक इलाकों में सप्लाई कर रही हैं।

देपालपुर, सांवेर, देवास, शाजापुर और गौतमपुरा जैसे क्षेत्रों से हर रात वन विभाग की चौकियों और नाकों के सामने से अवैध लकड़ियों से भरे वाहन गुजरते हैं, लेकिन पूरा सिस्टम शुभलाभ और मासिक सेटिंग के नाम पर मूकदर्शक बनकर तमाशा देखता है और अपनी नाकामी की पहचान बना चुका है।

दाग धोने की नाकाम कोिशश
विभाग के कानूनी नियमों के मुताबिक वन उपज के अवैध परिवहन के मामलों में सख्त वन अपराध दर्ज कर विस्तृत जांच की जानी चाहिए, लेकिन यहां खेल को सिर्फ पीओआर जारी करने तक सीमित रख दिया जाता है ताकि गाड़ी मालिक और लकड़ी चोरों को आसानी से बचाया जा सके।

वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का इंदौर में मुख्यालय होने के बावजूद इस संगठित भ्रष्टाचार पर कोई ठोस संज्ञान नहीं लिया जाना पूरी प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। रेंजर संगीता ठाकुर द्वारा की जा रही यह तथाकथित पिकअप कार्रवाई केवल अपने दाग धोने की नाकाम कोशिश है।

मीडिया ने खोली संदिग्ध भूमिका की परतें- इस पूरे नेटवर्क और रेंजर की संदिग्ध भूमिका की परतें तब खुलीं, जब मीडिया ने जब्त पिकअप वाहन के संबंध में रेंजर संगीता ठाकुर से सीधे सवाल पूछे।

उन्होंने गाड़ी कहां से लोड हुई थी, किस आरा मशीन से चिरान भरा गया था, इसका असली मालिक कौन है और यह माल कहां खपाया जाना था, जैसे बुनियादी और जरूरी सवालों पर जवाब देना उचित नहीं समझा।

रेंजर का यह मौन साफ तौर पर इशारा करता है कि मामले की जड़ें बहुत गहरी हैं और पर्दे के पीछे फर्जी कागजात तैयार करवाकर इस गाड़ी को भी छुड़ाने का ताना-बाना बुना जा रहा है।

उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच से घोटाले का खुलासा तय- यदि इस पूरे मामले की, इंदौर रेंज की रेंजर और एसडीओ स्तर के अधिकारियों की संपत्ति तथा कॉल डिटेल्स की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच कराई जाए, तो वन विभाग के भीतर चल रहे इस अवैध लकड़ी घोटाले का खुलासा होना तय है।

अब देखना यह है कि प्रशासन इस अवैध चिरान गाड़ी के मामले में आरा मशीन संचालक और मुख्य सरगना तक पहुंचता है या फिर पुरानी रीत के अनुसार मोटी सौदेबाजी कर मामले की फाइल को हमेशा के लिए बंद कर दिया जाता है।

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