डिजिटल अरेस्ट का जाल: सीबीआई अधिकारी बने ठग; रिटायर्ड अफसर से ठग ली इतने लाख की राशि
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, भोपाल।
राजधानी में साइबर ठगी के बेहद खतरनाक मामले का खुलासा हुआ है। सामने आया है, जहां ठगों ने खुद को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) अधिकारी बताकर 75 वर्षीय रिटायर्ड व्यक्ति को ‘डिजिटल अरेस्ट’ में ले लिया। ठगों ने 24 घंटे तक वीडियो कॉल पर निगरानी रखते हुए डर और दबाव बनाकर 37 लाख 60 हजार रुपए अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करा लिए।
वाट्सएप वीडियो कॉल से शुरू हुआ खेल
पुलिस के मुताबिक अरेरा कॉलोनी के ई-5 क्षेत्र में रहने वाले अविनाश कक्कड़ अपनी पत्नी शशि कक्कड़ के साथ रहते हैं। 30 अप्रैल की रात उन्हें वाट्सएप पर वीडियो कॉल आया, जिसमें सामने व्यक्ति पुलिस वर्दी में नजर आया। आरोपियों ने खुद को मुंबई का CBI अधिकारी बताया और बैंक खातों में संदिग्ध लेन-देन का हवाला देते हुए कार्रवाई की बात कही।
गिरफ्तारी का डर दिखाकर ‘सेफ अकाउंट’ में डलवाई रकम
ठगों ने दंपती को धमकाया कि जांच चल रही है और गिरफ्तारी हो सकती है। इससे बचने के लिए उन्होंने पूरी रकम एक तथाकथित “सेफ अकाउंट” में ट्रांसफर करने को कहा, जो बाद में वापस करने का भरोसा दिया गया। डर के माहौल में दंपती ने 37.60 लाख रुपए ट्रांसफर कर दिए। इस दौरान आरोपी लगातार वीडियो कॉल पर नजर बनाए रहे, ताकि पीड़ित किसी से संपर्क न कर सके।
FD तुड़वाने की कोशिश, बैंक ने रोकी बड़ी ठगी
आरोपियों ने 15-15 लाख रुपए की दो एफडी तुड़वाने का भी दबाव बनाया, लेकिन बैंक अधिकारियों ने समय से पहले एफडी तोड़ने से इनकार कर दिया। इससे और बड़ी ठगी टल गई।
पत्नी के हादसे से खुला ‘डिजिटल अरेस्ट’ का राज
घटना के दौरान शशि कक्कड़ घर में गिर गईं, जिससे उनके कूल्हे की हड्डी टूट गई। इसके बाद बेटी-दामाद के पहुंचने पर पूरा मामला सामने आया। सूचना मिलते ही मध्य प्रदेश पुलिस की हबीबगंज थाना पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है। साइबर एक्सपर्ट्स ट्रांजैक्शन ट्रेल खंगाल रहे हैं और आरोपियों की तलाश जारी है।
क्या है ‘डिजिटल अरेस्ट’ ठगी?
इस नए साइबर फ्रॉड में ठग खुद को पुलिस/CBI/ED अधिकारी बताकर वीडियो कॉल पर व्यक्ति को “निगरानी” में रखते हैं। वे गिरफ्तारी, मनी लॉन्ड्रिंग या कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर पीड़ित को किसी से संपर्क नहीं करने देते और पैसे ट्रांसफर करा लेते हैं।
सावधान रहें: ऐसे बचें
कोई भी एजेंसी वीडियो कॉल पर जांच या गिरफ्तारी नहीं करती। “सेफ अकाउंट” जैसी कोई आधिकारिक व्यवस्था नहीं होती। डराने-धमकाने वाले कॉल तुरंत काटें। परिवार या पुलिस से तुरंत संपर्क करें।
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