आंदोलन की धमकी पड़ी भारी: विधायक को किया भोपाल तलब; सीएम-प्रदेश अध्यक्ष ने लगाई क्लास
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, भोपाल।
शहर में सड़क चौड़ीकरण को लेकर दिए गए बयान के बाद उज्जैन उत्तर के बीजेपी विधायक अनिल जैन कालूहेडा को पार्टी नेतृत्व ने भोपाल तलब किया। शुक्रवार देर रात उन्होंने भाजपा प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और प्रदेश प्रभारी डॉ महेन्द्र सिंह से मुलाकात की।
बयान पर नाराजगी जताई
इसके बाद वे सीएम हाउस पहुंचे, जहां मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से भी उनकी चर्चा हुई। बैठक में मुख्यमंत्री और पार्टी संगठन ने सिंहस्थ के लिए बनने वाली सड़क को लेकर दिए गए उनके बयानों पर नाराजगी जताई।
विधायक ने व्यक्त किया खेद
समझाइश के बाद विधायक कालूहेड़ा ने अपने बयान पर खेद व्यक्त किया और कहा कि वे आगे सिंहस्थ से जुड़े विकास कार्यों में पूरा सहयोग करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासन आम जनता से चर्चा करके निर्णय ले।
यह है मामला
दरअसल, उज्जैन के पिपलीनाका क्षेत्र में सड़क चौड़ीकरण को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा ने शुक्रवार को कहा था कि यदि सड़क 24 मीटर से ज्यादा चौड़ी की गई तो वे सड़क पर उतरकर आंदोलन करेंगे।
उनका कहना था कि चौड़ीकरण से कई परिवारों की रोजी-रोटी प्रभावित होगी और अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को गलत जानकारी दी है।
7 दिन में घर खाली करने का नोटिस
जानकारी के मुताबिक भैरवगढ़ रोड के किनारे करीब 410 मकान हैं। नगर निगम ने इनमें रहने वाले लोगों को 7 दिन के भीतर घर खाली करने का नोटिस दिया है। नोटिस के अनुसार कई मकानों का हिस्सा 10 से 20 फीट तक ही बच पाएगा, जबकि बाकी हिस्से को हटाने की तैयारी की जा रही है।
सरकार के खिलाफ की नारेबाजी
नोटिस मिलते ही स्थानीय लोग आक्रोशित हो गए और विधायक कार्यालय का घेराव कर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। लोगों ने विधायक की गाड़ी के सामने बैठकर विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान विधायक ने आश्वासन दिया था कि यदि सड़क 24 मीटर से ज्यादा चौड़ी की गई तो वे खुद जनता के साथ सड़क पर उतरेंगे।
जनता की भावना का सम्मान जरूरी
विधायक कालूहेड़ा ने कहा कि उन्होंने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष से भी कहा है कि वे जनता की भावना का सम्मान नहीं कर पा रहे हैं और लोगों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि शहर की छोटी-छोटी बातों को अनावश्यक रूप से तूल देना ठीक नहीं है, लेकिन कुछ मुद्दे इतने गंभीर होते हैं कि अधिकारी सीधे मुख्यमंत्री तक बात पहुंचा देते हैं, कभी-कभी गलत जानकारी भी दे देते हैं।
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