कागजों पर स्मार्ट सिटी का उजाला हकीकत- ‘अंधेरे में डूबे कई इलाके’: नगर निगम की समीक्षा बैठक
KHULASA FIRST
संवाददाता

करोड़ों की बचत का दावा, पर 311 पर शिकायतों का अंबार
सूर्या एजेंसी की लापरवाही और 5 हजार स्थानों पर 24 घंटे जलती हैं लाइटें
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
नगर पालिक निगम मुख्यालय में विद्युत विभाग की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में शहर की रोशनी व्यवस्था की जो गुलाबी तस्वीर पेश की गई, वह जमीनी हकीकत से मेल खाती नजर नहीं आ रही है।
एक तरफ महापौर पुष्यमित्र भार्गव तकनीकी नवाचारों और करोड़ों की वित्तीय बचत का खाका खींच रहे हैं, तो दूसरी तरफ शहर के कई क्षेत्र आज भी शाम ढलते ही असुरक्षा और अंधेरे की गिरफ्त में आ जाते हैं।
समीक्षा के दौरान अधिकारियों ने स्मार्ट लाइटिंग और सीसीएमएस तकनीक के जो आंकड़े प्रस्तुत किए, उनमें छिपी खामियों का खुलासा तब हुआ जब 311 हेल्पलाइन पर लंबित शिकायतों का मुद्दा उठा।
बैठक में महापौर पुष्यमित्र भार्गव के साथ अपर आयुक्त श्रृंगार श्रीवास्तव एवं विद्युत विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
एजेंसियों की मनमानी का खुलासा- बैठक में सबसे गंभीर मामला सूर्या एजेंसी की कार्यप्रणाली का रहा। रिकॉर्ड के मुताबिक, शहर की प्रकाश व्यवस्था को बाधित करने में इस एजेंसी की बड़ी लापरवाही सामने आई है।
311 हेल्पलाइन पर प्राप्त शिकायतों के विश्लेषण से यह खुलासा हुआ कि जनता सबसे ज्यादा इसी एजेंसी के कार्यक्षेत्र में परेशान है। बावजूद इसके, अब तक संबंधित एजेंसी पर कोई ठोस दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई है।
10 हजार नई लाइटों की स्थापना की योजना भी प्रशासनिक देरी का शिकार है। पिछला टेंडर ठेकेदार की लापरवाही के कारण निरस्त करना पड़ा, जिससे शहर के कई अंधेरे क्षेत्रों को रोशन करने का काम महीनों पिछड़ गया। अब 28 मई को नए टेंडर की प्रक्रिया तय की गई है, जो विभाग की कार्यक्षमता पर सवालिया निशान लगाती है।
वित्तीय बचत बनाम जमीनी अंधेरा- बैठक के अंत में महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने विभाग को जनता के प्रति जवाबदेह बनने की नसीहत दी। हालांकि, 6000 किलोवाट लोड कम होने से प्रतिमाह 22 लाख रुपए की संभावित बचत का आंकड़ा पेश किया गया है, लेकिन यह सफलता तब तक कागजी है जब तक शहर की हर गली और उद्यान पूरी तरह प्रकाशित न हो जाए।
अपर आयुक्त श्रृंगार श्रीवास्तव को निर्देश दिए गए हैं कि 2019 से पूर्व की गेटेड कॉलोनियों के बिजली बिलों का विवाद सुलझाने के लिए पार्षदों के माध्यम से डेटा जुटाया जाए। अब शहर की नजरें 28 मई के टेंडर और आगामी 10 दिनों में उद्यानों के सुधार कार्य पर टिकी हैं।
दिन के उजाले में बिजली की बर्बादी..
विद्युत विभाग ने दावा किया कि 24 घंटे जलने वाली लाइटों की संख्या 20,872 से घटकर 5,300 कर दी गई है, लेकिन यह आंकड़ा खुद एक बड़ी नाकामी का खुलासा करता है। स्मार्ट सिटी का दावा करने वाले शहर में 5,300 इकाइयां आज भी दिन में जलकर राजस्व का नुकसान कर रही हैं।
करोड़ों के निवेश के बाद भी सीसीएमएस तकनीक का पूर्ण क्रियान्वयन न होना विभाग की सुस्ती को दर्शाता है। इसके अलावा, शहर में 10 हजार ऐसे स्थान चिह्नित किए गए हैं जहां खंभे तो मौजूद है, लेकिन अब तक एलईडी लाइटों का संयोजन नहीं किया जा सका है। महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने इन सभी स्थानों पर तत्काल लाइटें फिट करने के सख्त निर्देश अधिकारियों को दिए हैं।
केबलों का मकड़जाल और अधूरी योजनाएं, सुंदरता पर ग्रहण
शहर की सड़कों पर बिजली और इंटरनेट के तारों का जो अव्यवस्थित जाल फैला है, उसने न केवल शहर की सुंदरता बिगाड़ी है, बल्कि सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा पैदा कर दिया है।
महापौर ने निर्देश दिया कि किसी एक सड़क को मॉडल के रूप में विकसित कर वहां से इन अनावश्यक केबलों को पूरी तरह हटाया जाए, ताकि नागरिकों को वास्तविक बदलाव का अहसास हो सके।
साथ ही, 22 मालवा वाटिकाओं का काम लंबे समय से अधूरा पड़ा है। ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति का खुलासा करते हुए बैठक में बताया गया कि 29 गांवों में से केवल 19 गांवों में ही हाईमास्ट की स्थापना हो पाई है, शेष 10 गांव अब भी योजना के पूर्ण होने का इंतजार कर रहे हैं।
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