दो, पांच और 29 प्लॉट बेचने वाला भी भू-माफिया: तीन पर एफआईआर के आदेश; लेकिन अवैध कॉलोनियों पर प्रशासन की सख्ती सवालों के घेरे में
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
जिले में अवैध कॉलोनियों का कारोबार प्रशासनिक दावों को लगातार चुनौती दे रहा है। अब जिला प्रशासन ने साफ कर दिया है कि दो, पांच या 29 भूखंडों का अवैध विक्रय करने वाला भी भू-माफिया की श्रेणी में आएगा और उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज होगी।
तीन मामलों में कार्रवाई के आदेश जारी कर दिए हैं, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि जब पूर्व में दिए ऐसे ही आदेश धूल फांकते रहे और अवैध प्लॉटिंग का कारोबार नहीं रुका, तो इस बार क्या बदलेगा? प्रशासनिक विफलता, राजनीतिक संरक्षण और कमजोर पुलिस कार्रवाई ने अवैध कॉलोनाइजरों के हौसले इतने बुलंद कर दिए हैं कि वे खुलेआम लोगों को यह भरोसा दिला रहे हैं कि कार्रवाई के बाद भी कॉलोनियां नहीं हटेंगी।
आदेश बहुत, कार्रवाई कम...इसलिए नहीं रुका अवैध कॉलोनियों का कारोबार.. जिला प्रशासन और नगर निगम वर्षों से अवैध कॉलोनियों पर कार्रवाई के दावे करते रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट दिखाई देती है।
पूर्व में तत्कालीन एडीएम ने छोटे-छोटे भूखंडों का अवैध विक्रय करने वालों पर एफआईआर दर्ज कराने के आदेश दिए थे। नगर निगम अधिकारियों को भी पत्राचार किया गया, लेकिन अधिकांश मामलों में न तो पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की और न ही दोषियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई हुई।
यही कारण है कि जिन लोगों पर प्रकरण दर्ज हुए, वे भी आज तक भूखंडों की खरीद-बिक्री का कारोबार करते रहे और नई अवैध कॉलोनियां विकसित होती रहीं।
राजनीतिक संरक्षण बना सबसे बड़ा कवच?... सूत्रों का कहना है कि कथित भू-माफियाओं को राजनीतिक संरक्षण मिलने के कारण कई मामलों में एफआईआर तक दर्ज नहीं हो पाती। जिन मामलों में प्रकरण दर्ज भी हो जाते हैं, वे वर्षों तक न्यायालयों और विभागीय फाइलों में अटके रहते हैं। न सजा होती है और न ही अवैध कारोबार पर रोक लगती है।
इन पर आरोप
ग्राम काली बिल्लोद (देपालपुर) में अनिल पिता लक्ष्मीदत्त शर्मा, निवासी सागोर (जिला धार) पर बिना सक्षम अनुमति कॉलोनी विकसित करने का आरोप।
देपालपुर क्षेत्र में पुष्पाबाई पति विजय मेहता, निवासी कंचनबाग, इंदौर द्वारा छोटे-छोटे भूखंडों की रजिस्ट्री कर विक्रय करने का मामला।
ग्राम पिपल्या मल्हार, तहसील राऊ में अवैध प्लॉटिंग कर भूखंडों का विक्रय करने का मामला।
इन सभी मामलों में संबंधित खसरों के कॉलम नंबर-12 में भूमि को अवैध कॉलोनी के रूप में दर्ज करने की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है।
भू-माफियाओं का भरोसा
‘एक-दो साल की सजा होगी, कॉलोनी नहीं हटेगी'
सूत्रों के अनुसार कई अवैध कॉलोनाइजर खरीदारों से खुलेआम कहते हैं कि प्रशासन कार्रवाई करेगा तो ज्यादा से ज्यादा एक-दो साल की सजा होगी, लेकिन कॉलोनी से किसी को हटाया नहीं जाएगा। यही संदेश अवैध कारोबारियों के लिए सबसे बड़ा सुरक्षा कवच बन गया है और इसी मानसिकता के कारण कार्रवाई के बावजूद नई अवैध कॉलोनियां लगातार सामने आ रही हैं।
पहले जारी हुए एफआईआर आदेशों का क्या हुआ?
जिन अधिकारियों ने कार्रवाई नहीं की, क्या उनकी जिम्मेदारी तय होगी?
राजनीतिक संरक्षण प्राप्त कथित भू-माफियाओं पर भी क्या समान कार्रवाई होगी?
क्या सिर्फ तीन एफआईआर से जिले में फैले अवैध कॉलोनियों के नेटवर्क पर रोक लग जाएगी?
इंदौर में अवैध कॉलोनियों का कारोबार केवल भू-माफियाओं की वजह से नहीं, बल्कि प्रशासनिक ढिलाई, कमजोर पुलिस कार्रवाई और जवाबदेही के अभाव से भी फल-फूल रहा है। जब तक आदेशों को कागज से निकालकर कठोर कानूनी कार्रवाई, दोषियों को सजा और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक ‘भू-माफिया के खिलाफ अभियान’ केवल सरकारी दावों तक ही सीमित रहेगा।
तीन मामलों में एफआईआर दर्ज किए जाने के आदेश
अपर कलेक्टर एवं प्रभारी कॉलोनी सेल रिंकेश कुमार वैश्य के अनुसार शिकायतों और जांच के आधार पर तीन मामलों में अवैध कॉलोनी विकसित करना सिद्ध होने पर एफआईआर दर्ज कराने के आदेश दिए गए हैं।
भू-माफिया अभियान के दावों की भी खुल रही पोल... पूर्व सरकार ने भू-माफिया अभियान चलाकर करोड़ों रुपए की सरकारी भूमि मुक्त कराने का दावा किया था, लेकिन जिन लोगों को जमीन का कब्जा वापस मिला, उनमें से कई आज भी निर्माण की अनुमति के लिए भटक रहे हैं। दूसरी ओर, नए क्षेत्रों में अवैध कॉलोनियां विकसित होती रहीं और प्रशासन उन्हें समय रहते रोकने में विफल रहा।
अपनी जमीन तक नहीं बचा पा रहा प्रशासन... सबसे गंभीर स्थिति यह है कि सरकारी जमीनों पर लगातार कब्जे हो रहे हैं। यदि प्रशासन अपनी ही जमीनों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं कर पा रहा, तो निजी कृषि भूमि पर अवैध कॉलोनियों को रोकने के दावे कितने प्रभावी हैं, यह बड़ा सवाल है। शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में बिना अनुमति प्लॉटिंग का सिलसिला आज भी जारी है।
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