इनके खिलाफ संतों की बैठक पुलिस ने रोकी: आश्रम में ताला लगाने का आरोप; लगाए ‘चंदा चोरों, अयोध्या छोड़ो’ के नारे
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, अयोध्या।
राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले को लेकर अयोध्या में संतों की नाराजगी बढ़ती जा रही है। मंगलवार को कारसेवकपुरम के पास स्थित ओम आश्रम में पूर्व ट्रस्टी चंपत राय के खिलाफ बुलाई गई संतों की बैठक को पुलिस ने रोक दिया।
संतों का आरोप है कि बैठक के दौरान पुलिस आश्रम पहुंची और वहां मौजूद संतों को बाहर निकालकर परिसर में ताला लगा दिया।
पुलिस का कहना है कि संतों को बैठक से जबरन नहीं निकाला गया, बल्कि पुलिस के पहुंचने से पहले ही वे स्वयं बाहर आ गए थे।
इसके बाद उन्होंने नारेबाजी शुरू की। घटना के बाद संतों ने ‘चंदा चोरों, अयोध्या छोड़ो’ के नारे लगाए और चढ़ावा चोरी की निष्पक्ष जांच की मांग की।
कंप्यूटर बाबा ने बुलाई थी बैठक
बैठक प्रकाशानंद गिरि उर्फ कंप्यूटर बाबा ने बुलाई थी। इसमें जानकीघाट बड़ा स्थान के महंत जन्मेजय शरण, महामंडलेश्वर परमानंद गिरि, महंत दिलीप दास समेत करीब 8 से 10 संत शामिल हुए थे।
संतों का आरोप है कि बैठक शुरू होने के बाद पुलिस वहां पहुंची और बैठक रोकने के लिए कहा। जब संतों ने इसका कारण पूछा तो उन्हें कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया।
कुछ संतों को बैठक में शामिल होने से रोके जाने और कुछ को कथित तौर पर नजरबंद किए जाने की बात भी संतों ने कही है।
संत बोले- छोटे आरोपियों पर कार्रवाई, बड़े नामों को बचाया जा रहा
संतों ने आरोप लगाया कि चढ़ावा चोरी के मामले में छोटे स्तर पर शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई, लेकिन प्रभावशाली लोगों की भूमिका की निष्पक्ष जांच नहीं हो रही है।
उनका कहना है कि प्रशासन आरोपियों को बचाने की कोशिश कर रहा है और इसी वजह से संतों की बैठक तक नहीं होने दी जा रही।
महामंडलेश्वर परमानंद गिरि ने कहा कि संत समाज चोरी रोकने में सफल नहीं हो सका, इसके लिए वे रामलला से क्षमा मांगते हैं। उन्होंने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई व जरूरत पड़ने पर NSA के तहत कार्रवाई की मांग की।
उन्होंने कहा कि जांच केवल सामने आए आरोपियों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि चढ़ावे की चोरी में बड़ी भूमिका निभाने वाले लोगों तक भी पहुंचना चाहिए।
कंप्यूटर बाबा बोले- जरूरत पड़ी तो एक लाख संतों के साथ आंदोलन
कंप्यूटर बाबा ने कहा कि संत समाज चढ़ावा चोरी की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर बड़ा आंदोलन करेगा। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ी तो एक लाख संतों के साथ अयोध्या पहुंचकर आंदोलन किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि संत रामलला के दर्शन कर उनसे क्षमा मांगेंगे और मामले को लेकर जल्द ही बड़ी बैठक आयोजित की जाएगी। बैठक के बाद मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर मामले की सीबीआई जांच की मांग करने की बात भी कही गई है।
SIT की रिपोर्ट में चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा का नाम नहीं होने का दावा
इस बीच राम मंदिर में चढ़ावा चोरी की जांच के लिए गठित SIT की रिपोर्ट को लेकर भी मामला चर्चा में है। जानकारी के मुताबिक, SIT की फाइनल रिपोर्ट में पूर्व महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के नाम आरोपी के तौर पर शामिल नहीं हैं। चढ़ावा चोरी के मामले में गिरफ्तार किए गए अन्य आरोपी पहले से जेल में हैं।
रिपोर्ट को राम मंदिर ट्रस्ट की आगामी बैठक में रखे जाने की बात कही जा रही है। हालांकि, रिपोर्ट में किन लोगों की भूमिका सामने आई है और किनके खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की गई है, इसका पूरा विवरण आधिकारिक रूप से सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा।
7 जून को सामने आया था चढ़ावा चोरी का मामला
राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी का मामला 7 जून को सामने आया था। इसके बाद जांच शुरू हुई और 25 जून को ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की शिकायत पर FIR दर्ज की गई। इसमें रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू समेत आठ लोगों को आरोपी बनाया गया था।
FIR दर्ज होने के बाद पुलिस ने आठों आरोपियों को गिरफ्तार किया था। उन पर मंदिर में चढ़ावा गिनने के दौरान नकदी और गहनों की चोरी करने का आरोप है। सभी आरोपी फिलहाल जेल में हैं।
SIT की प्रारंभिक जांच के बाद चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पदों से इस्तीफा दिया था। ट्रस्ट ने दोनों के इस्तीफे स्वीकार कर लिए थे।
सुप्रीम कोर्ट में भी चल रही है सुनवाई
चढ़ावा चोरी मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी याचिकाएं दाखिल की गई हैं। याचिकाओं में मामले की जांच CBI को सौंपने और मंदिर में दान के प्रबंधन की समीक्षा के लिए विशेषज्ञ समिति गठित करने जैसी मांगें की गई हैं।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद जांच के लिए नई SIT गठित की गई थी, जिसमें वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को शामिल किया गया। मामले की जांच की प्रगति पर अदालत की भी नजर है।
ऐसे में अयोध्या में संतों की बैठक रोके जाने की घटना ने चढ़ावा चोरी के मामले को लेकर चल रही सियासत और संत समाज की नाराजगी को फिर सामने ला दिया है। अब संतों की अगली बैठक और सरकार के समक्ष रखे जाने वाले ज्ञापन पर सबकी नजर रहेगी।
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