सालभर से डॉक्टर को गोली दे रही पुलिस: 12 लाख की चोरी के बाद अफसरों और थाने के चक्कर लगा रहा पीड़ित
KHULASA FIRST
संवाददाता

सीसीटीवी में कैद हुए चोर पकड़े भी गए, लेकिन आज तक माल की रिकवरी नहीं
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
देशभक्ति और जनसेवा की कसमें खाकर वर्दी पहनने वाले आला अफसरों से लेकर सिपाही तक ने एक डॉक्टर को चकरघिन्नी बनाकर रख दिया। 12 लाख की चोरी में आरोपी सीसीटीवी कैमरे में कैद होने के साथ दूसरे थाने में गिरफ्तार भी हो गए।
वहां की पुलिस ने चार चोरियों का खुलासा कर माल भी बरामद कर लिया, लेकिन सालभर बाद भी लसूड़िया पुलिस माल बरामद करना तो दूर अपने यहां हुई चोरियों का खुलासा तक नहीं कर पाई।
पीड़ित डॉक्टर केस दर्ज होने के बाद से आज तक थाने और अफसरों के चक्कर लगा रहा है, लेकिन उसे इंसाफ नहीं मिल रहा। परेशान डॉक्टर अब पुलिस कमिश्नर कार्यालय तक गुहार लगाने जा पहुंचा।
फीनिक्स टाउनशिप निवासी डॉक्टर पंकज बोकरे ने पुलिस कमिश्नर संतोष सिंह को दी शिकायत में बताया कि 7 मई 2025 को वे परिवार सहित कुलदेवी दर्शन के लिए नरसिंहपुर गए थे। घर पर लगे सीसीटीवी कैमरे मोबाइल से कनेक्ट हैं।
दो दिन बाद मोबाइल पर घर के कैमरे ऑफलाइन दिखे। लास्ट रिकॉर्डिंग देखने पर दो संदिग्ध युवक रैकी के बाद घर में घुसते नजर आए। दोनों ने सिर पर टोपी पहनी थी। हाथों में ग्लव्ज थे।
एक के काले रंग के जूते थे, जिन पर नाइकी का निशान था। छोटे भाई को तुरंत घर भेजा तो उसने घर का ताला टूटा और सामान अस्त-व्यस्त होने की बात बताई। अगले दिन इंदौर लौटकर जांचा तो अलमारी से सोने-चांदी के जेवर, नकदी सहित करीब 12 लाख रुपए का सामान गायब था।
मामले में लसूड़िया थाने में केस (अपराध क्रमांक 508/2025) दर्ज कराया गया। डॉक्टर बोकरे का आरोप है कि अगले ही दिन अखबार में अन्य चोरियों की खबर पढ़कर वे बाणगंगा क्षेत्र के कालिंदी गोल्ड पहुंचे, जहां पता चला कि उनके घर चोरी करने वाली गैंग ने ही यहां भी चोरी की है।
उन्होंने अपने घर और कालिंदी गोल्ड के सीसीटीवी फुटेज लसूड़िया पुलिस को सौंपे। हालांकि फुटेज देखते ही घर पहुंचे पुलिसकर्मियों ने एक चोर को पहचान भी लिया, लेकिन कार्रवाई आगे नहीं बढ़ी।
दोबारा संदिग्ध पहुंचे तो पुलिसकर्मी बोले- वहम है तुम्हारा
डॉ. पंकज बोकरे के मुताबिक मामला तब और संदिग्ध हो गया, जब 16 और 17 मई की रात दो युवक बाइक से उनके घर के सामने संदिग्ध हालत में दिखाई दिए। उनके जूते वही थे, जो चोरी के सीसीटीवी फुटेज में चोरों ने पहने थे। 18 मई को वे िकायत लेकर थाने पहुंचे तो टीआई तारेश सोनी के कहने पर 19 मई उनके घर आए एसआई अरुण मलिक, सिपाही अजय प्रजापत व अन्य पुलिसकर्मियों ने इसे वहम बताकर मामला हलके में लिया। जांचकर्ता एसआई नरेंद्र जायसवार ने भी अनसुनी की।
22 मई को उन्होंने तत्कालीन डीसीपी अभिनय विश्वकर्मा से शिकायत की तो पता चला कि राजेंद्र नगर पुलिस ने आरोपियों को पकड़ लिया था। आरोपियों में ईशाक खान, शैलेंद्र सोलंकी, विकास उर्फ बंटी मीणा और संजय उर्फ हाईड्रा मालवीय के नाम सामने आए। 25 मई को वे खुद राजेंद्र नगर थाने पहुंचे तो पता चला कि उन्होंने अपने थाना क्षेत्र में हुई चोरी का माल बरामद करते हुए आरोपियों को जेल भिजवा दिया। बावजूद इसके लसूड़िया पुलिस ने न तो उन्हें आधिकारिक सूचना दी और न चोरी का माल बरामद किया। आरोपियों में से एक शैलेंद्र सोलंकी उनके घर से 700 मीटर दूर ही किराए से रहता था।
इसके बाद वे 27 मई को पुन: डीसीपी विश्वकर्मा से मिले तो कहा कि आरोपियों की जमानत के बाद गिरफ्तारी कर माल बरामद किया जाएगा। अभी रिमांड पर लेंगे तो चोर माल रिकवर नहीं कराएंगे। वे पुलिस की सूचना का इंतजार करने लगे, लेकिन इस बीच अगस्त 2025 में पुलिस शैलेंद्र सोलंकी को छोड़कर अन्य आरोपियों को रिमांड पर ले आई और बिना किसी रिकवरी के उन्हें जेल भिजवा दिया, जबकि उन्हें इसकी सूचना तक नहीं दी गई। पुलिसकर्मी बार-बार दशहरे के बाद, दीवाली के बाद और नए साल के बाद कार्रवाई का भरोसा देते रहे। यहां तक कि आरोपियों के जमानत पर छूटने के बाद भी उन्हें पुन: गिरफ्तार करने का आश्वासन दिया जाता रहा। इस बीच उन्होंने 17 नवंबर को सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत की, जो कि अभी भी क्लोज नहीं हुई है।
मामले की निष्पक्ष जांच के साथ दोबारा हो गिरफ्तारी
डॉक्टर बोकरे के मुताबिक जनवरी 2026 के बाद से थाने और डीसीपी कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं। डीसीपी अभिनय विश्वकर्मा के बाद डीसीपी कुमार प्रतीक से शिकायत की। इसके बाद अभी डीसीपी अमिनसिंह राठौड़ से भी शिकायत कर चुके हैं। अब उन्होंने पुलिस कमिश्नर संतोष सिंह से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच, विशेष टीम गठन, आरोपियों की दोबारा गिरफ्तारी और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई की मांग की है।
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