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रात 12 बजे घर पहुंची पुलिस बोली- एफआईआर हो गई: 64 वर्षीय किसान हाई कोर्ट पहुंचा; बाणगंगा पुलिस पर गंभीर आरोप

KHULASA FIRST

संवाददाता

09 मई 2026, 3:54 pm
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रात 12 बजे घर पहुंची पुलिस बोली- एफआईआर हो गई

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
पुलिस की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। विजय नगर और लसूड़िया थाना विवाद के बाद अब बाणगंगा थाना पुलिस पर 64 वर्षीय बुजुर्ग किसान को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने, आधी रात दबाव बनाने और बिना एफआईआर गिरफ्तारी की धमकी देने जैसे गंभीर आरोप लगे हैं। मामले ने तूल तब पकड़ा, जब बुजुर्ग ने सीधे हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ का दरवाजा खटखटाया।

बाणगंगा क्षेत्र निवासी किसान जसराज मेहता ने हाई कोर्ट में दायर याचिका में आरोप लगाया है कि पुराने जमीन विवाद के नाम पर उन्हें लगातार थाने बुलाया जा रहा था और समझौता कर पैसे लौटाने का दबाव बनाया जा रहा था। उनका कहना है कि पुलिस न तो निष्पक्ष जांच कर रही और न ही उन्हें शिकायत की प्रति उपलब्ध कराई गई।

याचिका के अनुसार मामला 15 से 20 साल पुराने कथित प्लॉट विवाद से जुड़ा है। हालांकि मेहता का दावा है कि उन्होंने कभी कोई प्लॉट बेचा ही नहीं। जिस अवैध कॉलोनाइजेशन की शिकायत उनके खिलाफ की गई, उस क्षेत्र में उनके नाम कोई जमीन तक नहीं है।

फरियादी ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उन्हें कई बार बयान के लिए थाने बुलाया, लेकिन तीन बार पहुंचने के बावजूद उनका बयान दर्ज नहीं किया गया। 2 अप्रैल को थाने पहुंचने पर यह कहकर लौटा दिया गया कि थाना प्रभारी छुट्टी पर हैं।

बाद में आवेदन लिखवाकर अगली तारीख दे दी गई। 19 अप्रैल को फिर बुलाया, लेकिन तब भी बयान नहीं लिया गया।

समझौता करने का बनाया जा रहा दबाव... जसराज मेहता का आरोप है कि बयान दर्ज करने के बजाय उन पर लगातार समझौता करने और पैसे लौटाने का दबाव बनाया जाता रहा। उन्होंने थाना बाणगंगा के कुछ पुलिसकर्मियों पर पक्षपात और मिलीभगत के भी आरोप लगाए हैं।

मामले का सबसे गंभीर हिस्सा 20 अप्रैल की रात का बताया गया है। याचिका में दावा किया गया कि रात करीब 12 बजे आठ पुलिसकर्मी उनके घर आए और कहा कि आपके खिलाफ एफआईआर दर्ज हो चुकी है तथा आपको गिरफ्तार करने आए हैं, जबकि उस समय तक कोई एफआईआर दर्ज नहीं थी।

मेहता ने कहा पूरी घटना घर में लगे सीसीटीवी कैमरों में रिकॉर्ड हुई है। फरियादी का कहना है कि वे बुजुर्ग हैं और कई बीमारियों से पीड़ित हैं। इसके बावजूद लगातार रात में घर पहुंचकर मानसिक दबाव बनाया गया।

उन्होंने पुलिस कमिश्नर और डीसीपी जोन-3 को भी शिकायत दी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। मेहता ने यह भी आरोप लगाया कि उनकी बेटी के प्लॉट पर अवैध कब्जा किया गया है।

इस मामले में भी वे अलग से कानूनी कार्रवाई की तैयारी कर रहे हैं। उनके वकील की ओर से भेजे गए नोटिस में कुछ लोगों और थाना बाणगंगा के पुलिसकर्मियों की मिलीभगत का आरोप लगाया गया है।

सीसीटीवी फुटेज कराए उपलब्ध
अधिवक्ता अजय मिश्रा ने दावा किया कि उनके पास लगातार तीन दिन के सीसीटीवी फुटेज हैं, जिनमें देर रात पुलिसकर्मी घर के बाहर आते-जाते दिखाई दे रहे हैं। पुलिस का रवैया जांच से ज्यादा दबाव बनाने वाला था।

अब यह मामला हाई कोर्ट पहुंचने के बाद पुलिस प्रशासन के लिए नई मुश्किल खड़ी कर सकता है। यदि कोर्ट ने सीसीटीवी फुटेज और आरोपों को गंभीर माना तो पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र जांच के आदेश भी दिए जा सकते हैं।

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