बहू-बेटे की प्रताड़ना से परेशान थे माता-पिता: प्रशासन ने ऐसे दिलाई राहत; एसडीएम कोर्ट ने दिया मकान करने का आदेश
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
शहर में एक बुजुर्ग दंपती को लंबे समय से झेलनी पड़ रही पारिवारिक प्रताड़ना के बीच आखिरकार प्रशासन से राहत मिली है। वृद्धजन विशेष जनसुनवाई में एसडीएम कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए छोटे बेटे के परिवार को मकान का हिस्सा खाली कर बुजुर्ग दंपती को कब्जा सौंपने के आदेश दिए हैं।
प्रशासन ने आदेश के पालन के लिए एक सप्ताह की समय-सीमा तय की है। यदि तय समय में मकान खाली नहीं किया गया, तो प्रशासन पुलिस बल की मदद से कार्रवाई करेगा।
तीन मंजिला मकान में साथ रहते थे दोनों बेटे
मामला शिवाजी नगर निवासी हीरालाल कश्यप और उनकी पत्नी धर्मा देवी कश्यप से जुड़ा है। बताया गया कि दंपती अपने तीन मंजिला मकान के ग्राउंड फ्लोर पर रहते हैं, जबकि पहली और दूसरी मंजिल पर उनके दोनों बेटों का परिवार निवास करता है।
बुजुर्ग दंपती ने प्रशासन को दी शिकायत में आरोप लगाया था कि दोनों बेटे और बहुएं उनकी देखभाल नहीं करते। विशेष रूप से छोटी बहू के व्यवहार से वे काफी परेशान थे।
दंपती का कहना था कि रिश्तेदारों और बेटियों के घर आने पर अक्सर विवाद की स्थिति बन जाती थी। छोटी बहू मेहमानों के आने-जाने पर आपत्ति जताती थी और बात-बात पर तनाव खड़ा हो जाता था।
मानसिक तनाव से गुजर रहा था परिवार
धर्मा देवी कश्यप ने अपनी पीड़ा बताते हुए कहा कि लगातार घरेलू विवादों के कारण वे लंबे समय से मानसिक तनाव में थीं। उन्होंने बताया कि परिवार में आए दिन होने वाले झगड़ों से घर का माहौल खराब हो गया था।
कई बार स्थिति इतनी बिगड़ जाती थी कि उन्हें अपने ही घर में असहज महसूस होने लगा था।बुजुर्ग दंपती ने कई बार बेटे और बहू से मकान खाली करने को कहा, लेकिन उनकी ओर से कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली।
भरण-पोषण अधिनियम के तहत की शिकायत
करीब तीन महीने पहले कश्यप दंपती ने माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण अधिनियम के तहत आवेदन प्रस्तुत किया था। आवेदन में उन्होंने बेटों और पुत्रवधुओं द्वारा प्रताड़ित किए जाने की शिकायत दर्ज कराई थी।
मामले की सुनवाई के बाद सोमवार को आयोजित विशेष जनसुनवाई शिविर में घनश्याम धनगर ने छोटे बेटे के परिवार को मकान खाली कर कब्जा दंपती को सौंपने का आदेश जारी किया।
आदेश नहीं मानने पर होगी पुलिस कार्रवाई
दंपती के अधिवक्ता अमित मंडलोई ने बताया कि आदेश में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि यदि निर्धारित समय सीमा में मकान खाली नहीं किया गया तो तहसीलदार पुलिस बल के साथ कार्रवाई कर मकान खाली कराएंगे।
उन्होंने कहा कि अक्सर बुजुर्ग माता-पिता कानूनी प्रक्रिया और अदालतों के चक्कर लगाने में असमर्थ होते हैं। ऐसे मामलों में प्रशासनिक हस्तक्षेप उन्हें सम्मान और सुरक्षा दिलाने का काम करता है।
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