लॉरेंस गैंग से जुड़े गैंगस्टर और गुंडे बदमाशों के नामों का होगा खुलासा: जेल से चल रहा था फिरौती का खेल; बिल्डरों से रंगदारी की साजिश, गुर्गों को मिला था गैंग खड़ा करने का फरमान
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के नेटवर्क को लेकर चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। इंदौर क्राइम ब्रांच की एसआईटी जांच में सामने आया है कि गुजरात की साबरमती जेल में बंद लॉरेंस बिश्नोई और उसके गैंग के सदस्यों के सीधे संपर्क में रहकर प्रदेश में संगठित अपराध का जाल बिछाने की साजिश रची जा रही थी।
गैंग के सदस्य राजपाल चंद्रावत उर्फ रत्नाखेड़ी को जेल से ही निर्देश दिए गए थे कि वह इंदौर व आसपास के इलाकों में स्थानीय बदमाशों को जोड़कर एक मजबूत गैंग तैयार करे और बड़े बिल्डरों व नामी कारोबारियों से रंगदारी वसूले, ताकि प्रदेश में भी लॉरेंस का नाम और दबदबा बढ़ाया जा सके।
क्राइम ब्रांच के मुताबिक खरगोन जेल से रिमांड पर लाए गए राजपाल से पूछताछ में कई सनसनीखेज तथ्य सामने आए हैं। जांच में खुलासा हुआ कि गैंग का फोकस इंदौर, भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर जैसे बड़े शहरों पर था, जहां के बिल्डरों, प्रॉपर्टी डीलरों और हाईप्रोफाइल कारोबारियों की सूची तैयार की गई थी।
इसके आधार पर टारगेट तय कर करोड़ों रुपए की रंगदारी वसूलने की योजना बनाई जा रही थी।
फायरिंग से मचाई दहशत, 10 करोड़ की मांग
जांच में यह भी सामने आया कि गैंग के सक्रिय सदस्य हैरी बॉक्सर के इशारे पर इंदौर के बायो-कॉटन कारोबारी दिलीपसिंह राठौर के घर पर फायरिंग करवाई गई थी। इस वारदात के जरिये करीब 10 करोड़ रुपए की रंगदारी मांगी गई थी। पुलिस को शंका है कि यह सिर्फ शुरुआत थी और इसी पैटर्न पर अन्य कारोबारियों को भी निशाना बनाया जाता।
रिश्तेदारों के जरिये गैंग से जुड़ा, विदेश जैसे प्लेटफॉर्म से संपर्क... राजपाल ने खुलासा किया कि वह अपने रिश्तेदार लोकेंद्र के जरिये गैंग के संपर्क में आया था। कुछ साल पहले उत्तर प्रदेश में उसकी मुलाकात गैंग से जुड़े लोगों से करवाई गई, जिसके बाद पंजाब में हैरी बॉक्सर से सीधी मुलाकात हुई। कॉल ट्रेसिंग से बचने के लिए गैंग के सदस्य फेसटाइम जैसे प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते थे।
इंटरस्टेट कनेक्शन और पुराने केस भी जुड़े
जांच में यह भी सामने आया कि राजपाल का नेटवर्क सिर्फ मध्य प्रदेश तक सीमित नहीं था। महाराष्ट्र के नांदेड़ में हुई एक घटना में हथियार सप्लाई के आरोप में उसका नाम सामने आ चुका है, जिसमें राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) भी उससे पूछताछ कर चुकी है। वहीं राजपाल और उसका साथी योगेश भाटी पहले से ही एजेंसियों के रडार पर थे। दोनों से पंजाब के मोहाली स्थित इंटेलिजेंस ऑफिस पर रॉकेट हमले के मामले में भी पूछताछ हो चुकी है। सूत्रों के मुताबिक दोनों न सिर्फ रेकी, बल्कि हथियारों की सप्लाई में भी सक्रिय भूमिका निभा रहे थे।
पूरी साजिश का खुलासा अभी बाकी
डीसीपी (क्राइम) राजेश त्रिपाठी के अनुसार राजपाल अभी पूरी तरह सहयोग नहीं कर रहा और कई अहम जानकारियां छिपा रहा है। इसके बावजूद तकनीकी साक्ष्य, कॉल डिटेल और अन्य इनपुट के आधार पर जांच तेजी से आगे बढ़ाई जा रही है। पुलिस जल्द ही योगेश भाटी को भी रिमांड पर लेने की तैयारी में है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह मामला सिर्फ एक-दो घटनाओं तक सीमित नहीं, बल्कि अंतरराज्यीय संगठित अपराध नेटवर्क से जुड़ा हुआ है। आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे और गिरफ्तारियां संभव हैं।
फिलहाल क्राइम ब्रांच इस पूरे नेटवर्क को जड़ से खत्म करने के लिए आक्रामक कार्रवाई में जुटी है, लेकिन इस खुलासे ने यह जरूर साबित कर दिया है कि जेल में बंद गैंगस्टर भी बाहर अपराध की पटकथा लिख रहे हैं।
जेल से निर्देश, मैदान में गुर्गे- ऐसे बन रहा था नेटवर्क... पूछताछ में सामने आया कि राजपाल सीधे तौर पर लॉरेंस बिश्नोई गैंग के संपर्क में था और साबरमती जेल से उसे लगातार निर्देश मिल रहे थे। उसे कहा गया था कि इंदौर में छोटे-मोटे अपराधियों को जोड़कर गैंग का विस्तार करे और पहले रेकी, फिर धमकी और जरूरत पड़ने पर फायरिंग कर डर का माहौल बनाकर वसूली शुरू करे। पुलिस को शक है कि इसी कॉर्पोरेट स्टाइल मॉडल पर प्रदेश में संगठित रंगदारी नेटवर्क खड़ा किया जा रहा था।
बड़े नाम भी थे निशाने पर
एसआईटी जांच में इंदौर के कई बड़े बिल्डरों और कारोबारियों के नाम सामने आए हैं, जिनकी गतिविधियों पर नजर रखी जा रही थी। हालांकि पुलिस ने आधिकारिक तौर पर सभी नाम सार्वजनिक नहीं किए हैं, लेकिन यह साफ है कि गैंग शहर में बड़े स्तर पर रंगदारी नेटवर्क स्थापित करने की तैयारी में था।
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