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एक ही स्थान पर मिलता है चारों धामों का पुण्य- यूपी का रहस्यमयी ‘मिनी चारधाम’: सीतापुर के नैमिषारण्य में 88 हजार ऋषियों की तपस्थली; कलयुग के प्रभाव से मुक्त माना जाता है यह पवित्र धाम

KHULASA FIRST

संवाददाता

10 मई 2026, 4:25 pm
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एक ही स्थान पर मिलता है चारों धामों का पुण्य- यूपी का रहस्यमयी ‘मिनी चारधाम’

खुलासा फर्स्ट, लखनऊ।
देश में चारधाम यात्रा की उमंग हर वर्ष लाखों श्रद्धालुओं को बद्रीनाथ, द्वारका, जगन्नाथ पुरी और रामेश्वरम की ओर खींचती है किंतु उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में एक ऐसा दिव्य तीर्थस्थल है, जहां इन चारों धामों का पुण्य एक ही स्थान पर प्राप्त हो जाता है।

यह पावन स्थली है नैमिषारण्य धाम, जिसे श्रद्धालु प्रेम से ‘मिनी चारधाम’ कहते हैं। धार्मिक मान्यता है कि यहां दर्शन-पूजन करने मात्र से चारों धामों की तीर्थयात्रा के समतुल्य पुण्य की प्राप्ति होती है।

यह स्थान कलयुग के प्रभाव से सर्वथा मुक्त माना गया है और यहां की अलौकिक आध्यात्मिक ऊर्जा श्रद्धालुओं को आत्मिक शांति एवं मोक्ष का अनुभव कराती है।

ब्रह्माजी के चक्र की नेमि गिरी थी इसी भूमि पर- पौराणिक मान्यताओं के अनुसार चक्रतीर्थ वही पवित्र स्थान है जहां ब्रह्माजी के मनोमय चक्र की नेमि गिरकर स्थिर हुई थी।

कहा जाता है कि 88 हजार ऋषि-मुनियों ने इसी भूमि पर घोर तपस्या की थी। आज भी यह पवित्र सरोवर अपने गोलाकार स्वरूप में श्रद्धा का अटूट केंद्र बना हुआ है, जहां श्रद्धालु स्नान और परिक्रमा कर जीवन के पापों से मुक्ति की कामना करते हैं।

गोमती तट पर बसी है यह रहस्यमयी धरती- उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में गोमती नदी के पावन तट पर स्थित नैमिषारण्य का वातावरण ही श्रद्धालुओं को दिव्य अनुभूति से भर देता है।

यहां हनुमान गढ़ी, दशाश्वमेध घाट, पंचप्रयाग सरोवर, सीता कुंड और दधीचि आश्रम जैसे अनेक पवित्र स्थल धाम की धार्मिक महिमा को और अधिक गरिमामय बनाते हैं।

फाल्गुन मास में आयोजित होने वाली 84 कोसी परिक्रमा में देशभर से लाखों श्रद्धालु सम्मिलित होते हैं।

वेदों और पुराणों की रचना हुई इसी तपोभूमि पर- नैमिषारण्य को वेदों और पुराणों की रचना स्थली के रूप में भी जाना जाता है। मान्यता है कि महर्षि वेदव्यास ने यहीं वेदों का संकलन किया और पुराणों का वाचन किया था।

इसी पावन भूमि पर ऋषि-मुनियों ने धर्म, ज्ञान और अध्यात्म की अनमोल धरोहर को संजोया। आज भी व्यास गद्दी और शुकदेव मंदिर उस गौरवशाली वैदिक परंपरा की जीवंत स्मृति बनाए हुए हैं।

एक परिसर में विराजते हैं चारों धामों के स्वरूप- नैमिषारण्य में महर्षि गोपालदास द्वारा स्थापित चारधाम मंदिर श्रद्धालुओं के लिए सर्वाधिक आकर्षण का केंद्र है।

इस अनूठे मंदिर परिसर में बद्रीनाथ, जगन्नाथ धाम, द्वारिकाधीश और रामेश्वरम धाम के दिव्य स्वरूप एक साथ विराजमान हैं।

यही कारण है कि इसे एक स्थान पर संपूर्ण चारधाम का दिव्य अनुभव कराने वाला तीर्थ माना जाता है और यहां आकर भक्त स्वयं को धन्य अनुभव करते हैं।

51 शक्तिपीठों में विशेष स्थान
माता सती का हृदय गिरा था यहां- नैमिषारण्य में स्थित ललिता देवी मंदिर इस धाम का प्रमुख शक्तिपीठ है, जिसे 51 शक्तिपीठों में सर्वोच्च स्थान प्राप्त है।

धार्मिक मान्यता है कि इस स्थान पर माता सती का हृदय गिरा था। नवरात्रि एवं अन्य विशेष पर्वों पर यहां हजारों की संख्या में श्रद्धालु मां ललिता के दर्शन हेतु पधारते हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

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