जलसंकट की आहट: महापौर ने मांगा इतने करोड़ का पैकेज; इतने लाख की आबादी पर पानी का दबाव
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
कमजोर मानसून के चलते इंदौर में आगामी गर्मी के दौरान जलसंकट की आशंका बढ़ने लगी है। सामान्य तौर पर करीब 37 इंच बारिश वाले शहर में इस बार अब तक लगभग 23 इंच वर्षा दर्ज होने का दावा किया गया है।
हालात को देखते हुए महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से जल प्रबंधन के लिए 50 करोड़ रुपए के विशेष पैकेज की मांग की है।
जलसंकट से निपटने की तैयारियों और संभावित उपायों पर चर्चा के लिए नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट और इंदौर नगर निगम सहित संबंधित विभागों के अधिकारियों की बैठक रखी गई है।
बैठक में शहर की जलापूर्ति व्यवस्था, वैकल्पिक स्रोतों और गर्मी में पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने जैसे मुद्दों पर चर्चा की जा रही है।
रोजाना 800 एमएलडी तक पानी की जरूरत
करीब 40 लाख की आबादी वाले इंदौर में घरेलू उपयोग के लिए प्रतिदिन लगभग 620 एमएलडी पानी की जरूरत बताई जाती है। औद्योगिक, व्यावसायिक, संस्थागत और अन्य जरूरतों को जोड़ने पर यह मांग 750 से 800 एमएलडी तक पहुंच जाती है।
वर्ष 2008 में भी शहर में करीब 20 इंच बारिश होने के कारण जलसंकट की स्थिति बनी थी। अब कम वर्षा के बीच एक बार फिर गर्मी में पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने की चुनौती सामने है।
डीमार्ट के पास नर्मदा पाइपलाइन फूटी, यातायात प्रभावित
जलसंकट की आशंकाओं के बीच गुरुवार सुबह बंगाली चौराहे से बायपास के बीच डीमार्ट के पास नर्मदा जलापूर्ति की पाइपलाइन फूट गई।
पाइपलाइन से तेज दबाव के साथ पानी निकलने के कारण सड़क पर पानी भर गया और यातायात प्रभावित हुआ। पानी भरने से अंडरपास भी बंद करना पड़ा।
शहर के कई इलाकों में पानी की जरूरत पूरी करने के लिए टैंकरों से आपूर्ति की जा रही है। पाइपलाइन में लीकेज और सप्लाई नेटवर्क में होने वाला नुकसान भी जल प्रबंधन के लिए बड़ी चुनौती है।
नर्मदा से रोज मिलता है करीब 440 एमएलडी पानी
विशेषज्ञों के मुताबिक, इंदौर की बड़ी आबादी नर्मदा जलापूर्ति पर निर्भर है। नर्मदा परियोजना से शहर को प्रतिदिन करीब 440 एमएलडी पानी मिलता है।
बताया जाता है कि लीकेज और अन्य कारणों से लगभग 22 प्रतिशत पानी का नुकसान हो जाता है। ऐसे में उपलब्ध पानी का बेहतर उपयोग और वितरण व्यवस्था में सुधार जरूरी है।
शहर में एक लाख से अधिक निजी बोरवेल हैं, जबकि नगर निगम के करीब 6,500 बोरवेल और हाइड्रेंट बताए जाते हैं।
केंद्रीय भूजल बोर्ड की 2025 की रिपोर्ट के हवाले से शहर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में भूजल की स्थिति गंभीर होने की बात कही गई है।
रिपोर्ट में भूजल दोहन का स्तर करीब 90 प्रतिशत बताया गया है। भूजल पर बढ़ती निर्भरता भविष्य में संकट को और गहरा सकती है।
पिछली गर्मियों में 700 टैंकरों से पहुंचाया था पानी
पिछली गर्मियों में बोरवेल पर निर्भर आबादी के करीब 40 प्रतिशत हिस्से को गंभीर जलसंकट का सामना करना पड़ा था। स्थिति संभालने के लिए लगभग 700 टैंकरों से पानी पहुंचाना पड़ा।
इस बार तालाबों में कम जलभराव, भूजल का लगातार दोहन और पाइपलाइन नेटवर्क में होने वाला नुकसान प्रशासन के सामने चुनौती बढ़ा सकते हैं।
शहर के 27 तालाबों पर टिकी उम्मीद
इंदौर में कुल 27 तालाब बताए जाते हैं, जिनमें से सात की निगरानी नगर निगम करता है। इन तालाबों की कुल क्षमता करीब 2,880 करोड़ लीटर है, जबकि पानी की उपलब्धता का एक अन्य आकलन लगभग 2,260 करोड़ लीटर बताया गया है। कम बारिश के कारण इस बार तालाबों में अपेक्षित जलभराव नहीं होने की चिंता है।
शहर के कई वार्डों में ओवरहेड टंकियां नहीं हैं। ऐसे क्षेत्रों में दूसरे वार्डों की टंकियों से पानी पहुंचाया जाता है, जिससे आपूर्ति के समय और मात्रा पर दबाव बढ़ता है। पिछले साल मालवा मिल स्थित हाइड्रेंट को भी पहली बार बंद करना पड़ा था।
कम बारिश और बढ़ती मांग के बीच इंदौर के लिए जलस्रोतों का बेहतर प्रबंधन, पाइपलाइन लीकेज पर नियंत्रण, भूजल संरक्षण और वैकल्पिक जलापूर्ति व्यवस्था मजबूत करना जरूरी होगा।
आने वाले महीनों में इन उपायों की प्रभावशीलता ही तय करेगी कि शहर गर्मी के दौरान संभावित जलसंकट से किस हद तक निपट पाता है।
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