धार में हिंदू समाज ने मनाई होली और दीपावली: भोज उत्सव समिति ने माना सहयोगियों का आभार
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, धार।
भोजशाला को लेकर वर्षों से चल रहे विवाद में शुक्रवार को बड़ा न्यायिक फैसला हुआ। हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने कहा भोजशाला का धार्मिक स्वरूप देवी वाग्देवी सरस्वती के मंदिर के रूप में स्थापित होता है। फैसले की जानकारी सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद हिंदू संगठनों ने जमकर जश्न मनाया।
भोजशाला के पास स्थित अखंड ज्योति परिसर में कार्यकर्ताओं ने होली खेली, आतिशबाजी की और मिठाइयां बांटकर खुशी जाहिर की। हिंदू नेता आशीष बसु ने कहा यह हिंदू समाज के लिए बड़ी जीत और खुशी का अवसर है।
भोजशाला आंदोलन का संघर्ष वर्षों पुराना है। वर्ष 2003 का आंदोलन सबसे बड़ा रहा, जिसमें करीब 1400 लोगों पर प्रकरण दर्ज हुए थे, जबकि तीन लोगों की मौत भी हुई। फैसले की कॉपी मिलने के बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी।
भोज उत्सव समिति ने जताई खुशी... भोज उत्सव समिति के अध्यक्ष सुमित चौधरी ने फैसले पर खुशी जताते हुए इसे हिंदू समाज के वर्षों पुराने संघर्ष की जीत बताया। कहा 1935 में हिंदू भोज समिति की स्थापना करने वाले कार्यकर्ताओं ने इस मुद्दे के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया था।
उन्होंने सभी पक्षकारों, अधिवक्ताओं और इस संघर्ष से जुड़े लोगों का आभार माना। संगठन के प्रतिनिधियों ने कहा फैसला लंबे समय से चल रहे प्रयासों का परिणाम है और इसके लिए सभी सूत्रधारों को धन्यवाद दिया जाना चाहिए।
फैसले से पहले कड़ी चौकसी... फैसले को देखते हुए धार जिले में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। प्रशासन ने धारा 163 लागू कर पांच से अधिक लोगों के एकत्र होने पर रोक लगा दी थी।
किसी भी प्रकार के धरना, प्रदर्शन और जुलूस पर प्रतिबंध लगाया गया। पुलिस ने सामाजिक माध्यमों पर भड़काऊ टिप्पणियों की निगरानी तेज कर दी थी। साथ ही पेट्रोल और डीजल की बोतलों में बिक्री पर भी विशेष नजर रखी जा रही थी।
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