हाईकोर्ट के आदेश से रुक गई युवती की दूसरी शादी: न्यायालय ने बचाया वैवाहिक अधिकार
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
न्यायपालिका को यूं ही न्याय का मंदिर नहीं कहा जाता, क्योंकि यहां पहुंचने वाले हर व्यक्ति को कानून के दायरे में न्याय मिलने की उम्मीद रहती है। ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जिसमें प्रेम विवाह कर नए जीवन की शुरुआत करने वाले जोड़े को कथित साजिश के तहत महज 18 दिन में अलग कर दिया गया। हालांकि, उच्च न्यायालय की शरण लेने के बाद अब विवाहिता की जबरन दूसरी शादी पर रोक लग गई है और दंपति के साथ रहने का रास्ता खुलता नजर आ रहा है।
उच्च न्यायालय के अधिवक्ता अरुण सांवले के अनुसार रतलाम निवासी एक युवक और युवती 2 फरवरी को विवाह करने के उद्देश्य से इंदौर पहुंचे थे। दोनों बालिग थे और आपसी सहमति से इंदौर स्थित आर्य समाज मंदिर में विधिवत विवाह किया गया। आवश्यक दस्तावेजों के आधार पर शादी संपन्न हुई और इसके बाद विवाह पंजीयन के लिए इंदौर नगर निगम में आवेदन किया गया। 4 फरवरी को दोनों को विवाह प्रमाण पत्र भी प्राप्त हो गया। इसी दौरान युवती के परिजन ने उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करा दी, जिसके चलते विवाह से जुड़े दस्तावेज रतलाम के संबंधित थाने भेजे गए।
वन स्टॉप सेंटर भेजना कानूनी तौर पर सही नहीं
अधिवक्ता अरुण सांवले का कहना था कि शादी के समय युवती बालिग थी, शादी के बाद रतलाम पुलिस ने बयान के लिए बुलाकर उसे वन स्टॉप सेंटर कैसे भेजा, जो कानूनी तौर पर सही नहीं है। वही पुलिस ने युवती को परिजन को सोप दिया। जो पुलिस की कार्यप्रणाली पर कई सवालिया निशान लगाता है।
युवती को वन स्टॉप सेंटर भेज दिया
6 फरवरी को नवविवाहित जोड़ा अपने बयान दर्ज कराने रतलाम थाने पहुंचा, लेकिन आरोप है कि पुलिस की कार्रवाई के दौरान युवती को उसी दिन वन स्टॉप सेंटर भेज दिया गया। दूल्हे ने इस पर आपत्ति भी दर्ज कराई, लेकिन युवती के परिजन और पुलिस की कथित मिलीभगत के कारण उसे पति के साथ जाने नहीं दिया गया।
युवती को 13 फरवरी तक वन स्टॉप सेंटर में रखा गया। बाद में जब पति ने अपनी पत्नी से संपर्क करने की कोशिश की तो उसका फोन बंद मिला। जानकारी लेने पर पता चला कि युवती को परिजन के सुपुर्द कर दिया गया है।
उच्च न्यायालय में याचिका दायर की
स्थिति गंभीर होने पर नवविवाहित युवक ने अधिवक्ता अरुण सांवले के माध्यम से उच्च न्यायालय में याचिका दायर की। याचिका में आशंका जताई कि युवती की जबरन दूसरी शादी कराई जा रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने तत्काल रतलाम पुलिस को निर्देश दिए कि विवाहिता को न्यायालय के समक्ष पेश किया जाए।
जानकारी के अनुसार 20 फरवरी को परिवार द्वारा किसी सामूहिक सम्मेलन में युवती का पुनर्विवाह कराने की तैयारी की जा रही थी, लेकिन न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद फिलहाल इस पर रोक लग गई है।
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