‘सरकार’ की नजर विदेशी मुद्रा भंडार पर: बात तेल की चंद बूंदों की नहीं
KHULASA FIRST
संवाददाता

देशवासियों से प्रधानमंत्री की संयम की गुहार के पीछे छुपी है बड़ी रणनीति
‘आर्थिक महायुद्ध’ की तरफ बढ़ी दुनिया, समय रहते भारत के सचेत होने का आया वक्त
विशेषज्ञों का मत- दलगत राजनीति के नजरिये से न देखें पीएम की अपील को, देशहित में सोचें
जनता ही नहीं, अब सरकार ने भी पकड़ी संयम की राह, सीमित हुई सरकारी काफिलों की संख्या
प्रधानमंत्री, गृहमंत्री सहित कई केंद्रीय मंत्रियों ने घटाई काफिले में वाहनों की संख्या
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सहित कई राज्यों के मुख्यमंत्री भी आगे आए, कई कार्यक्रम निरस्त
सरकार एक्शन में आई, शकर के निर्यात पर लगाई रोक, दाम बढ़ने की थी आशंका
नितिन मोहन शर्मा 94250-56033 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र का नेता अगर 24 घंटे के अंतराल में दो बार देशवासियों से संयम बरतने की अपील कर रहा है तो बात गंभीर है। मसला एक बरस सोना खरीदने न खरीदने से कहीं आगे का है।
मामला पेट्रोल-डीजल की चंद बूंदों को बचाने तक ही सीमित नहीं। न ये विदेश यात्राओं पर लगाम के जरिए नैतिक व सांस्कृतिक अनुशासन को स्थापित करने का कोई प्रयास है।
पीएम की गुहार के गहरे निहितार्थ हैं, जो देश-दुनिया के अर्थ तंत्र व वैश्विक परिदृश्य को समझने में माहिर लोगों ने समझे हैं।
इस मामले में विशेषज्ञता रखने वालों का मत है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील को दलगत राजनीति के नजरिये से न देखा जाना चाहिए।
ये मामला केवल एक दल का नहीं, देश का है, देश के अर्थ तंत्र व अर्थव्यवस्था से जुड़ा है।
ऐ से समय जब दुनिया महायुद्ध के मुहाने पर खड़ी है, ऐसे में देशवासियों के थोड़े से प्रयास भारत को दुनिया की आर्थिक महाशक्ति बनने की राह का आसान कर देंगे।
मध्यपूर्व का संकट भले ही हिंदुस्तान की सरहदों से हजारों किमी दूर पसरा है। इस संकट की आंच से अब तक हमारा मुल्क बचा हुआ है।
आगे भी ऐसा ही हो और देश पर कम से कम इस युद्ध का असर हो, इसके लिए देशवासियों को देशहित में ही चिंतन, मनन व कर्म करना चाहिए।
ये न पीएम मोदी, न भाजपा का मसला है, ये हमारे भविष्य से जुड़ा विषय है।
प्रधानमंत्री की अपील साफ बता रही है कि बात कुछ बड़ी है। आपके प्रिय पक्के इंदौरी अखबार खुलासा फर्स्ट ने इसका अंदेशा सबसे पहले जता भी दिया था कि कुछ बड़ा होने वाला है क्या? बीते 48 घंटे में केंद्र व राज्यों की सरकार द्वारा उठाए जा कदम इस बात की तरफ इशारा कर रहे हैं कि दुनिया में आर्थिक महायुद्ध के हालात बनते जा रहे हैं।
इससे न सिर्फ भारत, बल्कि दुनिया में महंगाई बढ़ना है। केंद्र सरकार अभी से सतर्क हो गई है।
प्रधानमंत्री की अपील का आशय ही ये है कि हमें पेट्रोल, डीजल, सोना, फर्टिलाइजर जैसी वस्तुओं की खरीद में विदेशी मुद्रा भंडार खर्च नहीं करना है। करना भी है तो कम से कम खर्च हो। गुरुवार को सरकार ने शकर के निर्यात पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया।
ये शकर के दामों में संभावित बढ़त की आशंकाओं के चलते किया गया है। दूसरी तरफ केंद्र व राज्यों की सरकारों ने भी सरकारी खर्च में कटौती की तरफ कदम बढ़ाकर साफ कर दिया है कि भारत को इस आर्थिक महायुद्ध से बचना ही होगा अन्यथा देश दुनिया की तीसरी बड़ी आर्थिक ताकत होने के स्वप्न से दूर हो जाएगा।
वर्क फ्रॉम होम का सुझाव एक मॉक ड्रिल
वर्क फॉर्म होम, भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था का एक टेस्ट है कि क्या संकट के समय देश की उत्पादकता सड़कों के बजाय इंटरनेट पर सुरक्षित रह सकती है? यह एक तरह की तूफान से पहले की मॉकड्रिल है।
अगर कल को बाहर हालात ज्यादा बिगड़ते हैं तो क्या हमारा काम और रोजगार घर बैठे सुरक्षित रह सकता है? यह खुद को आत्मनिर्भर बनाने का अभ्यास है। जब वैश्विक व्यापार मार्ग असुरक्षित होते हैं तो ग्लोबलाइजेशन फेल हो जाता है।
ऐसी स्थिति में केवल वही देश बचेंगे जो स्थानीय स्तर पर मजबूत होंगे। यह अपील किसी सरकार की कमजोरी नहीं, बल्कि एक उभरती हुई महाशक्ति की रणनीतिक दूरदर्शिता है।
प्रधानमंत्री जानते हैं कि भविष्य में युद्ध केवल सीमाओं पर नहीं, बल्कि आपकी जेब और रसोई के बजट पर लड़े जाएंगे।
आखिर भारत में ऐसा करना क्यों जरूरी है?
प्रधानमंत्री दो बार संयम की गुहार लगाएं तो समझ लीजिए कि बात सिर्फ तेल की चंद बूंदों की नहीं है। यह उस आर्थिक महायुद्ध की तैयारी है जिसकी धमक अभी आम कानों तक नहीं पहुंची है। प्रधानमंत्री की नजर पेट्रोल पंपों पर नहीं, बल्कि रिजर्व बैंक के विदेशी मुद्रा भंडार पर है।
भारत तेल डॉलर देकर खरीदता है। पश्चिम एशिया में तनाव का मतलब है डॉलर का महंगा होना। सोना न खरीदने की अपील इसी विदेशी मुद्रा को बचाने की एक सर्जिकल स्ट्राइक है।
तेल सप्लाई की चेन होरमुज स्ट्रेट में टूटी पड़ी है, इसलिए प्रधानमंत्री कह रहे हैं कि तेल कम जलाओ और कार पूल करो, ताकि जो तेल भंडार हमारे पास पहले से जमा है वह लंबे समय तक चले और हम मुश्किल वक्त के लिए तैयार रहें।
पीएम की अपील उस अनुशासन का आह्वान है, जहां एक आम नागरिक द्वारा बचाया गया पेट्रोल का एक कतरा और घर की तिजोरी में न खरीदा गया सोने का एक टुकड़ा देश की साख के लिए कवच बनेगा। यह वक्त सुख-सुविधाओं के विस्तार का नहीं, बल्कि राष्ट्र की जड़ों को इतना गहरा करने का है कि वैश्विक अस्थिरता की कोई भी आंधी हमें हिला न सके।
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