भोजशाला के द्वार सरकार: सीएम का ऐलान- अब बदलेगी धार की किस्मत
KHULASA FIRST
संवाददाता

हिंदुओं के पक्ष में फैसला आने के बाद पहली बार भोजशाला पहुंचे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव
मुख्यमंत्री ने भोजशाला के दर्शन कर मां वाग्देवी की पूजा-आरती की
महाकाल लोक की तर्ज पर धार में बनेगा सरस्वती लोक, भोज शोध संस्थान की भी होगी स्थापना
भोजशाला मुक्ति आंदोलन में बलिदानी हुए लोगों के परिजन का सीएम ने किया सम्मान
नितिन मोहन शर्मा 94250-56033 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सोमवार को धार पहुंचे। उन्होंने ऐतिहासिक भोजशाला में मां वाग्देवी के दर्शन व पूजन किया। इस अवसर पर यहां सरस्वती लोक व भोज शोध संस्थान बनाने का ऐलान किया।
उन्होंने भोजशाला आंदोलन में शहीद हुए तीन बलिदानियों लक्ष्मण सिंह- पंचघाटी, बने सिंह- अमझेरा व अंतर सिंह के परिजन को 5-5 लाख रुपए आर्थिक सहायता देने की घोषणा की।
सीएम ने जय-जय सियाराम के उद्घोष के साथ भाषण की शुरुआत की और कहा कि गंगा दशहरा पर उन्हें भोजशाला में मां वाग्देवी के दर्शन का सौभाग्य मिला।
हाई कोर्ट के फैसले के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सोमवार को धार पहुंचे। यहां उन्होंने भोजशाला में भी फैसले के दस दिन बाद दस्तक दी।
मंत्रोच्चार के साथ आरती उतारी। इसके बाद मोतीबाग चौक पर आयोजित सभा में भोजशाला क्षेत्र के विकास का रोडमैप सामने रखा।
मुख्यमंत्री ने यहां सरस्वती लोक व संस्थान बनाने की घोषणा करते हुए कहा धार अब धार्मिक, सांस्कृतिक व पर्यटन की नई पहचान बनेगा। उन्होंने कहा 750 साल के संघर्ष के बाद आया फैसला धारवासियों के धैर्य व आस्था की जीत है।
इस दौरान चले मुक्ति आंदोलन में हताहत हुए लोगों के परिजन को मंच पर सम्मानित किया गया। उनकी स्मृति में 2 मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि भी दी गई।
कार्यक्रम में केंद्रीय राज्यमंत्री सावित्री ठाकुर, नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, विधायक नीना वर्मा सहित कई जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।
अब धार का इतिहास बदलेगा... मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कांग्रेस को निशाने पर लेते हुए कहा कांग्रेस पार्टी ने भगवान राम के नाम पर लोगों को लड़ाने का काम किया।
2026 की वसंत पंचमी के बाद धार का इतिहास अब बदलने लगा है। धार विकास की दौड़ में पीछे रह गया था, लेकिन अब भोजशाला क्षेत्र की ऐतिहासिक व सांस्कृतिक पहचान को नई दिशा दी जाएगी।
भोजशाला लोक व शोध संस्थान इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम होंगे। भोजशाला दर्शन के बाद मुख्यमंत्री मोतीबाग चौक पहुंचे, जहां विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण व भूमिपूजन किया।
साथ ही सरकारी योजनाओं के हितग्राहियों को लाभ भी वितरित किया। उन्होंने देवी सागर तलाब पहुंचकर जल गंगा संवर्धन अभियान और गंगा दशहरा कार्यक्रम के तहत श्रमदान भी किया।
भगवा माहौल में सीएम ने कहा- अब धार का इतिहास बदलेगा, विकास की दौड़ में सबसे आगे होगा
भोजशाला का मसला मध्य प्रदेश के लिए अयोध्या की तरह किसी भी सूरत में भावनात्मक व सनातन आस्था से कम न था, लेकिन सदियों के संघर्ष बाद भोजशाला पर हिंदुओं के पक्ष में आए फैसले के बाद ‘सरकार’ की तरफ से सुस्त प्रतिक्रिया सबको हैरत में डाल रही थी।
सब तरफ आश्चर्य था कि हिंदुत्व की इतनी बड़ी जीत के बाद भी ‘सरकार’ अब तक ‘निरपेक्ष’ क्यों हैं। इस बीच तनातनी वाला पहला जुम्मा भी गुजर गया। धार ने भी जश्न मना लिया, लेकिन प्रदेश के मुखिया के नजर-ए-करम राजा भोज की नगरी की तरफ नहीं हुए।
कयासों व चर्चाओं का बाजार गरम हो ही रहा था कि सोमवार को तमाम संशय, भ्रम दूर हो गए। ‘सरकार’ स्वयं भोजशाला के द्वार पर जाकर खड़ी हो गई। मां वाग्देवी के प्रतिकृति विग्रह को देख भावविभोर भी हो गई ‘सरकार’।
हाथ में पूजा की थाली लेकर आरती भी उतारी। कृतज्ञ भाव से उन बलिदानियों को भी ‘सरकार’ ने याद किया, जो हिंदू स्वाभिमान के इस मानबिंदु की मुक्ति के आंदोलन में हताहत हो गए थे। सरकार ने दो कदम आगे जाकर ऐसे शहीद परिवारों को पांच-पांच लाख की आर्थिक सहायता दी।
धारा नगरी में ये ऐलान भी किया कि अब धार की तकदीर व तदबीर, दोनों बदलेगी। धार में उज्जैन के महाकाल लोक जैसा सरस्वती लोक होगा और भोज शोध संस्थान भी आकार लेगा। अब सब तरफ ये चर्चा है- ‘सरकार’ देर से, लेकिन ‘दुरुस्त’ आई।
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