पटाखा बाजार में ‘सेटिंग’ का खेल: करोड़ों की वसूली अटकी; बिना अनुमित बाजार सजाने के आरोप
KHULASA FIRST
संवाददाता

आईडीए की 1.07 करोड़ से अधिक की राशि और जीएसटी का मामला
62 लाख की वसूली पर भी सवाल, 41 लाइसेंसों में 11 को किराए पर देने की शिकायत
अंकित शाह 99264-99912 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
दीपावली पर पटाखा बाजार लगाने के लिए विस्फोटक सुरक्षा नियमों, लाइसेंस और जमीन आवंटन की प्रक्रिया का पालन अनिवार्य है, लेकिन इंदौर में अस्थायी थोक पटाखा बाजार को लेकर सामने आए दस्तावेज और शिकायतें व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं।
आईडीए की स्कीम-97 स्थित रीजनल पार्क की जमीन पर अतिरिक्त क्षेत्रफल के उपयोग से जुड़ी करोड़ों रुपए की राशि की वसूली, नए आवंटन की प्रक्रिया और बाजार में पहले से चल रही गतिविधियों को लेकर विवाद गहरा गया है। सवाल है कि जब पिछली देनदारियों का निपटारा ही विवादों में है, तो नए बाजार की तैयारियां किस आधार पर आगे बढ़ रही हैं?
1.07 करोड़ से अधिक की देनदारी, वसूली कहां अटकी?... दस्तावेजों के अनुसार रीजनल पार्क में अस्थायी थोक पटाखा बाजार के लिए इस्तेमाल की गई जमीन से जुड़े दो मामलों में 1.07 करोड़ से अधिक की राशि और उस पर जीएसटी निर्धारित किए जाने की जानकारी सामने आई है।
आईडीए के संपदा अधिकारी ने 9 अक्टूबर 2025 को इस संबंध में मुख्य कार्यपालन अधिकारी को पत्र भेजा था। प्रकरण में अतिरिक्त क्षेत्रफल के उपयोग की राशि वसूलने की जिम्मेदारी सहायक यंत्री कपिलदेव भल्ला को सौंपे जाने की जानकारी भी सामने आई है। इसके बावजूद शिकायतकर्ता का आरोप है कि निर्धारित राशि की पूरी वसूली किए बिना ही अगले वर्ष के आवंटन की गतिविधियां शुरू कर दी गईं।
यदि दस्तावेजों में दर्ज देनदारी की वसूली लंबित है, तो जिम्मेदार अधिकारियों ने वसूली सुनिश्चित करने के लिए क्या कार्रवाई की? क्या किसी स्तर पर छूट या समझौता हुआ और यदि हुआ, तो किस नियम के तहत? इन सवालों के जवाब आईडीए को देना चाहिए।
62 लाख की वसूली का मामला, व्यापारी ने बताई 36 लाख जमा करने की बात... इसी जमीन को लेकर करीब 62 लाख की बकाया राशि की वसूली का मामला भी सामने आया है। अस्थायी थोक पटाखा व्यापारी एसोसिएशन के अध्यक्ष शंकर होतचंदानी का कहना है कि आईडीए अधिकारियों के साथ बातचीत में करीब 36 लाख की राशि पर सहमति बनी थी और उनके अनुसार यह राशि जमा कर दी गई है।
यहां अहम सवाल है कि 1.07 करोड़ से अधिक की देनदारी वाले दो मामलों का आपसी संबंध क्या है? क्या दोनों अलग-अलग अवधियों और मदों से जुड़े हैं? जमा राशि किस आदेश के तहत स्वीकार की गई और शेष रकम कितनी है? इन बिंदुओं पर आधिकारिक दस्तावेजों के आधार पर स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है। आईडीए के मुख्य कार्यपालन अधिकारी परीक्षित झाड़े से पक्ष जानने के लिए संपर्क किया गया, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया। इसलिए समझौते, जमा राशि और वर्तमान बकाया की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है।
41 लाइसेंसों में 11 को किराए पर देने की शिकायत... 30 अगस्त को कलेक्टर को दिए गए आवेदन में अस्थायी पटाखा दुकानों के लाइसेंस आवंटन की प्रक्रिया की जांच की मांग की गई थी। शिकायत के मुताबिक हर साल करीब 41 अस्थायी लाइसेंस जारी किए जाते हैं। इनमें से लगभग 11 लाइसेंसधारकों द्वारा दुकानें या लाइसेंस दूसरे लोगों को कथित तौर पर तीन से पांच लाख रुपए सालाना किराए पर देने का आरोप है।
आवेदन में पिछले सात वर्षों के लाइसेंस रिकॉर्ड की जांच करने, लगातार लाइसेंस प्राप्त करने वालों की सूची तैयार करने और वास्तविक कारोबारियों की पहचान सत्यापित करने की मांग की गई है। इसके लिए गुमास्ता, जीएसटी, पुराने वैट रिकॉर्ड, टैक्स रिटर्न और आयकर रिटर्न की जांच का सुझाव भी दिया गया है। आरोपों की पुष्टि संबंधित रिकॉर्ड और जांच के बाद ही हो सकेगी।
हादसों के बावजूद सुरक्षा व्यवस्था की परीक्षा... 14 मई 2026 को देवास जिले के टोंककलां क्षेत्र में पटाखा फैक्ट्री में हुए विस्फोट के बाद सुरक्षा नियमों के पालन का मुद्दा और गंभीर हो जाता है। उपलब्ध विवरण के अनुसार हादसे में तीन से पांच लोगों की मौत हुई थी और 25 से अधिक लोग घायल हुए थे।
अस्थायी पटाखा बाजार में जमीन का आवंटन, भंडारण, अग्नि सुरक्षा और लाइसेंस संबंधी शर्तों का पालन केवल औपचारिकता नहीं हो सकता। प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि बाजार संचालन की हर जरूरी अनुमति मौजूद हो और सुरक्षा मानकों में कोई समझौता न हो।
अब आईडीए और जिला प्रशासन से सीधे सवाल हैं : इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा और आईडीए सीईओ परीक्षित झाड़े 1.07 करोड़ से अधिक की दर्ज देनदारी की वसूली की स्थिति क्या है? 62 लाख की बकाया राशि का अंतिम हिसाब क्या है? 36 लाख जमा किए जाने के दावे की पुष्टि कौन करेगा?
जमीन का विधिवत आवंटन और सभी जरूरी अनुमतियां कब जारी हुईं? 41 लाइसेंसों में कथित किराएदारी की जांच कब होगी? इन सवालों पर दस्तावेजों सहित जवाब और निष्पक्ष जांच ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति सामने ला सकती है।
जमीन का विधिवत आवंटन हुआ या पहले ही लग गया पटाखा बाजार?
शिकायत के अनुसार रीजनल पार्क में दुकानों के नंबर आवंटित करने के लिए व्यापारी एसोसिएशन ने लकी ड्रॉ की प्रक्रिया शुरू की और दुकानों के चालान भरवाए। बाजार में दो कंटेनरों में पटाखे रखे होने तथा कुछ दुकानों पर कारोबार शुरू होने की बात भी सामने आई है।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या जमीन का विधिवत आवंटन, जिला प्रशासन की अनुमति और पटाखों के भंडारण एवं बिक्री के लिए जरूरी लाइसेंस पहले ही जारी हो चुके हैं? चालान भरने या दुकानों के नंबर तय होने से अपने आप जमीन आवंटन और विस्फोटक संबंधी अनुमति पूरी नहीं हो जाती। यदि आवश्यक स्वीकृतियों से पहले बाजार संचालित हुआ है, तो इसकी जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
विजय नगर थाने के सामने की जमीन पर भी उठा था सवाल
आईडीए की जमीन के आवंटन और शुल्क निर्धारण को लेकर विजय नगर थाने के सामने स्थित जमीन का मामला भी पहले विवादों में आया था। यहां मेला आयोजन के लिए आवंटित जमीन के क्षेत्रफल और वसूली की गणना पर सवाल उठे थे। कांग्रेस ने कथित दोहरे रवैये के विरोध में प्रदर्शन किया था और आईडीए की ओर से सात दिन में जवाब देने की बात सामने आई थी।
किराए में छूट और नए आवंटन पर भी उठे सवाल
शिकायतकर्ता ने वर्तमान वर्ष में व्यापारियों को किराए में छूट दिए जाने की चर्चा का भी उल्लेख किया है। यदि ऐसी छूट दी गई है, तो उसका आधार, सक्षम अधिकारी की स्वीकृति और वित्तीय प्रभाव सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
सरकारी जमीन के उपयोग में नियम सभी पर समान रूप से लागू होने चाहिए। बकाया वसूली के मामले में सख्ती और नए आवंटन में रियायत के बीच किसी तरह का अंतर है, तो उसका दस्तावेजी स्पष्टीकरण जरूरी है।
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