शकर कारखाने की जमीन पर नामांतरण का खेल: 50 साल पुराने अंशधारकों की अनदेखी; कांग्रेस ने कलेक्टर ऑफिस घेरा
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
मालवा सहकारी शक्कर कारखाना बरलाई (शिप्रा) की जमीन को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। करीब 50 वर्ष पहले 500 और 1000 रुपये में शेयर लेने वाले अंशधारक किसानों के परिवार आज खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।
आरोप है कि आपत्तियों के बावजूद नामांतरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है और जमीन पर निर्माण कार्य भी जारी है। इस मुद्दे पर जिला कांग्रेस कमेटी के नेतृत्व में कांग्रेसियों और प्रभावित किसानों ने कलेक्टर कार्यालय के बाहर जमकर प्रदर्शन किया।
जानकारी के अनुसार, मालवा सहकारी शक्कर कारखाना बरलाई (शिप्रा) की 30.133 हेक्टेयर भूमि 22 अक्टूबर 2023 को प्राप्त होने के बाद इसे म.प्र. शासन के औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग को आवंटित/नामांतरित करने की प्रक्रिया शुरू की गई। इस संबंध में अनुविभागीय अधिकारी (सांवेर) कार्यालय द्वारा विज्ञप्ति जारी कर 7 दिन के भीतर आपत्तियां दर्ज कराने का समय दिया गया।
अंशधारक किसानों के परिवारों ने स्पष्ट आपत्ति दर्ज कराई कि भूमि का नामांतरण रोका जाए, अंश के अनुपात में भूमि दी जाए या वर्तमान बाजार भाव से मुआवजा दिया जाए, लेकिन किसानों का आरोप है कि आपत्तियों के बावजूद जमीन पर निर्माण कार्य जारी है।
500 रुपए के शेयर, आज करोड़ों की जमीन
प्रभावित किसान आनंदीलाल व्यास (ग्राम कुनगारा, तहसील देपालपुर) सहित अन्य अंशधारकों का कहना है कि लगभग 50 साल पहले जब जमीन का भाव 500 से 1000 रुपये प्रति बीघा था, तब परिवारों ने कारखाने में निवेश किया था।
आज वही जमीन करोड़ों में पहुंच चुकी है, लेकिन अंशधारकों को उनका हक नहीं मिल रहा। किसानों की मांग है कि अंश के अनुपात में भूमि लौटाई जाए या आज के बाजार भाव से उचित मुआवजा दिया जाए।
कलेक्टर कार्यालय पर कांग्रेस का प्रदर्शन : जिला कांग्रेस कमेटी इंदौर के नेतृत्व में कलेक्टर कार्यालय के गेट पर जोरदार प्रदर्शन हुआ। सैकड़ों कांग्रेस कार्यकर्ता और प्रभावित किसान हाथों में तख्तियां लेकर पहुंचे और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की।
जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष विपिन वानखेड़े ने अंशधारक किसान प्रतिनिधि के रूप में एसडीएम को कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि नामांतरण एवं निर्माण कार्य रोकने की आपत्ति देने के बावजूद निर्माण जारी है।
किसानों की प्रमुख मांगें
औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग द्वारा चल रही नामांतरण प्रक्रिया तुरंत रोकी जाए। अंशधारकों के परिवारों को उनके हिस्से के अनुपात में भूमि दी जाए या वर्तमान बाजार दर से मुआवजा दिया जाए।
बिना वैधानिक अनुमति के चल रहे निर्माण कार्य को तत्काल प्रभाव से रोका जाए। किसानों की आपत्तियों की अनदेखी करने वाले संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।
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