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गेहूं खरीदी केंद्रों पर ‘कटौती’ का खेल: किसानों ने लगाया यह आरोप; नमी, सैंपल और तौल के नाम पर हो रही वसूली

KHULASA FIRST

संवाददाता

29 अप्रैल 2026, 6:23 pm
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गेहूं खरीदी केंद्रों पर ‘कटौती’ का खेल

खुलासा फर्स्ट, रीवा।
प्रदेश सरकार जहां समर्थन मूल्य पर खरीदी के जरिए किसानों को राहत देने की बात करती है, वहीं जमीनी स्तर पर कई खरीदी केंद्रों पर उलटी तस्वीर सामने आ रही है। किसानों का आरोप है कि नमी, सैंपल और तौल के नाम पर अवैध वसूली की जा रही है, जिससे उनकी मेहनत की कमाई पर चोट पड़ रही है।

व्यवस्था परेशानी का कारण
राज्य में फसल खरीदी व्यवस्था किसानों के हित में बनाई गई है, लेकिन कई स्थानों पर यह व्यवस्था उनके लिए परेशानी का कारण बनती नजर आ रही है। किसान बताते हैं कि महीनों की मेहनत के बाद जब वे अपनी फसल लेकर खरीदी केंद्र पहुंचते हैं, तो उन्हें उचित मूल्य मिलने की उम्मीद होती है, लेकिन प्रक्रिया के दौरान कई तरह की बाधाएं सामने आती हैं।

नमी के नाम पर कटौती का आरोप
किसानों के अनुसार खरीदी केंद्रों पर सबसे पहले नमी के नाम पर कटौती की जाती है। कई मामलों में यह कटौती पारदर्शी तरीके से नहीं होती, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।

सैंपल प्रक्रिया पर सवाल
किसानों का कहना है कि सैंपल लेने के नाम पर 5 से 10 किलो तक अनाज अलग कर लिया जाता है। आरोप यह भी है कि अलग-अलग किसानों से लिए गए सैंपल को बाद में एक साथ मिलाकर रखा जाता है, जिससे पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं।

तौल के नाम पर वसूली
सबसे गंभीर आरोप तौल प्रक्रिया को लेकर हैं। किसानों का कहना है कि कुछ केंद्रों पर तौल के नाम पर प्रति क्विंटल राशि वसूली जाती है, जबकि सरकारी नियमों के अनुसार खरीदी केंद्रों पर किसानों से कोई शुल्क नहीं लिया जाना चाहिए।

मजबूरी में चुप किसान
किसानों का कहना है कि वे इन गड़बड़ियों का विरोध इसलिए नहीं कर पाते, क्योंकि उन्हें डर रहता है कि विरोध करने पर उनकी फसल खरीदी नहीं जाएगी। कई बार उन्हें मामूली कारण बताकर वापस लौटा दिया जाता है।

शिकायतें, लेकिन समाधान धीमा
किसान बताते हैं कि वे हर साल टोल फ्री नंबर 181 पर शिकायत दर्ज कराते हैं, लेकिन कार्रवाई में देरी होती है। कई बार शिकायत के बाद उन्हें दबाव या धमकियों का सामना भी करना पड़ता है, जिससे वे आगे शिकायत करने से कतराने लगते हैं।

हर सीजन में दोहराई जाती समस्या
किसानों के मुताबिक यह स्थिति केवल एक सीजन तक सीमित नहीं है, बल्कि रबी, खरीफ और जायद—तीनों सीजन में खरीदी केंद्रों पर इसी तरह की शिकायतें सामने आती रहती हैं।

जरूरत पारदर्शिता और निगरानी की
विशेषज्ञों का मानना है कि खरीदी प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और डिजिटल बनाना, साथ ही सख्त निगरानी व्यवस्था लागू करना जरूरी है। इससे न केवल किसानों का भरोसा बढ़ेगा, बल्कि सरकार की योजनाओं का वास्तविक लाभ भी उन्हें मिल सकेगा।

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